क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का समामेलन - Amalgamation of Regional Rural Banks

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का समामेलन - Amalgamation of Regional Rural Banks


कृषि तथा संबद्ध कार्यों को ऋण प्रवाह पर बनी सलाहकार समिति (अध्यक्ष प्रो. वी. एस. व्यास) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की परिचालानात्मक सक्षमता में सुधार करने तथा बड़े पैमाने की किफायतों का लाभ उठाने के लिए क्षेत्रीय बैंकों का ढाँचा फिर से तैयार करने की सिफारिश की। इसी क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को मजबूत करने के लिए मौजूदा कानूनी ढाँचे के भीतर उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की जाँच-पड़ताल करने के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर एक अतिरिक्त कार्यदल गठित किया। भारतीय वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रदान करने के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थिति पुनः निर्धारित करने के लिए भारत सरकार ने नाबार्ड,

संबंधित राज्य सरकारों तथा प्रायोजक बैंकों से विचार-विमर्श के बाद सितंबर, 2005 में राज्य स्तरीय प्रायोजक बैंकवार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के समामेलन की दशा में पहल की थी, ताकि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको में व्याप्त कमियों को दूर करके उन्हें सक्षम और लाभप्रद इकाइयां बनाया जा सके ।


25 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का समामेलन जनवरी 2013 में 10 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में किया गया। जून 2013 में 67 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक थे, जो कि मार्च 2015 में 56 थे।


कुल संख्या 1 मार्च 2011 के अंत में कुल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 82, जो कि मार्च 2013 में 64 हुए व मार्च 2014 में 57 नाबार्ड,

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए कार्यकारी संघ ने कहा कि जून 10, 2014 को के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ऋणों के बँटवारे में अपने लक्ष्यों को पूरा कर पाया है।


क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की संख्या इस प्रकार है:


• 196 ( सितम्बर, 2005 तक की स्थिति)


• 104 (31 अगस्त, 2006 तक की स्थिति) 82 (31 मार्च, 2010 तक की स्थिति )


67 (जनवरी, 2013 तक की स्थिति )


महत्वपूर्ण तथ्य


1. सिक्किम और गोवा दो ऐसे राज्य है जहाँ कोई भी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक स्थापित नहीं है।


2. केलकर कमेटी की सिफारिश पर वर्ष 1987 के बाद से कोई भी नया आर.आर.बी स्थापित नहीं किया गया।


3. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को एक करके सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार ने सितम्बर, 2005 से चरणबद्ध तरीके से इन बैंकों के विलय की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जो वर्तमान में भी जारी है।


4. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको का स्वामित्व भारत सरकार, संबंधित राज्य सरकार तथा इसके प्रवर्तक बैंकों के पास होता है। इनकी निर्गत पूँजी का बंटवारा इन तीनों मे मध्य 50 प्रतिशत,

15 प्रतिशत तथा 35 प्रतिशत के अनुपात में है।


5. कुछ विशेष प्राथमिकता प्रदान गतिविधियों के वित्तीयकरण के लिए प्रोत्साहन देने के लिए इन आर आर बी को नाबार्ड तथा इनके प्रवर्तक बैंकों ने पुनर्वित्त की सुविधा प्रदान की है।


नवीनतम तकनीकी प्रावधान


9 अप्रैल 2012 को आर.बी.आई द्वारा जारी अधिसूचना के अंतर्गत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को धनराशियों के आनलाइन ट्रांसफर करने की सुविधा दी गई। अब इन बैंकों को केंद्रीयकृत भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे यह बैंक रियल टाइम ग्रास सेटेलमेंट व नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफर के जरिए धनराशियों को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे।