विपणन संचार प्रक्रिया - Marketing Communication Process
विपणन संचार प्रक्रिया - Marketing Communication Process
विपणन संचार प्रक्रिया सामान्य संचार प्रक्रिया के समान है। इस प्रक्रिया में विपणन संदेशों को प्रबंधकों द्वारा मध्यस्थों एवं लक्षित उपभोक्ता बाजारों तक पहुँचाना है। विपणन संचार प्रक्रिया में निम्नलिखित चरणों को सम्मिलित किया जा सकता है।
1. संदेश प्रेषक, उद्गम या संचारक (Sender, Source or Communicator)
सूचना के उद्गम से ही संचार का प्रादुर्भाव होता है। संचार के लिए यह आवश्यक है कि किसी व्यक्ति के पास कोई सूचना हो और जिसे किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के पास पहुँचाना हो। इस प्रकार संचार के लिए किसी विचार या सूचना का होना आवश्यक है। विचार किसी राय, भावनाओं, सुझाव, आदेश,
शिकायत आदि के रूप में हो सकती है। उदाहरण के लिए, विपणन प्रबंधक के पास कई विचार, सूचनाएँ, निर्देश आदि हो सकते हैं, जिनका संचार वह अपने अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों, लक्षित बाजारों एवं मध्यस्थों, वितरकों आदि को प्रभावी ढंग से कर उत्पाद या सेवा के विक्रय में वृद्धि कर सकता है।
2. विचारों को प्रेषण योग्य बनाना अथवा संकेतबद्ध करना (Encoding)
इस चरण में विचार अथवा सूचना को शब्दों, प्रतीकों, चित्रों, क्रियाओं आदि में परिवर्तित किया जाता है, जिससे उनका संप्रेषण किया जा सके। विभिन्न संवर्द्धनात्मक उपायों में विभिन्न प्रकार की संवर्द्धक वाहिकाओं, विज्ञापन, वैयक्तिक संपर्क, डाक, टेलीफोन आदि का उपयोग किया जाता है, जो कि संचार प्रेषण के विभिन्न रूप है।
3. संदेश (Message)
संचार प्रक्रिया के इस चरण में विपणन प्रबंधकों द्वारा विचार या सूचना का संप्रेषण मध्यस्था, उपभोक्ताओं या आम जनता को किया जाता है। ऐसा संप्रेषण समाचार पत्रों, चिन्हों या प्रतीकों, भावनाओं तथा भाव-भंगिमाओं के माध्यम से किया जाता है। ऐसे संदेश दूरदर्शन, रेडियो, टेलीफोन, डाक सेवा आदि द्वारा भेजे जाते हैं।
4. अर्थ ग्रहण करना अथवा संदेश वाचक (Decoding)
संचार प्रक्रिया के इस चरण में प्राप्त संदेश को डिकोड करके उसका अर्थ समझने का प्रयास किया जाता है। प्राप्त संदेश की व्याख्या एवं विश्लेषण किया जाता है, जिससे उसका सही अर्थ समझा जा सके।
संचार प्रक्रिया को तब तक प्रभावी नही माना जाता जब तक प्राप्तकर्ता उसे सही अर्थ में समझ न ले।
5. संदेश प्राप्ताकर्ता (Receiver)
संदेश प्राप्त कर्ता एक व्याक्ति या व्यक्तियों का समूह, भावी ग्राहक आदि हो सकते हैं। संदेश प्रेषक का उद्देश्यो संदेश को संदेश प्राप्तकर्ता तक पहुँचाना होता है।
6. प्रतिक्रिया (Response) संचार प्रक्रिया तभी पूर्ण मानी जाती है जब संदेश प्राप्त कर्ता की प्रतिक्रिया का ज्ञान संदेश प्रेषक को हो जाये।
7. प्रतिपुष्टि (Feedback)
प्रतिपुष्टि से संचार की प्रभावशीलता में सुधार लाया जा सकता है। विपणन के क्षेत्र में किसी ग्राहक का प्रत्युकत्ते प्रतिपुष्टि का एक अच्छा उदाहरण हो सकता है। प्रतिपुष्टि को ध्यान में रखकर भविष्य में किए जाने वाले संचार में आवश्यक संशोधन किया जा सकता है।
8. बाधाएँ (Hurdles)
संचार की प्रभावशीलता संचार बाधाओं से विशेष रूप से प्रभावित होती है। विपणन संचार में प्रतिस्पर्द्धा विज्ञापन, अन्य विक्रेता, कार्यालय या घरेलू परेशानियाँ आदि मुख्य बाधाएँ है। उपर्युक्त विपणन संचार प्रक्रिया को निम्नलिखित रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है -
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