अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आई एफ सी इंटरनेशनल फिनांस कारपोरेशन) - International Finance Corporation (IFC International Finance Corporation)
अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आई एफ सी इंटरनेशनल फिनांस कारपोरेशन) - International Finance Corporation (IFC International Finance Corporation)
यह निगम विश्व बैंक से संबद्ध एक संगठन है। केवल विश्व बैंक के सदस्य ही इसके सदस्य हो सकते हैं। विश्व बैंक केवल ऋण ही देता है। किसी परियोजना की अंश पूँजी में भागीदारी की उसे अनुमति नहीं है। इसी कारण निजी उद्यमों को भी अंश पूँजी निधि प्रदान करने के लिए 1956 में इस निगम की स्थापना की गई।
कार्य : यह निगम सदस्य देशों में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देता है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
अ) जहाँ उचित शर्तों पर पर्याप्त निजी पूँजी उपलब्ध न हो, वहाँ निजी निवेशकों के सहयोग से और सरकारी जमानत के बीना सदस्य देशों के निजी क्षेत्र में निवेश करना,
ब) विदेशी व घरेलू, दोनों प्रकार के निवेश के अवसर तथा अनुभवी प्रबंधन क्षमता प्रदान करना,
स) सदस्य देशों में उत्पादक निवेश के लिए घरेलू और विदेश, दोनों प्रकार की निजी पूँजी के प्रवाह में सहायक दशाओं को बढ़ावा देना।
सांगठनिक ढाँचा : विश्व बैंक का संबद्ध संगठन होने के नाते उसी का बोर्ड ऑफ गवर्नर्स अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम का बोर्ड ऑफ गवर्नर्स भी होता है। इसके अलावा विश्व बैंक का कार्यकारी निदेशक मण्डल ही इस निगम का प्रबंध मण्डल निगम के काम काज के लिए जिम्मेदार होता है। रोजमर्रा के कामकाज कार्यकारी उपाध्यक्ष की निगरानी में चलाए जाते हैं।
संसाधन : पूँजी में सदस्यों के योगदान और संचित भंडार निगम के संसाधन होते हैं। वह विश्व बैंक से अपनी निवल संपदा (नेटवर्थ) के चार गुना तक ऋण ले सकता है।
वित्तीय योजनाएँ: निगम विकासशील देशों में अनेकानेक प्रकार के निजी उत्पादक उद्यमों को दीर्घकानिक ऋण देता या उनकी अंश पूँजी ने निवेश करता है। सहायता प्राप्त परियोजना आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक तथा सदस्य देश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होनी चाहिए। निगम द्वारा न्यूनतम 10 लाख और अधिकतम 10 करोड़ अमरीकी डालर की वित्तीय सहायता दी जाती है।
इसके अलावा निगम की वित्तीय सहायता आमतौर पर परियोजना के कुल निवेश के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होती।
सीधे ऋण देने और अंश पूँजी निवेश के अलावा निगम विकास सेवाएँ भी प्रदान करता है। जैसे परियोजनाओं की की पहचान और प्रोत्साहन, निजी स्वामित्व वाली विकास- वित्त कंपनियों को प्रोत्साहन और उनकी स्थापना, पूँजी बाजारों की संवृद्धि को बढ़ावा देना तथा निजी क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने वाले कदमों के लिए सलाह/तकनीकी परामर्श देना।
वार्तालाप में शामिल हों