एशियाई विकास बैंक (एडीबी) - Asian Development Bank (ADB)
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) - Asian Development Bank (ADB)
संयुक्त राष्ट्र के एशिया एवं सुदूर पूर्व के लिए आर्थिक आयोग के तत्वाधान में एशियाई विकास बैंक का आरंभ 1966 में हुआ। एशिया क्षेत्र के तथा दूसरे क्षेत्रों के भी देश इसके सदस्य हैं। इस समय इसके 47 सदस्य देश हैं जिनमें 32 एशिया प्रशांत क्षेत्र के हैं तथा 15 यूरोप और उत्तरी अमरीका के हैं।
कार्य : एशियाई विकास बैंक के प्रमुख उद्देश्य और काय इस प्रकार हैं:
अ) विकास कार्यों के लिए इकैफे क्षेत्र में सार्वजनिक व निजी पूँजी के निवेश को बढ़ावा देना।
ब) विकास - वित्त के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करना। इसमें उन क्षेत्रीय, उपक्षेत्रीय व राष्ट्रीय परियोजनाओं और कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाती है जो पूरो क्षेत्र में सामंजस्यपूर्ण आर्थिक संवृद्धि में अत्यंत कारगार योगदानदें तथा जिनमें क्षेत्र के छोटे या कम विकसित सदस्य देशों की आवश्यकता का विशेष ध्यान रखा गया हो।
द) विशेष प्रस्तावों के निरूपण समेत विकास की योजनाओं व कार्यक्रमों की तैयारी, वित्त व्यवस्था और कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करना।
य) संयुक्त राष्ट्र, उसके अंगों व अधीनस्थ निकायों, खासकर इकैफे के साथ के साथ तथा सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों, अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तथा सार्वजनिक या निजी राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग करना, तथा निवेश और सहायताके अवसरों पर इन संस्थाओं व संगठनों की दिलचस्पी जगाना |
र) ऐसे अन्य कार्यकलाप करना व ऐसी दूसरी सेवाएँ प्रदान करना जिनसे इसके उद्देश्य पूरे होते हों।
सांगठनिक ढाँचा : बोर्ड ऑफ गवर्नर्स एशियाई विकास बैंकका सर्वोच्च नीति निर्माता निकाय है। इसमें 12 निदेशक होते हैं जिनमें 8 क्षेत्र के और 4 क्षेत्रेतर देशों के प्रतिनिधि होते हैं। बैंक का अध्यक्ष बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा चुना जाता है और वही उस बोर्ड का प्रमुख भी होता है।
संसाधन और वित्तीय सहायता : अंश पूँजी बैंक का वित्तीय संसाधन है। इसमें पूँजी में योगदना और आरक्षित भंडार शामिल हैं। अंश पूँजी निधियों के अलावा बैंक ऋण लेकर भी धन जुटाता है। उसके पास एक विशेष निधि भी है जो सदस्य देशों के योगदानों तथा पहले प्रदत्त पूँजी (पेड-अप कैपिटल ) से अलग करके रखी गई राशियों पर आधारित है।
बैंक सामान्यत: उन सदस्य देशों को अंश पँजी निधि से ऋण देता है जो आर्थिक विकास का थोड़ा ऊँचा स्तर प्राप्त कर चुके हैं। विशेष निधि से ऋण ब्याज की अत्यंत रिआयती दरों पर सबसे गरीब देशों को दिए जाते हैं।
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