मीडिया - Media
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समाज के विस्तृत क्षेत्र के संदर्भ में पत्रकारिता के निम्नलिखित उद्देश्य व दायित्व बताए जा सकते हैं:
1. नई जानकारियाँ उपलब्ध कराना
2. सामाजिक जनमत को अभिव्यक्ति देना
3. समाज को उचित दिशा-निर्देश देना
4. स्वस्थ मनोरंजन की सामग्री देना
5. सामाजिक कुरीतियों को मिटाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना
6. धार्मिक-सांस्कृतिक पक्षों का निष्पक्ष विवेचन करना
7. सामान्य जन को उनके अधिकार समझाना
8. कृषि जगत व उद्योग जगत की उपलब्धियाँ जनता के सामने लाना
9. सरकारी नीतियों का विश्लेषण और प्रसारण
10. स्थास्थ्य जगत के प्रति लोगों को सर्तक करना
11. सर्वधर्म समभाव को पुष्ट करना
12. संकट कालीन स्थितियों में राष्ट्र का मनोबल बढ़ाना
13. वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का प्रसार करना
समाज में मानवमूल्यों की स्थापना के साथ जन जीवन को विकासोन्मुखी बढ़ाना मीडिया का दायित्व है। मीडिया के सामाजिक और व्यावसायिक उत्तरदायित्व के अनेकानेक आयाम हैं। अपने इन उत्तरदायित्वों का निर्वाह करने के लिए मीडियाकर्मी का एक हाथ सदैव समाज की नब्ज पर होता है। अर्थ और परिभाषा:- पत्रकारिता के लिए अंग्रेजी में जर्नलिज्म शब्द का प्रयोग होता है यह शब्द जर्नल से निकला है। इसका शाब्दिक अर्थ है दैनिक दिन-प्रतिदिन के क्रिया-कलापों, सरकारी बैठकों का विवरण जर्नल में रहता है। यानि दैनिक गतिविधियों का विवरण है जर्नलिज्म समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के संपादन और लेखन व उससे जुड़े कार्यों को पत्रकारिता के अंतर्गत रखा जाता है। या यूँ कहें कि समाचारों का संकलन - प्रसारण विज्ञापन की कला और व्यावसायिक प्रबंधन पत्रकारिता है।
सामयिक संचार से संबंधित सभी साधन चाहे वह रेडियो टेलीविजन हों या अखबार-पत्रिकाएं अथवा इंटरनेट इसी के अंतर्गत आते हैं। महात्मा गांधी :- पत्रकारिता एक सामाजिक धर्म है और वह समाज के स्वास्थ्य के लिए है। जो बोला जाता है उसे लिखने की आवश्यकता नहीं, पर जो लिखा गया है उसे सही लिखने की आवश्यकता है।
जवाहरलाल नेहरू :- The Press is one of vital organs of modern life especially in as democracy. The Press has tremendous Power and responsibilities. The press must be respected.
लेस्ली स्टीफन :- पत्रकारिता उन विषयों पर लिखना है जिन पर जनता का ज्ञानपूर्ण नहीं हैं।
सी.जी. मूलर :- सामायिक ज्ञान का व्यवसाय ही पत्रकारिता है। इसमें तथ्यों की प्राप्ति, उनका मूल्यांकन और
ठीक-ठाक यानि वास्तविक प्रस्तुतीकरण होता है।
चेम्बर डिक्शनरी:- प्रकाशन, संपादन, लेखन और प्रसारण युक्त समाचार माध्यम का व्यवसाय ही पत्रकारिता है। सूचना, ज्ञान या विचारों का समीक्षात्मक टिप्पणियों के साथ शब्द ध्वनि और चित्रों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाना ही पत्रकारिता है।
इन्द्र विद्या वाचस्पति :- पत्रकारिता पांचवां वेद है, जिसके द्वारा हम ज्ञान-विज्ञान संबंधी बातों को जानकर अपने बंद मस्तिष्क को खोलते हैं।
एरिक हाडगीन :- पत्रकारिता यहां से वहाँ सूचनाओं के सच्चाई, गहराई और त्वरित गति के साथ भेजना है, जिससे सत्य की सेवा होती है और विषयों के सही होने का स्वरूप धीरे-धीरे प्रत्यक्ष होता है। शब्द कोष के अनुसार लिखने का व्यवसाय पत्रकारिता है।
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