भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्य - Functions of Reserve Bank of India
भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्य - Functions of Reserve Bank of India
रिज़र्व बैंक के कार्य व्यापक एवं महत्वपूर्ण है। समस्त देश की आर्थिक व्यवस्था इसी पर आश्रित है। रिजर्व बैंक देश के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य करता है:
1. नोट जारी करना रिज़र्व बैंक देश के अंतर्गत नोट जारी करने वाली एक मात्र संस्था है। एक रूपये के नोट को छोड़कर समस्त मुद्रा छापने का अधिकार रिज़र्व बैंक को है। रिज़र्व बैंक मुद्रा का निर्गमन अधिकोषण सिद्धांत के आधार पर करता है। इसके अंतर्गत, बैंक फंड जमा करके कितनी ही राशि तक के नोट छाप सकता है। इन कोषों में सोने के सिक्के, सोना वोदेशी कोष एवं रूपये सम्मिलित किये जाते हैं। इन कोषों की राशि किसी भी समय 200 करोड़ से कम नहीं होनी चाहिए जिसमें 115 करोड़ रूपये का सों या सोने का सिक्का होगा। रिज़र्व बैंक के निर्गमन विभाग की कुल संपत्ति में ये को सम्मिलित किये जाते हैं
तथा ये संपत्ति बैंक की कुल देयताओं के बराबर होती है। देयताओं में बैंक द्वारा जरी कुल बैंक नोट सम्मिलित किये जाते हैं।
2. सरकार के बैंकर के रूप में कार्य करना रिज़र्व बैंक भारत सरकार के बैंक के रूप में कार्य करता है। यह सरकार के एजेंट के रूप में सार्वजानिक ऋण प्राप्त करने, सरकार की ओर से भुगतान करने एवं बैंकिंग संबंधी व्यवहार करने का कार्य करता है। रिज़र्व बैंक सरकार का रुपया बिना ब्याज पर अपने पास रखता है। इसके अतिरिक्त रिज़र्व बैंक सरकार के सलाहकार के रूप में सरकार को आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध करवाता है। सरकार की आर्थिक नीति को क्रियान्वित करवाने में मदद करता है।
3. बैंकों के बैंक के रूप में कार्य करना रिज़र्व बैंक समस्त बैंकों का बैंक समझा जाता है।
रिजर्व बैंक अनुसूचित बैंकों को वित्तीय सुविधाएँ उपलब्ध करवाता है। ये वित्तीय सुविधाएँ बैंकों के विभिन्न प्रकार के बिलों को पुनः भुनाकर अथवा प्रतिभूतियों की जमानत के विरुद्ध ऋण प्रदान करके उपलब्ध करवायी जाती है। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धरा 17.4 के अंतर्गत रिजर्व बैंक अनुसूचित बैंकों को प्रतिभूतियाँ स्टॉक, सोना व चांदी, विनिमय विपत्र अथवा सावधि ऋण जिनकी अवधि 90 दिन से अधिक न हो प्रदान कर सकता है। इसके अतिरिक्त, रिज़र्व बैंक निर्यात बिलों के संबंध में 180 दिनों तक सावधि ऋण अथवा मांग पर दे ऋण प्रदान कर सकता है। अधिनियम की धरा 18 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को उन परिस्थितियों में संकटकालीन ऋण प्रदान करने का अधिकार दिया गया है। जब रिज़र्व बैंक समझता है कि ऋण व्यापार, वाणिज्य उद्योग अथवा कृषि के हित में आवश्यक है।
4. बैंकों पर नियंत्रण रिजर्व बैंक व्यापारिक बैंकों पर नियंत्रण करता है। यह व्यापारिक बांको को नई शाखाएं खोलने के लिए आगया प्रदान करता है। रिज़र्व बैंक को व्यापारिक बैंक के खातों का निरीक्षण करने का अधिकार है। रिज़र्व बैंक इन्हें निर्देश देने का भी कार्य संपन्न करता है। इसके अतिरिक्त रिज़र्व बैंक को व्यापारिक बैंकों के उच्च प्रबंध पर अधिकार प्राप्त होता है। चूंकि रिज़र्व बैंक की सहमती से ही प्रबंधकीय संचालकों एवं चेयरमैन को नियुक्ति का कार्य किया जाता है। रिज़र्व बैंक को यह अधिकार भी प्राप्त है कि वह शीर्ष प्रबंध में अपने संचालकों को मनोनीत कर सकता है एवं कार्यरत संचालकों को हटा सकता है।
5. साख नियंत्रण रिज़र्व बैंक व्यापारिक बैंकों की साख निर्माण की शक्ति पर नियंत्रण रखता है।
बैंक ब्याज दर, खुले बाजार की क्रियाएं, वैधानिक कोष में परिवर्तन, नैतिक प्रभाव आदि विभिन्न तरीकों से रिजर्व बैंक साख नियंत्रण करता है। साख नियंत्रण का कार्य देश की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। आवश्यकतानुसार साख निर्माण का कार्य विस्तृत अथवा संकुचित किया जाता है।
6. विदेशी कोषों का संरक्षण रिज़र्व बैंक विदेशी विनिमय का कार्य संपन्न करता है। इसके अंतर्गत रिजर्व बैंक विदेशी विनिमय दर निर्धारित करता है। जिसके आधार पर विदेशी मुद्रा का क्रय विक्रय किया जाता है। इसमें, रिज़र्व बैंक व्यापारिक बैंकों को निर्देश देने एवं उन पर नियंत्रण करने का कार्य भी सम्पन्न करता है।
व्यापारिक बैंकों द्वारा किये गए व्यवहारों की सूची का सार विवरण पत्र उन्हें बैंक को भेजना पड़ता है।
7. पर्यवेक्षण का कार्य रिज़र्व बैंक व्यापारिक बैंकों एवं सहकारी बैंकों का पर्यवेक्षण करता है तथा उन्हें नई शाखाएं खोलने एवं बैंकिंग व्यापार बढ़ने के विभिन्न तरीकों के विषय में निर्देश डेटा है। रिज़र्व बैंक व्यापारिक बैंकों को बैंकिंग सुविधाएँ विस्तृत करने के लिए खोला गया है जो व्यापारिक बैंकों के कर्यों पर निगरानी रखेगा।
8. संवर्द्धन कार्य - रिज़र्व बैंक के कार्य आधुनिक युग में अत्यंत व्यापक हो गए हैं।
रिज़र्व बैंक अपने संवर्द्धन कार्यों के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग विकास, नए वित्तीय संसाधनों की स्थापना एवं व्यक्तियों में बैंकिंग आदत का विकास करने का कार्य करता है। रिज़र्व बैंक ने ग्रामीण एवं औद्योगिक विकास के लिए अनेक वित्तीय संस्थाओं की स्थापना की है। उदाहरण के लिए, औद्योगिक विकास बैंक, औद्योगिक पुनर्वित्त निगम, निस्खेप बीमा निगम आदि अनेक वित्तीय संस्थाओं की स्थापना करके बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को नई दिशा प्रदान की है। इसके अतिरिक्त रिज़र्व बैंक ने ग्रामीण वित्तीय सुविधाओं के विस्तार में प्रशंसनीय सहयोग प्रदान किया है। इसमें रिज़र्व बैंक प्रत्यक्ष रूप में वित्त सुविधायें प्रदान करता है इसके अतिरिक्त रिज़र्व बैंक ने ग्रामीण विकास के लिए दो पृथक कोषों का निर्माण किया है, प्रथम कृषि साख एवं अन्य कृषि साख कोष ।
वार्तालाप में शामिल हों