बाजार विभक्तिकरण - market segmentation
बाजार विभक्तिकरण - market segmentation
आज के गलाकाट प्रतिस्पार्धी युग में ग्राहक सर्वोपरि है तथा उसकी आवश्यकताओं की संतुष्टि में ही विपणकों की सफलता निहित है। ग्राहकों की रुचियों, आवश्यकताओं, प्राथमिकताओं तथा क्रय-व्यवहार में अंतर पाया जाता है। एक ही प्रकार का उत्पाद सभी प्रकार के उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को संतुष्ट नहीं कर सकता। इसी वजह से एक निर्माता एक प्रकार के ग्राहकों के समुदाय के लिए एक प्रकार की ही वस्तु बनाता है तथा दूसरे प्रकार के ग्राहकों के समुदाय के लिए दूसरी प्रकार का वस्तु बनाता है। जैसे हिन्दुतस्तान यूनिलीवर कम्पनी कई किस्म के नहाने के साबून का निर्माण करती है- लाइफबॉय साबुन निम्न वर्ग के लोग क्रय करते हैं, लक्स साबुन मध्य म श्रेणी के लोग क्रय करते है
तथा पियर्स साबुन उच्च वर्ग के लोग क्रय करते हैं। इस तरह वह अपने बाजार को विभिन्नि खण्डोंस में विभाजित कर देता है। इस प्रकार का खण्डीकरण ही 'बाजार विभक्तिकरण' कहलाता है। बाजार विभक्तिकरण का आधार आय, शिक्षा, आयु, लिंग, व्यवसाय, रहन-सहन का स्तर आदि हो सकता है।
बाजार विभक्तिकरण का अर्थ - बाजार विभक्तिकरण से आशय किसी वस्तु के बाजार को विभिन्न खण्डों अथवा उप-खण्डों में विभाजित किए जाने से हैं। यह कार्य ग्राहकों की समान प्रकृति, रुचियों, गुणों तथा आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाता है।
परिभाषाएँ कुछ प्रमुख विद्वानों द्वारा दी गयी परिभाषाएँ निम्नलिखित है
1) फिलिप कोटलर के अनुसार जब किसी उत्पाद या सेवा के सम्बन्ध में बाजार में दो या दो से अधिक क्रेता हो तो वह विभक्त किया जा सकता है अर्थात् क्रेता समूहों में विभाजित किए जा सकते हैं। बाजार विभक्तिकरण को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राहकों के समजातीय उपवर्गों में बाजार के उपविभाजन को बाजार विभक्तिकरण कहते हैं, जिसके अंतर्गत किसी भी उपवर्ग को चुना जा सके और विशिष्ट विपणन मिश्रण (Marketing Mix) के साथ बाजार लक्ष्य बनाकर उस तक पहुँचा जा सकें।”
2) विलियम जे. स्टेन्टन के अनुसार “बाजार विभक्तिकरण से आशय किसी उत्पाद के संपूर्ण विजातीय बाजार को अनेक उप-खण्डों में इस प्रकार विभाजित करने से है कि प्रत्येक उप बाजार उपखण्ड में सभी महत्वपूर्ण पहलुओं में समजातीयता हो।"
3) ए. राबर्ट के अनुसार “बाजार विभक्तिकरण बाजारों को टुकड़ों में बाँटने की रीति-नीति ताकि उस पर विजय प्राप्त की जा सके। "
निष्कर्ष – इस प्रकार बाजार विभक्तिकरण के अंतर्गत एक उत्पाद के बाजार को विभिन्न उप-बाजारों या खण्डों में विभाजित किया जाता है। यह विभाजन ग्राहकों की विशेषताओं एवं प्रकृति के अनुसार किया जाता है। विपणन की दृष्टि से यह आवश्यक है कि ग्राहकों को समजातीय खण्डों में विभाजित किया जाय तथा प्रत्येक खण्ड की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावपूर्ण विपणन नीति तैयार की जाय।
ध्यान रखने की बात यह है कि बाजार विभक्तिकरण तथा बाजार खण्ड (Market Segment) इन दोनों में अंतर है। बाजार विभक्तिकरण एक क्रिया है, जिसके द्वारा समूचे बाजार को विभिन्न खण्डों में विभाजित किया जाता है। बाजार खण्ड कुल बाजार का एक भाग है, जिसमें प्रत्येक ग्राहक के क्रय-व्यवहार में समानता पायी जाती है।
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