मीडिया मूल्यांकन - media evaluation
मीडिया मूल्यांकन - media evaluation
मीडिया का जनजीवन पर सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव मीडिया एक ऐसा जरिया है, जिसके माध्यम से देश-विदेश की जानकारी, डाटा को एक साथ लोगों तक पहुँचाया जाता है। पहले लोग अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने के लिए डास, गाने नाटक, का प्रयोग करते थे, जिससे उनकी बात दूसरों तक पहुँच सके। समय के साथ इसमें बदलाव आया और इसकी जगह प्रिंट मीडिया फिर मास मीडिया और अब सोशल मीडिया के द्वारा लोग अपनी बात सबके सामने रखते हैं। मीडिया संचार का एक बहुत आसान और मजबूत तरीका है। आजकल मीडिया के सबसे आसान तरीके हैं - रेडियों, टीवी, न्यूज पेपर और इंटरनेट मीडिया का हमारे समाज में एक अहम स्थान है।
मीडिया ने जब पहली बार काम शुरू किया तो प्रिंट मीडिया आया, इसका मतलब समाचार पत्र समाचार पत्रों के माध्यम से लोग अपनी बात या देश-विदेश की जरूरी जानकारी उसमें छापने लगे। इसके द्वारा एक साथ बहुत से लोगों तक, बहुत कम समय में जानकारी जाने लगी। इसके बाद आया रेडियो, जिसके माध्यम से हम गाने, विविध जानकारी एवं समाचार को सुन सकते थे। रेडियो की फ्रीक्वेंसी सेट कर, ये गाँव - गाँव शहर-शहर पहुँचने लगा। इसके माध्यम से भी जानकारी जल्दी मिलने लगी। इसके बाद मीडिया के क्षेत्र में क्रांति लाई टीवी ने भारत में दूरदर्शन चैनल के साथ सभी घरों में टीवी आई। टीवी में मनोरंजन के लिए बहुत से सीरियल ज्ञानवर्धक बातें आती थी। इसके साथ ही इसमें समाचार का प्रसारण होने लगा। इसमें किसी भी कार्यक्रम को सुनने के साथ हम देख भी सकते थे।
मीडिया क्या है? लोकल न्यूज, टीवी सितारे राजनेता के लिए पेपर मीडिया ही कार्य करता था। उसी में सभी के बारे में विस्तार से पढ़ा जा सकता था। समय के साथ टीवी चैनल बढ़े, लोगों का रूझान बढ़ा दिए गए। जिसमें 24 घंटे न्यूज आने लगी। अब गानों के लिए अलग, फिल्मों के लिए अलग, धार्मिक, बच्चों के लिए, हर भाषा के लिए और कॉमेडी के लिए अलग चैनल आ गए हैं। इसके साथ ही अब पुराने सीरियल को वापस टेलीकास्ट करने के लिए मीडिया वाले एक नया चैनल ही बना देते हैं। इस तरह मीडिया का विस्तार होते चला गया और मीडिया का जाल देश समाज में फैल गया। इस तरह टीवी पर आनेवाले मीडिया को मास मीडिया नाम मिला।
प्रभाव :- टीवी में बढ़ते मीडिया का समाज पर अपना ही प्रभाव है। मीडिया का जनजीवन पर दोनों
सकारात्मक और नकारात्मक कई फायदे हैं, तो कई नुकसान हैं।
सकारात्मक प्रभाव :- मीडिया का सबसे बड़ा साधन आज के समय में टेलिविजन है। टीवी में आज जितने
मनोरंजन के चैनल हैं, उतने ही या उससे ज्यादा समाचार के चैनल हैं।
1. मीडिया के माध्यम से लोगों को शिक्षा मिलती है। वे टीवी, रेडियों, प्रोग्राम के माध्यम से स्वास्थ्य वातावरण, दूसरी अन्य जानकारी प्राप्त करते हैं।
2. मीडिया के माध्यम से लोगों को अपना टैलेंट पूरी दुनियाँ में सबके सामने रखने का एक अच्छा प्लेटफार्म मिला है।
3. बच्चों का ज्ञान बढ़ता है। बच्चे डिस्कवरी जैसे चैनल, स्विजप्रोग्राम से बहुत कुछ सीखते हैं।
4. रेडियो भी एक अच्छा माध्यम है। इसके माध्यम से कहीं भी रहकर जानकारी मिल जाती है। आजकल मोबाइल में भी रेडियो, एफएम की सुविधा उपलब्ध है। 5. मीडिया के माध्यम से विज्ञापन कंपनी के उन्नति के रास्ते खुल गए। जैसे ही मीडिया आई, उसके
पीछे-पीछे अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन करने के लिए, उन्हें अच्छा-अच्छा माध्यम मिल गया।
विज्ञापन के माध्यम से अलग-अलग तरह के सामान के बारे में लोगों को जानकारी मिलती है,
जिससे बिक्री भी अधिक होती है।
नकारात्मक प्रभाव
1. बढ़ते चैनलों के साथ एक चैनल दूसरे चैनल का प्रतिद्वंदी हो गया। टीआरपी की होड़ में ये प्रोग्राम की क्वालिटी पर ध्यान नहीं देते और कुछ भी दिखाते हैं।
