भारत में बैंकिंग कानून - banking law in india
भारत में बैंकिंग कानून - banking law in india
भारत में बैंकिंग नियमन अधिनियम के पूर्व बैंकिंग का व्यवसाय भारतीय कंपनी अधिनियम, 1913 के अंतर्गत संचालित होता था। आधुनिक अर्थव्यवस्था में बैंकिंग पद्धति का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। बैंकिंग व्यवस्था का स्वरूप अत्यंत व्यापक हो गया है। बैंक मात्र रूपये में लेन-देन करने वाली संस्था ही नहीं समझे जाते हैं वरन इनका सामाजिक दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैंकों पर उचित नियमन एवं नियंत्रण के उद्देश्य से वर्ष 1949 में बैंकिंग विनिमय अधिनियम, 1949 पारित किया गया। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बैंकों पर समान नीतियों एवं नियंत्रण लागू करना था।
इसके माध्यम से बैंकों को सरकारी नियंत्रण में लेन के लिए विशेष योगदान मिला है। इससे पूर्व, भारतवर्ष में बैंकों पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से विशेष प्रावधान लागू किये जाते थे। बैंकों का विस्तृत आकार होने के साथ-साथ इन प्रावधानों का महत्व धीरे-धीरे घटता गया और देश में व्यापक नियंत्रण के उद्देश्य से एक सुसंगठित अधिनियम की आवश्यकता अनुभव की गयी। बैंकिंग विनिमय अधिनियम में आवश्यकतानुसार अनेक परिवर्तन किये गए हैं। इस अधिनियम में सबसे अधिक महत्वपूर्ण संशोधन 1968 एवं 1983 में किये गए।
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