क्षेत्रीय ग्रामीण बैकों की विशेषताएँ - Features of Regional Rural Banks

क्षेत्रीय ग्रामीण बैकों की विशेषताएँ - Features of Regional Rural Banks


बेशक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक आधारिक रूप से अनुसूचित व्यापारिक बैंक हैं, परंतु इनमें निम्नलिखित आधार पर अंतर पाया जाता है।


(क) क्षेत्र


(i) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का क्षेत्र कुछ विशिष्ट क्षेत्रों तक ही सीमित है, जिसमें राज्य के एक या एक से अधिक जिले शामिल होते हैं।


(ii) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक केवल छोटे तथा सीमांत किसानों, ग्रामीण कारीगरों, कृषि श्रमिकों तथा उन अन्य व्यक्तियों को जिनके पास उत्पादक उद्देश्यों के लिए साधन कम हैं, प्रत्यक्ष ऋण एवं अग्रिम देते हैं।


(iii) किसी राज्य विशेष में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की उधार देने की दरें, सहकारी समितियों की प्रचलित उधार देने वाली दरों से अधिक नहीं है। प्रायोजक बैक और भारतीय रिजर्व बैंक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को कई अनुदान व रियायतें देते है, ताकि वे प्रभावपूर्ण रूप से कार्य कर सकें।


(ख) संगठन


क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना प्रायोजक बैंक द्वारा की गई है जो सामान्यतया सार्वजनिक क्षेत्र का एक बैंक होता है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की विषय निर्वाचन समिति उन जिलों की पहचान करती है

जिनको इस बैंक की आवश्यकता होती है। बाद में केंद्रीय सरकार राज्य सरकार तथा प्रायोजक बैंक की सलाह पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना करती है। प्रत्येक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को उन स्थानीय सीमाओं के अंदर कार्य करना होता है जो केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित कर दी जाती है। बैंक अपनी कोई भी शाखा अधिसूचित क्षेत्र की सीमाओं के भीतर स्थापित कर सकता है। (ग) पूँजी


प्रत्येक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की अधिकृत पूँजी 5 करोड़ रु. है जिसे केंद्रीय सरकार बढ़ा या घटा सकती है परंतु यह इसकी 25 लाख प्रदत्त पूँजी से कम नहीं होनी चाहिए।

इस सारी पूँजी में केंद्रीय सरकार का 50 प्रतिशत, राज्य सरकार का 15 प्रतिशत और प्रायोजक बैंक का 35 प्रतिशत अभिदान होता है। वर्तमान में केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार तथा स्पॉन्सर बैंक के बीच अभिदान का फार्मूला 60:20:20 निश्चित कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक का अभिदान द्वारा दिया जाता है। (घ) प्रबंध


प्रत्येक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का प्रबंध बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा किया जाता है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के मामलों तथा व्यवसाय का सामान्य अधीक्षण दिशा और प्रबंध बोर्ड ऑफ डायरेर्क्स के 9 सदस्यों के पास निहित होता है।

केंद्रीय सरकार 3 डायरेक्टरों, राज्य सरकार 2 डायरेक्टरों तथा स्पॉन्सर बैंक 3 डायरेक्टर को नामित करता है। चेयरमैन सामान्यतया स्पॉन्सर बैक का ही एक अधिकारी होता है, परंतु इसकी नियुक्ति केंद्रीय सरकार द्वारा की जाती है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई दिशाओं व मार्ग दर्शन पर कार्य करना पड़ता है और व्यावसायिक सिद्धांतों के अनुसार कार्य करना होता है। राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय समन्वित समिति की स्थापना भी की गई है, ताकि विभिन्न क्षेत्रीय ग्रामीण बैकों के दृष्टिकोण में समरूपता बनी रहे


(ङ) प्रायोजक बैंक की ज़िम्मेदारियां


स्पॉन्सर बैंक उन सभी आर. आर. बी. की सहायता निम्नलिखित आधार पर करेगा:

(i) उसके शेयर पूँजी में अभिदान करना।


(ii) इनके कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना तथा


(iii) प्रथम पाँच वर्षों तथा बढ़ाई गई अवधि के दौरान प्रबंधकीय एवं वितीय सहायता का प्रावधान करना स्पॉन्सर बैंकों को आर.आर.बी. की प्रगति को मानीटर करने का अधिकार प्राप्त है, आन्तरिक लेखा परीक्षण तथा छानबीन कर सकते है और जब जरूरत हो सुधारात्मक उपाय सुझा सकते हैं।


(च) स्रोत


आर. आर. बी. के मुख्य स्रोत हैं (i) शेयर पूँजी, (ii) जनता से प्राप्त जमाएं, (iii) स्पॉन्सर बैंक से लिया गया ऋण तथा (iv) नाबार्ड से पुनर्वित्ता


भारतीय रिजर्व बैंक ने पुनर्वित्त सुविधाओं के लिए आर.आर.बी को सहकारी बैंकों के बराबर माना है अर्थात् 2 प्रतिशत बैंक की दर से नीचे व्यापारिक बैंकों की भाँति आर.आर.बी को उपयुक्त या पात्र ऋणों के केवल घोषणा के बदले में तथा उनके द्वारा दिए अग्रिमों के अनुकूलन के लिए पात्र माना गया है। इसके अतिरिक्त आर.आर.बी को रिजर्व बैंक ने अनुसूचित बैंकों का स्तर दिया है। दिसंबर 2002 तक आर.आर.बी अपनी माँग तथा सर्वाधिक दायित्वों का 3 प्रतिशत नकद कोष के रूप में रख सकते हैं।


व्यापारिक बैंकों द्वारा दी गई दर के ऊपर आर.आर.बी को अपनी जमाओं के 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज की दर देने की अनुमति दे दी गई है। इन बैंकों की जमाओं का बीमा भी भारतीय जमा बीमा तथा साख गारण्टी निगम द्वारा किया गया है, यह बीमा जमाकर्ताओं के हितों को ध्यान में रख कर किया गया है।