कार्यशील पूँजी की अपर्याप्तता के दोष - Demerits of inadequate working capital
कार्यशील पूँजी की अपर्याप्तता के दोष - Demerits of inadequate working capital
व्यवसाय में कार्यशील पूँजी की मात्रा पर्याप्त नहीं होती या कार्यशील पूँजी ऋणात्मक हो जाती है तो निम्न दोष परिलक्षित होते हैं
1. व्यवसाय की वृद्धि रूक जाती हैं क्योंकि कार्यशील पूँजी की अपर्याप्तता से लाभदायक प्रोजेक्ट लेने में कठिनाई आती हैं।
2. व्यवसाय की संचलनात्मक योजनाओं को क्रियान्वयन करने में कठिनाई आती हैं, लक्षित लाभ प्राप्त नहीं होता हैं।
3. दिन-प्रतिदिन के कार्यकलापों को करने, खर्चे के दायित्वों का भुगतान एवं वायदे पूरे करने में कठिनाई आती हैं। इससे व्यवसाय संचालन में अकुशलता पैदा होती हैं, लागतें बढ़ जाती हैं।
4. कार्यशील पूँजी में कमी के कारण स्थायी सम्पत्तियों का प्रयोग अनुकूलतम स्तर पर नहीं हो पाता इससे विनियोगों पर प्रत्याय की दर गिर जाती हैं।
5. अपर्याप्त कार्यशील पूँजी की दशा में अल्पकालीन दायित्वों का समयानुरूप भुगतान नहीं हो पाता
इससे संस्था की साख प्रभावित होती हैं, शोधन क्षमता में कमी आती हैं।
6. प्रचुर मात्रा में क्रय तथा नकद छूट का लाभ नहीं मिल पाता।
7. कार्यशील पूँजी के अभाव में उत्पादन एवं विक्रय दोनों ही बाधित होते हैं।
8. संस्था द्वारा लाभांशों का भुगतान नहीं किया जाता, जिससे अंशों के मूल्यों में कमी आती हैं।
9. कार्यशील पूँजी की कमी के कारण बाजार में उत्पन्न लाभदायकता के अवसरों भी चूक जाते हैं।
10. संस्था को अपने दायित्वों का भुगतान करने के लिए ऊँची ब्याज दरों पर पैसा उधार लेना पड़ सकता हैं, जिससे लगता बढ़ जाती हैं और लाभ कम हो जाता हैं।
उपरोक्त विवेचन के आधार पर श्रेष्ठ प्रबंधन को व्यवसाय के संचालन एवं लाभ वृद्धि के लिए समय-समय पर आवयश्कतानुसार कार्यशील पूँजी की पर्याप्त मात्रा की व्यवस्था रखना चाहिए। जिसके लिए ठोस वित्तीय नीतियों एवं सांख्यिकी तकनीकों से उचित निर्णय लिये जाने चाहिए।
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