विज्ञापन रणनीति का विकास - advertising strategy development
विज्ञापन रणनीति का विकास - advertising strategy development
एक बार विज्ञापन की विषय-वस्तु की पहचान तथा निर्धारण हो जाने के बाद विज्ञापन रणनीति का विकास किया जाता है, ताकि निर्धारित विषय-वस्तु को मूर्त रूप दिया जा सके। 'रणनीति' शब्द से आशय किसी पूर्व निर्धारित अंत को प्राप्त करने के लिए बनायी गयी प्रसासों की रूपरेखा से है। यह विषय वस्तु एवं योजना क्रियान्वयन के बीच कड़ी का कार्य करता है तथा कार्यवाही की दिशा निर्धारित करता है। विज्ञापन
रणनीति के दो प्रमुख घटक होते हैं
1. मध्य रणनीति
2. सृजनात्मक रणनीति
1. मध्य रणनीति :- माध्यम रणनीति का मुख्य उद्देश्य न्यूनतम लागत पर अधिकतम श्रोताओं तक विज्ञापन संदेश पहुँचाना है। माध्यम रणनीति के अंतर्गत लक्षित उपभोक्ता तथा प्रचार माध्यमों के परस्पर सामंजस्य पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है ताकि विज्ञापन का वांछित प्रभाव उत्पन्न किया जा सके। विज्ञापन माध्यम का चुनाव करते समय लक्षित उपभोक्ताओं की माध्यम अभिरुचि, विभिन्न माध्यमों के प्रबल एवं निर्बल पक्ष तथा उनके प्रसार की गहनता आदि बातों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। माध्यम की चयन काफी सोच विचार के बाद ही करनी चाहिए। यदि आवंटित विज्ञापन धनराशि कम है, तो किसी सस्ते माध्यम का चयन किया जाता है तथा यदि विज्ञापन धनराशि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, तो इलेक्ट्रानिक माध्यमों का उपयोग किया जाता है।
विभिन्न विज्ञापन माध्यमों जैसे समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियों, टेलीविजन आदि की अपनी विशेषताएँ व कमियाँ होती है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक माध्यम की एक उपभोक्ता विशेष तक पहुँच होती है, इसलिए विज्ञापन माध्यम का चयन करते समय व्यावसायिक क्षेत्र के वर्गीकरण, संभावित उपभोक्ताओं का विभक्तिकरण, उत्पाद के संभावित बाजार, उपलब्ध बजट तथा माध्यम की विशेषज्ञताओं एवं कमियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
2. सृजनात्मक रणनीति :- सृजनात्मक रणनीति में विज्ञापन का निर्माण तथा इसका प्रस्तुतीकरण सम्मिलित रहता है। सर्वप्रथम विज्ञापन का प्रारूप पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार बनाया जाता है। विज्ञापन विभाग को विज्ञापन के सृजन का कार्य सौंपने के पूर्व सृजनात्मक रणनीति के निम्न पक्षों पर ध्यान देना आवश्यक है :
1. विज्ञापन में कौन संदेश को अभिव्यक्त या प्रदर्शित करेगा?
2. विज्ञापन किस माध्यम द्वारा विज्ञापित होगा ? 3. विज्ञापन में क्या कहना है? (विज्ञापन उद्देश्य के बारे में )
4. इसे क्यों कहना चाहते है?
5. इसे कैसे कहना चाहते है? (विषय-वस्तु एवं प्रस्तुतीकरण) 6. विज्ञापन संदेश का मनोबल या स्वरूप क्या होगा?
विज्ञापन की सृजनात्मक रणनीति बनाते समय व्यावसायिक क्षेत्र, लक्षित उपभोक्ता तथा उत्पाद या सेवा का पूर्ण ज्ञान होना अति आवश्यक होता है। ये सभी पक्ष विज्ञापन के वांछित प्रभाव को उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विज्ञापन संदेश लक्षित उपभोक्ताओं के सम्मुख होता है। केवल उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित करके उन्हें प्रेरित ही नहीं करता, बल्कि श्रोताओं के व्यवहार एवं प्रतिक्रिया को समझने में भी सहायक होता है। एक सही सृजनात्मक रणनीति एक सही माध्यम रणनीति के साथ मिलकर विज्ञापन के उद्देश्यों को प्राप्त करती है।
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