ब्राण्ड नीतियाँ - Brand Policies
ब्राण्ड नीतियाँ - Brand Policies
एक फर्म द्वारा अपनाई जाने वाली ब्राण्ड नीतियाँ का मुख्य रूप से निम्न शीर्षको में अध्ययन किया जा सकता है -
1. निर्माताओं द्वारा अपनायी जाने वाली ब्राण्ड नीतियाँ एक निर्माता द्वारा अपनायी जाने वाली ब्राण्ड नीतियों को मुख्य रूप से दो शीर्षकों में विभाजित किया जा सकता है। 1. निर्माताओं द्वारा स्वयं के ब्राण्ड के अंतर्गत विपणन करना- इस नीति के अंतर्गत निर्माता अपने सभी उत्पाद स्वयं के ब्राण्ड नाम से बेचते हैं। इस नीति को अपनाने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे विज्ञापन एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों में सहायता मिलती है निर्माता के ख्याति में वृद्धि होती है, मूल्यों में स्थायित्व रहता है तथा बाजार पर अच्छा नियंत्रण स्थापित हो जाता है। इस नीति को अपनाने में निर्माता को ब्राण्ड के प्रचार के लिए विज्ञापन तथा विक्रय-संवर्द्धन बराबर करना पड़ता है
तथा साथ ही साथ गुणवत्ता के स्तर को भी बनाए रखना पड़ता है। बड़े मध्यस्थ जो स्वयं के ब्राण्ड के अंतर्गत वस्तुओं का बेचना चाहते हैं, इन निर्माताओं के उत्पाद बेचना पसंद नहीं करते। एक निर्माता द्वारा इस नीति को अपनाते समय व्यक्तिगत ब्राण्ड, पारिवारिक ब्राण्ड, अम्ब्रेला ब्राण्ड, प्रांतीय ब्राण्ड, लड़ाकू ब्राण्ड एवं प्रतियोगी ब्राण्ड की सहायता ली जाती है।
2. मध्यस्थों के ब्राण्ड के अंतर्गत विपणन करता इस नीति के अंतर्गत निर्माता अपने उत्पाद के लिए ब्राण्ड का प्रयोग नहीं करते। वे उत्पाद को बिना कोई ब्राण्ड नाम दिए मध्यस्थों को बेच देते है और मध्यस्थ स्वयं के ब्राण्ड नाम से उत्पाद को बेचते हैं। इस नीति को अपनाने से निर्माता ब्राण्ड से उत्पन्न होने वाले उत्तरदायित्वों से बचा जाता है लेकिन निर्माता की मध्यस्थों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
II. मध्यस्थों द्वारा अपनायी जाने वाली ब्राण्ड नीतियाँ -
एक मध्यस्थ निम्न ब्राण्ड नीतियों में से किसी एक को अपना सकता है -
1. केवल निर्माताओं के ब्राण्ड का प्रयोग करता इस नीति के अंतर्गत मध्यस्थ निर्माता के ब्राण्ड के अंतर्गत ही वस्तुओं का विक्रय करते हैं। इस नीति को अपनाने का लाभ मध्यस्थों को यह होता है कि निर्माताओं के ब्राण्ड प्राय लोकप्रिय होते हैं, जिससे मध्यस्थों को वस्तु बेचने में अधिक कठिनाई नहीं होती है। इसके अतिरिक्त ब्राण्ड स्वामित्व से उत्पन्न होने वाले उत्तरदायित्वों से भी मध्यस्थ बच जाते हैं।
2. निर्माताओं के ब्राण्ड के साथ-साथ अपने ब्राण्ड का भी प्रयोग करना इस नीति के अंतर्गत मध्यस्थ स्वयं के ब्राण्ड के उत्पादों को तो बेचता ही है, साथ ही साथ दूसरे निर्माताओं के ब्राण्ड के उत्पाद को भी बेचता है। इस नीति को अपनाने से मध्यस्थो को यह लाभ होता है कि ग्राहकों को निर्माता तथा मध्यस्थो के उत्पादों में तुलना करने में आसानी होती है। मध्यस्थ ब्राण्ड के मूल्य कम होने से और वस्तु के गुण में कोई विशेष अंतर न होने पर ग्राहक मध्यस्थ ब्राण्ड की तरफ आकर्षित होते हैं और मध्यस्थ अपनी वस्तुओं की अधिक बिक्री करके ज्यादा लाभ कमा सकता हैं।
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