उपभोक्ता संवर्द्धन विधियाँ - consumer promotion methods
उपभोक्ता संवर्द्धन विधियाँ - consumer promotion methods
उपभोक्ता संवर्द्धन के अंतर्गत विक्रय संवर्द्धन की वे समस्त विधियाँ सम्मिलित होती है जो प्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता से संबंधित रहती है। ये विधियाँ प्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं को माल क्रय करने के लिए प्रेरित करती है। उपभोक्ता संवर्द्धन संबंधी समस्त विधियों को उपभोक्ताओं के निवास स्थान पर उनके कार्यालय पर, मध्यस्थों की दुकानों पर अथवा परिस्थिति अनुसार अन्य उपयुक्त स्थान पर क्रियान्वित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, नमूने के पैकेट, कूपन आदि उनके निवास स्थान पर भेजे जा सकते हैं, विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन के संबंध में समाचार-पत्रों आदि के माध्यम से उनके निवास स्थान या कार्यालय में सूचना दी जा सकती है। क्रियात्मक प्रदर्शन (Demonstration) के द्वारा विक्रय-संवर्द्धन का कार्य उनके घर अथवा दुकान पर किया जा सकता है।
उपभोक्ता संवर्द्धन की निम्न प्रमुख विधियाँ है जिनका उपयोग परिस्थितियों एवं सुविधाओं के अनुसार किया जा सकता है। :
1. नमूनों का मुफ्त वितरण (Distribution Of Free Samples ) :- उपभोक्ता को नमूने के पैकेट बाँटना विक्रय संवर्द्धन का एक प्रभावशाली उपाय है। नमूने के पैकेट का उपभोग करके उपभोक्ता स्वतः वस्तु के गुण की तरफ आकृष्ट हो जाता है। यदि वस्तु के गुणों ने उपभोक्ता को एक बार प्रभावित कर दिया तो वह उस वस्तु का स्थायी ग्राहक बन जाता है। नमूने के पैकेट घर-घर वितरण किए जा सकते हैं या डाक द्वारा या विक्रय स्थल पर या सड़क पर किया जा सकता है।
2. कूपन (Coupons ) :- इसके अंतर्गत वस्तु के पैकिंग में एक कूपन डाल दिया जाता है और उपभोक्ता जब उस वस्तु की पैकिंग खोलता है
तो उसमें से कूपन निकलता है। इस कूपन के बदले ग्राहक को या तो नकद राशि या कूपन पर लिखित वस्तु प्राप्त होती है। कभी-कभी कूपन अखबार में छपवा दिए जाते हैं जिन्हें लेकर फुटकर विक्रेता के पास जाने पर मूल्य में कुछ छूट मिलती है। कभी कभी ग्राहकों को कूपन की एक निश्चित संख्या एकत्रित पड़ती है जिसके पश्चात् उन्हें कुछ नकद छूट मिल जाती है।
3. मेले और प्रदर्शनियाँ (Fairs & Exhibitions) :- मेले एवं प्रदर्शनियाँ भी विक्रय-संवर्द्धन के महत्वपूर्ण साधन है। ये मेले एवं प्रदर्शनियाँ स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जाते हैं।
मेले प्राय: ऐतिहासिक या धार्मिक आधार पर निश्चित स्थान पर तथा निश्चित समय पर लगते हैं। प्रदर्शनियों का कोई निश्चित समय या निश्चित आयोजित नहीं होता। प्रदर्शनी में छोटे एवं बड़े निर्माताओं को अपने औद्योगिक उत्पाद का प्रदर्शन करने तथा उनकी विशेषताओं आदि के विषय में बताने का अच्छा अवसर प्राप्त हो जाता है।
4. मूल्यों में कमी (Reduction in Prices ) :- जब विक्रयशाला में काफी मात्रा में बिना बिका हुआ पुराना माल इकट्ठा हो जाता है तो इसे कम मूल्य पर बेचने का प्रस्ताव किया जाता है।
