बैंक की लेनदारी अथवा आदेय - bank's dues or dues

बैंक की लेनदारी अथवा आदेय - bank's dues or dues


(1) नकदः - ग्राहकों की नकद मुद्रा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति तथा अन्य दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बैंक कुछ नकद कोष अपने पास रखते हैं और कुछ केंद्रीय बैक अथवा किसी अन्य बैंक के पास रखते हैं। स्थिति विवरण में हस्तगत नकदी तथा अन्य बैंकों के पास रखी गयी नकदी को अलग-अलग दिखाया जाता है।


(2) अन्य बैंकों में जमा:- बैंकों में पारस्परिक लेन देन के कारण कुछ रकम दूसरे बैंको के पास चालू खातों से जमा रह जाती है, जिसे स्थिति विवरण में अलग से दिखाया जाता है। (3) माँग पर तथा निवेश राशि:- बैंक के ऐसे अल्पकालीन ऋण जिन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के अथवा एक अत्यंत अल्पकालीन सूचना देकर वसूल किया जा सकता है, इस मद के अंतर्गत दिखाए जाते हैं।


( 4 ) निवेश : - इस मद में विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों में लगाई गई रकम ट्रेजरी बिल, अंश, ऋणपत्र, ब्राण्ड्स, स्वर्ण आदि में किए जाने वाले निवेश अलग अलग दिखाए जाते है ये सब निवेश प्रतिभूतियों आदि के लिखित मूल्य अथवा उससे कम मूल्य पर होते है।


(5) अग्रिमः - इसके अंतर्गत बैंक के अग्रिम धन, ऋण, नकद साख तथा अधिकवर्ष की रकम दिखाई जाती है। खरीदे अथवा डिकाउण्ट किए गए बिलों की राशि भी इसी के अंतर्गत दिखाई जाती है। ऋण की जमानतों तथा ऋणियों की स्थिति के आधार पर बैंक के ऋण और अग्रिम अलग-अलग दिखाए जाते हैं,

जैसे- पूर्णतया सुरक्षित ऋण, व्यक्तिगत जमानत पर दिए गए ऋण जिन पर ऋणी की व्यक्तिगत जमानत के अलावा अन्य व्यक्तियों की भी व्यक्तिगत जमानत है, बिना जमानत के ऋण, बैंक के संचालकों तथा अधिकारियों को दिए गए ऋण ऐसी कंपनियों को दिए गए ऋण जिनसे बैंक के संचालक किसी भी रूप में संबद्ध है, अन्य बैंकों पर ऋण इत्यादि ।


(6) वसूली के लिए प्राप्य बिलः- बैंक के पास ग्राहकों की वसूली के लिए आए हुए बिल इसके अंतर्गत दिखाए जाते हैं। चूँकि इनकी वसूली भुगतान ग्राहकों को करना होता है इसलिए ये दायित्वों में भी दिखाए जाते हैं


(7) स्वीकृतियाँ, बेचान आदि:- इसके अंतर्गत ऐसे बिलों की रकमें दिखाई जाती है जिन्हें बैंक अपने ग्राहकों की ओर से स्वीकार करता है और जिनके भुगतान का दायित्व वह अपने ऊपर लेता है। इस प्रकार यह स्पष्ट रूप से बैंक के दायित्व होते है, परंतु बैंक इनकी रकम ग्राहकों से वसूल करने का अधिकारी होता है, इसलिए ये बैंक के आदेय अथवा लेनदारी भी


हैं। इस मद में आदेय तथा दायित्व दोनों एक दूसरे से संतुलित हो जाते हैं। (8) बैंक भवन:- इसके अंतर्गत बैंक के कार्यालयों के भवनों का मूल्य, घिसावट निकालकर दिखाया जाता है। यह वास्तव में बैंक का सब से कम तरल आदेय होता है।


(9) फर्नीचर तथा अन्य मृत स्कन्धः - भवनों के समान, बैंक के फर्नीचर, पंखे, अलमारियों,


लॉकरों आदि का मूल्य भी घिसावट निकालकर अलग से दिखाया जाता है। (10) अन्य आदेयः - इस मद में अनेक प्रकार के आदेय दिखाए जाते हैं। जैसे विनियोगों पर प्राप्य आय जिसे अभी तक प्राप्त नहीं किया गया है किराया तथा अन्य सेवा संबंधी वसूलियों जो अभी वसूल करनी है, बैंक के पास स्टेशनरी तथा टिकट आदि ।


(11) गैर बैंकिग आदेय:- ये बैंक के ऐसे आदेय है जिनमें बैंक ने स्वेच्छा से निवेश नहीं किया होता, बल्कि जो भुगतान न करने वाले ऋणियों से दावों की पूर्ति में प्राप्त होते है। स्थिति विवरण के अध्ययन से लाभ


बैंक का स्थिति विवरण बैंक की संपूर्ण आर्थिक स्थिति का चित्रण होता है।

इसके अध्ययन के विशेष रूप से उल्लेखनीय लाभ निम्नलिखित है:


1. बैंक के दायित्वों तथा आदेयों का विश्लेषण करने से बैंक की वर्तमान आर्थिक दशा के संबंध में ज्ञान प्राप्त होता है।


2. चालू वर्ष के स्थिति विवरण को पिछले वर्षों के विवरणों से तुलना करके बैंक की प्रगति का अनुमान लगाया जा सकता है।


 3. विभिन्न बैंको की स्थिति विवरण के आधार पर उनकी आर्थिक स्थिति की तुलना की जा सकती है।



4. स्थिति विवरण के प्रकाशन से बैंक से संबंधित सभी व्यक्तियों को उनके हितों के बारे में सूचना मिल जाती है।

बैंक के अंशधारी, निपेक्षधारी, देनदार तथा कर्मचारी सभी को उनके हितों से संबंधित सूचना प्राप्त होती है।


5. बैंक में जनता के विश्वास का आधार उनका स्थिति विवरण ही होता है और इसी से जनता को निवेश के लिए रास्ता मिलता I


6. स्थिति विवरण से बैंक की सुरक्षा तथा तरलता स्थिति का भी ज्ञान प्राप्त होता है।