विज्ञापन वर्गीकरण, कार्य और लाभ - Advertising Classification, Functions and Benefits
विज्ञापन वर्गीकरण, कार्य और लाभ - Advertising Classification, Functions and Benefits
विज्ञापन के प्रकार व वर्गीकरण
विज्ञापन के प्रमुख प्रकार अथवा वर्गीकरण निम्नवत है:
1. उपभोक्ता एवं औद्योगिक विज्ञापन (Consumer And Industrial Advertising ) :- उपभोक्ता विज्ञापन उपभोक्ताओं के हितों के लिए किए जाते है। औद्योगिक विज्ञापन औद्योगिक प्रयोक्ताओं (Industrical Uses) की आवश्यकताओं एवं हितों की पूर्ति के लिए किए जाते है। ये विज्ञापन दूसरे निर्माताओं द्वारा प्रयोग की जाने वाली मशीनों, अर्द्ध-निर्मित सामग्री, उपकरण आदि के सम्बन्ध में होते हैं।
2. प्राथमिक एवं चयनित विज्ञापन (Primary And Selective Advertising) :- प्राथमिक विज्ञापन वह होता है जो किसी वस्तु की सामान्य मांग में वृद्धि करने के उद्देश्य से किया जाता है, जैसे बच्चों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए ठोस आहार का विज्ञापन। चयनित विज्ञापन किसी विशिष्ट प्रकार की वस्तु की मांग उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, जैसे- कॉम्पलान बढ़ते बच्चों के लिए एक नियोजित आहार है।
3. प्रत्यक्ष कार्य तथा अप्रत्यक्ष कार्य विज्ञापन (Direct Action And Indirect Action Advertising) :- प्रत्यक्ष कार्य विज्ञापन वह होता है जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं से शीघ्र प्रतिक्रिया का ज्ञान करना होता हैं।
इस प्रकार के विज्ञापनों द्वारा पाठक से वस्तु का आदेश प्राप्त करने या वस्तु के सम्बन्ध में आवश्यक सूचना प्राप्त करने का लक्ष्य होता है। उदाहरण के लिए, जब किसी वस्तु का विज्ञापन दिया जाये और उसके साथ एक कुपन देकर पाठक से यह कहा जाये कि "वस्तु के नमूने प्राप्त करने के लिए यह कूपन भरकर भेजिए " तो इस प्रकार का विज्ञापन प्रत्यक्ष कार्यविज्ञापन कहलाता है। दूसरी तरफ, अप्रत्यक्ष कार्य विज्ञापन का उद्देश्य वस्तु की मांग को दीर्घकाल में बढ़ाना होता है। ये विज्ञापन वस्तु के गुणों के बारे में सूचना देते हैं। उदाहरणार्थ, “एस. कुमार की सूटिंग एवं शर्टिंग आपके व्यक्तित्व को निखारती है।” यह अप्रत्यक्ष कार्य विज्ञापन है। इसका उद्देश्य वस्तु खरीदने के लिए ग्राहकों को तुरन्त तैयार करना नहीं है, वरन इसका उद्देश्य वस्तु क्रय करते समय ग्राहक को उस विशिष्ट ब्रॉण्ड या फर्म जैस 'एस. कुमार' का स्मरण दिलाता है। इस विज्ञापन से ग्राहक की तुरन्त प्रतिक्रिया का ज्ञान नहीं हो पाता है।
4. ' अन्वेषक' तथा 'पोषक विज्ञापन (Pioneering And Sustaining Advertising ) :- अन्वेषक विज्ञापन किसी वस्तु के लिए नई मांग उत्पन्न करते हैं। जब कोई नई वस्तु बनायी जाती है तो बाजार में उसकी कोई मांग नहीं होती है। अत: विज्ञापन के द्वारा उस नई वस्तु के गुणों, उपयोगिता एवं भिन्न तत्वों आदि के बारे में ग्राहकों को जानकारी दी जाती है, ताकि उस वस्तु की मांग उत्पन्न हो सके। इस श्रेणी के विज्ञापनों में माइक्रोवेव ओवेन, पर्यटन स्थल, नवीन इलेक्ट्रॉनिक आइटम, उपन्यास या नयी पुस्तक आती है।
दूसरी ओर जब किसी वस्तु की मांग तो विद्यमान होती, किन्तु उस मांग के स्तर को नीरंतर बनाये रखने के लिए विज्ञापन किया जाता है तो यह पोषक विज्ञापन कहलाता है।
इसका उद्देश्य वस्तु की मांग में कोई कमी न आने देता है। यह मांग को स्थिर या मांग को पोषण देने वाला विज्ञापन होता है।
5. वस्तुगत एवं संस्थागत विज्ञापन (Product and Institutional Advertising):- वस्तुगत विज्ञापन किसी वस्तु की बिक्री बढ़ाने या किसी ब्रॉण्ड विशेष की ख्याति में वृद्धि करने के लिए किया जाता है... जैसे - पीयर्स साबुन की विक्रय वृद्धि का विज्ञापन
संस्थागत विज्ञापन वह होता है, जिसमें संस्था के नाम को प्रचारित करके उसकी ख्याति बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। संस्था का नाम स्थापित जाने से उसके उत्पादों की बिक्री बढ़ जाती है, जैसे पंजाब नेशनल बैंक या हिन्दुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड का विज्ञापन
6. राष्ट्रीय तथा स्थानीय विज्ञापन (National and Local Advertising ) :- राष्ट्रीय विज्ञापन राष्ट्रीय स्तर पर किए जाने हैं। ये ऐसी वस्तुओं के संबंध में होते हैं, जिनका उपभोग पूरे देश में किया जाता है। स्थानीय विज्ञापन प्रायः सीमित मांग वाली वस्तुओं के संबंध में स्थानीय विज्ञापन माध्यमों के द्वारा प्रसारित किए जाते हैं।
7. तथ्यात्मक एवं भावात्मक विज्ञापन (Factual and Sentimental Advertising ) :- तथ्यात्मक विज्ञापन में उपभोक्ताओं को वस्तु से संबंधित तथ्यों से अवगत कराया जाता है। जबकि भावात्मक विज्ञापन में उपभोक्ताओं की भावनाओं को जागृत करके उन्हें क्रय के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
8. सूचनात्मक एवं प्रतिस्पर्धी विज्ञापन (Informative and Competitive Advertising ) :- जब विज्ञापन का उद्देश्य ग्राहकों को विभिन्न सूचनाएँ प्रदान करके उन्हें शिक्षित करना होता है तो इसे सूचनात्मक विज्ञापन कहा जाता है, किन्तु जब किसी आपसी प्रतिस्पर्धा को जीतने अथवा दूसरे प्रतिस्पर्धी के विज्ञापन की प्रतिक्रिया में कोई विज्ञापन किया जाता है, तो इसे प्रतिस्पर्धी विज्ञापन कहते हैं। 9. 'धक्का' या प्रेरक तथा 'खींच' या आकर्षी विज्ञापन (Push and Pull Advertising ) :- जब विज्ञापन के द्वारा मध्यस्थों को माल अधिक से अधिक विक्रय के लिए प्रेरित किया जाता है, तो उसे "धक्का" या प्रेरक विज्ञापन कहा जाता है। खींच या आकर्षी विज्ञापन वह होता है जिसके द्वारा ग्राहकों को माल खरीदने हेतु आकर्षित किया जाता है।
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