मूल्यों में कमी का उद्देश्य पुराने उपभोक्ताओं को वस्तु को खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना तथा नये उपभोक्ताओं को अधिक उपभोग के लिए आकृष्ट करना। मूल्यों में कमी विक्रय संवर्द्धन का एक ऐसा उपाय है जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता आकर्षित किए जा सकते हैं।
5. विशेष पुरस्कार (Special Prizes) :- कभी-कभी विक्रेता विज्ञापन एवं विक्रय वृद्धि के लिए विक्रय के साथ विशेष पुरस्कार देने का प्रस्ताव देता है। उदाहरण के लिए, सोनी टेलीविजन की खरीददारी पर डिनर सेट मुफ्त। कभी-कभी विक्रेता अपने ग्राहकों को यह भी प्रलोभन देते हैं कि यदि वर्ष भर हर माह एक निश्चित राशि या उससे अधिक की खरीददारी पर कुछ बोनस या पुरस्कार दिया जायेगा।
इस प्रलोभन के कारण ग्राहक उस विक्रेता का स्थायी ग्राहक बन जाता है।
6. प्रतियोगिताएँ (Contests) :- प्रतियोगिताएँ का आयोजन मुख्य रूप से नये ग्राहकों को आकर्षिक करने के लिए या नये उत्पाद को उपभोक्ताओं के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। प्रतियोगिताओं के आयोजन में विभिन्न पुरस्कार रखे जाते हैं तथा ग्राहकों के समक्ष कोई एक आकर्षक प्रतियोगिता रखी जाती है, जैसे क्रिकेट खिलाड़ी को पहचानिये, फिल्म का नाम बताइए, अमुक वस्तु के लोकप्रिय होने के दो-तीन कारण बताइए आदि। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए विज्ञापित वस्तु के क्रय का प्रमाण देना पड़ता है जैसे नकद की रसीद, वस्तु के पैकिंग का कोई हिस्सा आदि।
7. प्रदर्शन (Demonstration) :- यदि किसी उपभोक्ता के समक्ष किसी वस्तु के गुण अनेक बार बताया जाय,
तो उसका प्रभाव उस पर होगा या नहीं, बताया नहीं जा सकता, लेकिन यदि उस वस्तु के गुण तथा कार्य करने की विधि का प्रदर्शन ग्राहकों के समक्ष किया जाय तो वह उस वस्तु से प्रभावित होगा। विक्रय संवर्द्धन की इस विधि का प्रयोग मुख्यतः ऐसी वस्तुओं के विक्रय के संबंध में किया जाता है जिनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले आया और ले जाया जा सके। जैसे-कूलर, रेफ्रीजरेटर, रेडियो, टेलीविजन सेट आदि।
8. विक्रयोपरान्त सेवाएँ (After Sales Service) :- कुछ वस्तुएँ ऐसी होती है, जिनकी निरंतर देख रेख आवश्यक होती है। कम तकनीकी अथवा गैर-तकनीकी वस्तुओं के संबंध में या मशीनरी जैसी वस्तुओं के मामलो में विक्रयोपरान्त सेवाओं की आवश्यकता पड़ती है।
इसीलिए निर्माता विक्रयोपरांत सेवाओं को दिए जाने की व्यवस्था करते हैं जिससे वस्तुओं का विक्रय बढ़ जाता है। ये सेवाएँ वस्तुओं की बिक्री को प्रभावित करती है इसीलिए इन्हें विक्रय-संवर्द्धन उपायों में सम्मिलित किया गया है।
9. पैकिंग (Packing) :- एक अच्छे एवं आकर्षक पैकिंग के द्वारा ग्राहकों को वस्तु क्रय करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। पैकिंग से वस्तु की पहचान होती है, वस्तु आकर्षक दिखती है तथा उसका पुन: उपयोग किया जा सकता है। जैसे रिफाइंड या सरसो के तेल के डिब्बे खाली होने पर उनमें अन्य सामान रखा जा सकता है।
10. उत्पाद एक्सचेंज (Product Exchanges ) :- वर्तमान में यह विधि व्यापक पैमाने पर अपनायी जा रही है। जैसे- पुरानी टी. वी., स्कूटर, गैस चूल्हा आदि लाइए और बदले में विनिमय मूल्य पर नये ले जाइए।
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