विज्ञापन - योजना के मूलभूत क्षेत्र - Advertising - Fundamental Areas of Planning
विज्ञापन - योजना के मूलभूत क्षेत्र - Advertising - Fundamental Areas of Planning
उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए विज्ञापन योजना के मूलभूत क्षेत्रों को जानना आवश्यक है, जिनको निम्नलिखित छह भागों में बाँट सकते हैं :
1. बाजार विश्लेषण (Analyzing the Market) :- किसी भी उत्पाद को बेचने के लिए बाजार की आवश्यकता होती है। उत्पाद बाजार से होते हुए उपभोक्ता तक पहुँची है। इसीलिए बाजार का विश्लेषण बहुत जरूरी होता है। बाजार विश्लेषण में विज्ञापनकर्ता उन तथ्यों का परीक्षण करता है, जो उत्पाद के लिए बाजार को निर्धारित एवं संचालित करते हैं। विज्ञापन एजेन्सी विज्ञापन योजना के निर्माण एवं उसे संचालित करने से पहले संभावित बाजार तथा उस बाजार की स्थिति का विश्लेषण करते हैं,
जिसमें फर्म, संभावित उपभोक्ता अपने उत्पाद के प्रतिस्पद्ध, उनका मूल्य, प्रतिस्पर्धी की विपणन प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी एकत्रित करके उनका विश्लेषण करते हैं।
2. विज्ञापन लक्ष्यों का निर्धारण (Determination Of Advertising Objectives) :- बाजार विश्लेषण
के पश्चात उनसे प्राप्त तथ्यों के आधार पर भावी विज्ञापन योजना बनायी जाती है। बाजार विश्लेषण द्वारा प्राप्त तथ्यों के आधार पर ही विज्ञापन लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। विज्ञापन-योजना के लिए निम्नलिखित लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते हैं :
1. अपने उत्पाद या ब्राण्ड के प्रति उपभोक्ता की जागरुकता तथा जिज्ञासा को बढ़ाना।
2. उत्पाद के प्रति उपभोक्ता की धारणा एवं रूख को बदलना।
3. वस्तु के परीक्षण तथा प्रयोग के लिए उपभोक्ता को प्रेषित करना ।
4. वस्तु का प्रयोग बार-बार करने के लिए उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना।
5. अन्य ब्राण्ड से उपभोक्ताओं को अपनी ब्राण्ड की तरफ आकर्षित करना।
6. बिक्री बढ़ाना
7. संभावित बाजार की पहचान करना।
3. विज्ञापन बजट (Advertising Budget) :- बजट भविष्य में की जाने वाली योजनाओं के लिए किया
गया वित्तीय प्रबंध होता है। विज्ञापन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य क्षेत्र आधार पर बनने वाली योजना के लिए बजट तय किया जाता है। बजट का निर्धारण एक विशेष समय सीमा के लिए किया जाता है, जो सामान्यतः एक वर्ष के लिए होता है। विज्ञापन बजट का उत्तरदायित्व निर्माता का होता है, जो बाजार की स्थिति के अनुसार बदलता रहता है। बाजार की स्थिति के अनुसार व्यापार की पूरी योजना, वितरण प्रक्रिया में होने वाले बदलाव, प्रतिस्पर्धा, उत्पादन क्षमता में बदलाव आदि में यदि आवश्यक हो तो विज्ञापन लक्ष्यों के साथ-साथ विज्ञापन बजट में भी समायोजन करना चाहिए।
4. विज्ञापन नीति का विकास (Developing Advertising Strategy ) :- विज्ञापन - योजना का उद्देश्य प्रभावी तरीके द्वारा लक्ष्यों को प्राप्त करता है। विज्ञापन नीति के विकास में दो तथ्य महत्वपूर्ण हैं।
(i) माध्यम का चुनाव तथा
(ii) विज्ञापन का सृजन
i. माध्यम का चुनाव : माध्यम का चुनाव करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि विज्ञापन किस जगह प्रसारित होगा तथा उसको प्रसारित करने की क्या नीति होगी? विज्ञापन माध्यम का चुनाव करने का प्रमुख उद्देश्य उस माध्यम की पहचान करना होता है, जो कम से कम लागत में प्रभावपूर्ण तरीके से विज्ञापनकर्ता का संदेश उपभोक्ता तक पहुँचाएं। विभिन्न माध्यमों जैस- रेडियो, दूरदर्शन, समाचार-पत्र,
पत्रिका, प्रत्यक्ष-मेल, इंटरनेट आदि माध्यम का चुनाव करते समय उनके विस्तार क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। जैसे अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा स्थानीय
ii. संदेश / विज्ञापन का सृजन :- संदेश का सृजन करते समय विज्ञापन- योजना एवं नीति का होना आवश्यक है क्योंकि एक विज्ञापनकर्ता निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कौन सी प्रक्रिया निर्धारित करे, जो ज्यादे प्रभावी हो। विज्ञापन में एक अच्छे संदेश का महत्व सामान्य संदेश से कई गुना अधिक होता है। यदि संदेश उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाला होगा तो वस्तु की मांग बिक्री भी बढ़ेगी। विज्ञापन संदेश में वस्तु की गुणवत्ता, उसकी कार्य क्षमता, कीमत, प्रयोग विधि, विशेष छूट योजना, विभिन्न प्रकार की इनामी योजनाओं आदि के बारे में जानकारी दी जाती है, जो एक व्यक्ति की नैसर्गिक इच्छाओं अनुभूतियों को प्रभावित करती है।
5. बिक्री बढ़ाने वाले अन्य तरीके में समन्वय (Coordination with other Promotional Methods) :- एक विज्ञापन योजना तभी ज्यादा प्रभावी होगा, जब अन्य सभी तरीके जो बिक्री बढ़ाने में सहायक होते है, के साथ अच्छा समन्वय हो। जैसे- वितरण प्रक्रिया, उत्पादन, वस्तु बेचने का स्थान, मध्यस्थ आदि।
6. परिणाम का मूल्यांकन (Evaluation Of Results ) :- विज्ञापन- योजना के परिणाम का मूल्यांकन किए बिना योजना संबंधी कार्य अधूरा रहता है। विज्ञापन योजना को प्रसारित करने से पूर्व इसकी विषय-वस्तु का प्रयोग बाजार की स्थिति के अनुसार किया जाता है तथा उससे प्राप्त परिणाम के अनुसार विज्ञापन नीति में बदलाव करके उसकी कमियों को दूर किया जाता है।
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