व्यापार संवर्द्धन विधियाँ - business promotion methods
व्यापार संवर्द्धन विधियाँ - business promotion methods
जब उत्पाद का विक्रय फुटकर व्यापारी तथा थोक व्यापारी के माध्यम से किया जाता है तो विक्रय संवर्द्धन की किसी भी योजना को तब तक सफलतापूर्वक क्रियान्वित नहीं किया जा सकता, जब तक इन मध्यस्थों का पूर्ण सहयोग प्राप्त न हो। अतः व्यापार-संवर्द्धन विधि से आशय विक्रय वृद्धि की किसी भी ऐसी योजना से है जो मध्यस्थों को अधिक से अधिक माल का क्रय करने एवं उसे विक्रय करने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि जब तक मध्यस्थों को विक्रय संवर्द्धन हेतु किसी प्रकार का प्रलोभन अथवा प्रोत्साहन नहीं दिया जाता तब तक उनका सहयोग प्राप्त करना कठिन हो जाता है। व्यापार संवर्द्धन के लिए निम्नलिखित विधियाँ का उपयोग करते हैं:
1. विक्रय प्रतियोगिताएँ (Sales Contest) :- मध्यस्थों के लिए आयोजित प्रतियोगिताएँ प्राय: सर्वाधिक विक्रय के लिए रखी जाती है। सबसे अधिक विक्रय में सफल रहने वाले थोक या फुटकर विक्रेता को प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार दिया जाता है। प्रतियोगिता में अन्य विजयी विक्रेताओं को विभिन्न प्रकार के आकर्षक पुरस्कार दिए जाते हैं। प्रतियोगिता का आयोजन थोक तथा फुटकर व्यापारियों के लिए अलग-अलग अथवा दोनों के लिए एक साथ ही किया जा सकता है।
2. प्रदर्शन तथा विज्ञापन भत्ता (Display and Advertising Allowance) :- थोक तथा फुटकर व्यापारी दोनों की हार्दिक इच्छा विक्रय में वृद्धि करने की होती है,
क्योंकि जितना अधिक बिक्री होगा उन्हें उतना ही अधिक लाभ होगा। इसके लिए वे विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन या विज्ञापन आदि की योजनाएँ क्रियान्वित करने के लिए तत्पर रहते हैं, किन्तु अनेक परेशानियों तथा उस पर होने वाले व्यय के कारण वह ऐसा नहीं कर पाते हैं। यदि विज्ञापन या प्रदर्शन के लिए मध्यस्थों को कुछ भत्ता दे दिया. जाय, तो वे विज्ञापन एवं प्रदर्शन के कार्यों में रूचि लेने लगेंगे। इससे इन मध्यस्थों के साथ-साथ निर्माताओं को भी लाभ होगा। इसी कारण से विक्रय संवर्द्धन की योजना बनाते समय मध्यस्थों को विज्ञापन एवं प्रदर्शन के लिए भत्ता देने का प्रावधान किया जाता है।
3. मध्यस्थों को प्रशिक्षण (Training To Middlemen) :- निर्माताओं द्वारा मध्यस्थों को वस्तु विशेष के विक्रय के संबंध में सामान्य तथा विशिष्ट प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशिक्षित विक्रेता अपने ग्राहकों को हर तरह से संतुष्ट करके विक्रय वृद्धि में सहायक होता है। इसके विपरीत अप्रशिक्षित विक्रेता अपने ग्राहकों की जिज्ञासा कभी शांत नहीं कर पाता, जिससे व्यवसाय की ख्याति को नुकसान होता है।
4. व्यापारिक प्रीमियम (Dealer Premium) :- व्यापारिक प्रीमियम मध्यस्थों द्वारा विक्रय वृद्धि के लिए किए गए अतिरिक्त प्रयासों के फलस्वरूप मिलने वाला पुरस्कार है। यह प्रीमियम प्रायः वस्तु के रूप में दी जाती है। जैसे, दीवार घड़ी, सोने और चांदी के सिक्के, कुर्सियाँ, मेज, टेलीविजन आदि। प्रीमियम एक निश्चित मात्रा या मूल्य की वस्तुएँ बेचने पर दिया जाता है।
5. सम्मेलन (Conference):- निर्माता कभी-कभी अपने मध्यस्थों या व्यापारियों के क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करते हैं जिसमें विक्रय एवं वितरण संबंधी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया जाता है। मध्यस्थ/व्यापारी अपनी समस्याएँ निर्माता के समक्ष रखते हैं, जिसका आपसी विचार-विमर्श द्वारा समाधान निकाला जाता है। ऐसे सम्मेलनों के आयोजन से आपसी सहयोग की भावना बढ़ती है जो विक्रय संवर्द्धन के लिए उपयोगी होता है।
6. उपयुक्त साख नीति (Suitable Credit Policy) :- कोई भी व्यापार बिना साख के नहीं चल सकता। साख कब, कितनी किसको तथा कितनी अवधि के लिए दी जाय, ये सारी बातें परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।
विक्रय वृद्धि के साथ-साथ विक्रय राशि की वसूली भी आवश्यक है इसलिए विक्रय-संवर्द्धन विभाग साख नीति पर विचार करके आवश्यकतानुसार इसमें परिवर्तन का सुझाव दे सकता है।
उपभोक्ता व्यापारी संयुक्त संवर्द्धन विधियाँ (Consumer Trader Combined Promotion Methods) विक्रय-संवर्द्धन का कार्य एक ओर उपभोक्ता तथा दूसरी तरफ मध्यस्थों को ध्यान में रखकर किया जाता है। उपभोक्ता संवर्द्धन विधियाँ तथा व्यापार संवर्द्धन विधियाँ एक-दूसरे के पूरक है। यदि उपभोक्ता को उपभोक्ता संवर्द्धन विधियों द्वारा किसी वस्तु को क्रय करने के लिए प्रोत्साहित कर लिया जाय,
तो यह आवश्यक नहीं कि व्यापारी उस वस्तु को अपने स्टॉक में रखने के लिए तैयार हो। इसी तरह, यदि व्यापारी संवर्द्धन विधियों द्वारा मध्यस्थों को किसी वस्तु को क्रय करके स्टॉक में रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उपभोक्ता उस वस्तु को क्रय करने के लिए तैयार होगा। अत: उपभोक्ता - संवर्द्धन तथा व्यापार संवर्द्धन की योजनाएँ साथ-साथ चलायी जाय, तो इससे अच्छे परिणाम मिलने की संभावना रहती है। इन दोनों संवर्द्धनों की योजनाओं में समन्वय स्थापित करके विक्रय संवर्द्धन का कार्य संतोषजनक ढंग से संपन्न किया जा सकता है।
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