2. आजकल टीवी पर कार्यक्रम से ज्यादा विज्ञापन आते हैं। टीवी चैनलों को विज्ञापन से पैसा मिलता है, जिससे वे अपने कार्यक्रम में विज्ञापन ज्यादा दिखाते हैं और प्रोग्राम को छोटा कर देते हैं।
3. कुछ भी दिखाने के लिए आजकल फूहड़ता परोसी जाती है। कई बार फैमिली चैनल में भी ऐसे कार्यक्रम आते हैं,
जो परिवार के साथ बैठकर नहीं देखे जा सकते और अचानक कुछ ऐसा आने पर सभी असमंजस महसूस करते हैं।
4. बढ़ते चैनलों की वजह से अधिकतर लोग इसमें व्यस्त हो गए हैं। एक के बाद एक कार्यक्रम के चलते वे टीवी सेट्स के सामने ही बैठे रहते हैं। इसके साथ ही दूसरे चैनल में उसी समय में और प्रोग्राम आते हैं, जिसे देखने के लिए लोग उसका रिपीट देखते हैं। इसका मतलब लोगों की जिंदगी बस टीवी क इर्दगिर्द ही घूमती है। मुख्यतया ऐसा औरतें करती हैं।
5. औरतें अपने कार्यक्रम के चलते घर का सारा काम-धाम छोड़ देती है। इनकी इस आदत की वजह से कई बार इनके पति भी परेशान रहते हैं।
6. अधिक समय मास मीडिया सोशल मीडिया में बिताने के कारण समय बर्बाद कर देते हैं। इसके कारण लोगों की सामाजिक जिंदगी भी प्रभावित होती है।
7. मास मीडिया, सोशल मीडिया को सबसे बुरा प्रभाव बच्चों पर एवं विद्यार्थियों पर पड़ता है, वे अपना
ध्यान इस पर अधिक लगाते है, जिससे उनकी पढ़ाई पर बहुत असर पड़ता है।
8. मास मीडिया, सोशल मीडिया एक तरह से आपको अपनी आदत लगा देते हैं, इसके बिना रहना आपके लिए मुश्किल हो जाता है। इससे इंसान के दिमाग का विकास भी रूक जाता है और वे एक ही स्तर तक सोच पाता है।
9. लगातार मीडिया के संपर्क में रहने से बच्चों, बड़े सभी के दिमाग और आँख पर असर होता है। बच्चों को कम उम्र में ही चश्मे लगने लगते हैं। इसके अलावा भी बहुत से स्वास्थ्य की परेशानी जैसे सरदर्द कमरदर्द आदि।
10. सोशल मीडिया में अधिक समय बिताने वालों के लिए कई तरह की परेशानी खड़ी हो जाती है। यदि माँ-बाप ध्यान न दें, तो बच्चे गलत लोगों की संगति में पड़ जाते हैं और अपना भविष्य खराब कर देते है।
11. मास मीडिया और सोशल मीडिया पर बहुत से गंदे चैनल भी आते हैं। ये हमारे समाज के लिए अभिशाप की तरह है, जो देश का भविष्य बिगाड़ते हैं।
इसके लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए और ऐसे टीवी चैनल प्रोग्राम को प्रसारित होने से रोकना चाहिए।
12. कई लोग एफएम (FM) सुनने के आदी होते हैं और हेडफोन लगाकर इसे सुनते है, ड्राइविंग करते हैं। इससे उनके कान में तो परेशानी होती ही है, साथ ही वे दुर्घटना का शिकार भी हो जाते हैं।
13. मास या सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रम कई बार गलत शिक्षा भी देते हैं। इसमें क्राइम से जुड़े प्रोगाम भी आते हैं, जो कई लोगों को नए आइडिया देते हैं और इससे समाज में भी तरह-तरह की आपराधिक घटनाएँ होने लगती है।
14. मीडिया में जिस तरह मादक पदार्थों, जैसे शराब सिगरेट व ड्रग का सेवन खुलेआम दिखाया जाता है, इसे देखकर बड़ों के साथ ही बच्चे भी प्रभावित होते हैं और वे इसे अपने जीवन में उतार लेते हैं।
15. टीवी पर दिखाए जाने वाले प्रोग्राम में अमीर, गरीब, जाति धर्म का बहुत बोलबाला होता है जिससे लोगों को गलत शिक्षा मिलती है। इसके साथ ही इसमें दिखावा साज-सज्जा अधिक होती है, जिससे प्रभावित होकर आम जनता भी उसे अपने जीवन में उतारने की कोशिश करती है।
16. मीडिया में दिखाए गए स्टंट को बच्चे व युवा अपने घर में करने की कोशिश करने में अपनी जान गवां बैठते हैं।
17. मीडिया से आजकल सच्चाई कम कंटेंट ज्यादा होता है।
एम.बी.ए.
18. इंसानियत का ह्रास
19. जातिवाद को बढ़ावा ।
20. अफवाह फैलाते हैं।
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