केन्द्रीय बैंक (आरबीआई) - अर्थ, सिद्धांत एवं कार्य - Central Bank (RBI) - Meaning, Principles and Functions

केन्द्रीय बैंक (आरबीआई) - अर्थ, सिद्धांत एवं कार्य - Central Bank (RBI) - Meaning, Principles and Functions


केन्द्रीय बैंक देश का सर्वोच्च बैंक होता है। इसे देश की सम्पूर्ण बैंकिंग तथा मौद्रिक व्यवस्था में केंद्र स्थान प्राप्त होता है तथा यह सम्पूर्ण साख तथा मुद्रा प्रणाली का नियंत्रक होता है। आजकल शायद ही कोई ऐसा देश हो जहाँ केन्द्रीय बैंक नहीं हो। बैंक ऑफ़ इंग्लैंड सबसे प्राचीन केन्द्रीय बैंक है जिसने 19 वीं शताब्दी के मध्य से कार्य करना शुरू किया था। यू.एस.ए. में फ़ेडरल रिज़र्व सिस्टम की स्थापना 1913 में हुई | प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1920 में ब्रसेल्स में जो अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सम्मलेन हुआ, उसमें यह तय किया गया कि प्रत्येक देश में एक केन्द्रीय बैंक की स्थापना की जाए। इस सिफारिश के अनुसार लगभग सभी देशों में केन्द्रीय बैंक की स्थापना की गयी। भारत में देश के केन्द्रीय बैंक के रूप में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की स्थापना 1935 में की गयी।


केन्द्रीय बैंक की परिभाषा


अलग-अलग अर्थशास्त्रियों ने केन्द्रीय बैंक को अपने-अपने ढंग से परिभाषित करने का प्रयास किया है तथा केन्द्रीय बैंक द्वारा सम्पादित किये जाने वाले किसी एक अथवा कुशह कार्यों पर बल दिया है। केंट ने जहाँ केन्द्रीय बैंक को मुद्रा की पूर्ति के विस्तार तथा संकुचन के प्रबंध से संबंधित किया है, वेरा स्मिथ ने इसे पत्र मुद्रा के निर्गमन के संबंध में एकाधिकारी के रूप में देखा है, शा ने शाख नियंत्रक के रूप में परिभाषित किया है तो हाट्रे ने इसे अंतिम ऋणदाता के रूप में तथा सेयर्स ने इसे व्यापारिक बैंकों के नियंत्रक के रूप में देखा है और डी कॉक तो इसे सम्पूर्ण बैंकिंग तथा मौद्रिक व्यवस्था के शीर्ष के रूप में देखते हैं

तथा इसकी परिभाषा देते हुए केन्द्रीय बैंक द्वारा सम्पादित किया जाने वाले प्रायः सभी कार्यों को गिना जाता है। इनमें कुछ प्रमुख परिभाषायें इस प्रकार हैं:


केंट के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक वह बैंक है जो सामान्य लोक कल्याण की दृष्टि से मुद्रा के परिमाण के विस्तार


तथा संकुचन के प्रबंध के दायित्व से संबंधित है। " हाट्रे के अनुसार, “केन्द्रीय बैंक वह बैंक है जो अंतिम ऋणदाता के रूप में कार्य करता है।” 



डी कॉक के अनुसार, "केन्द्रीय बैंक वह बैंक है जिसे अपने देश के बैंकिंग तथा मौद्रिक ढाँचे में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और जहाँ तक संभव हो सके राष्ट्रीय आर्थिक दृष्टि से केन्द्रीय बैंक के कार्य सम्पादित करता है।"

सेयर्स के अनुसार, “केन्द्रीय बैंकों का कार्य व्यापारिक बैंकों से भिन्न होता है, यह व्यापारिक बैंकों का इस प्रकार से नियमन करता है जिससे राज्य की सामान्य मौद्रिक नीति क्रियाशील हो सके।


ऊपर दी गयी परिभाषाओं में भिन्नता अवश्य है पर इन परिभाषाओं को सम्मिलित रूप में लेने पर एक बात रूप से सामने आती है कि केन्द्रीय बैंक एक विशिष्ट प्रकार का बैंक है जो सामान्य बैंकों से भिन्न है, जिसे देश की सम्पूर्ण मौद्रिक एवं बैंकिंग व्यवस्था में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, मुद्रा बाजार का यह अगुआ है तथा देश की सम्पूर्ण व्यापारिक बैंकिंग व्यवस्था तथा वित्तीय संस्थाओं का देश के आर्थिक हित में नियमन करता है डी कॉक के अनुसार केन्द्रीय बैंक केवल लोक हित और सम्पूर्ण देश के कल्याण के लिए ही कार्य करता है, लाभ को प्राथमिक उद्देश्य नहीं स्वीकार करता है। यह एक ओर सरकार का बैंक है तो दूसरी ओर बैंकों के बैंक के रूप में कार्य करता है।