कार्यशील पूँजी के पूर्वानुमान की तकनीक - Methods of estimating working capital
कार्यशील पूँजी के पूर्वानुमान की तकनीक - Methods of estimating working capital
कोई भी व्यवसाय बिना पर्याप्त कार्यशील पूँजी के सफलतापूर्वक नहीं चल सकता। "कार्यशील पूँजी व्यवसाय का जीवनरक्त तथा स्नायुकेन्द्र नियंत्रक होती है।” कार्यशील पूँजी की कमी से तुरंत बचने के लिए कार्यशील पूँजी की आवश्यकताओं का पहले से पूर्वानुमान लगा लेना चाहिये। इसके पूर्वानुमान के लिए निम्न तकनीक अपनाई जा सकती है
(१) संचालनचक्र रीति: कार्यशील पूँजी की मात्रा संचालनचक्र रीति से निर्धारित की जा सकती है। इस हेतु कुल संचालन व्ययों को कुल संचालन चक्रों से भाग देकर कार्यशील पूँजी की मात्रा निर्धारित की जा सकती है।
(अ) संचालन व्यय किसी अवधि के (गैर नकद खर्ची को छोड़कर) किये गये संचालन व्ययों,
यथा सामग्री क्रय, निर्माणी व्यय, प्रशासनिक व्यय, विक्रय, वितरण व्यय, प्रत्यक्ष व्यय, पैकिंग व्यय आदि को शामिल किया जाता है। ह्रास और नकद खर्च हैं तथा कर एवं लाभांश की राशि लाभों का नियोजन है। अतः परिचालन व्ययों में इन्हें शामिल नहीं किया जाता। संचालन चक्र की अवधि संचालन चक्र में लगने वाली अवधि अर्थात् संचालन की विभिन्न अवस्थाओं की अवधि के योग में से देनदारों द्वारा प्रदत्त अवधि को घटाने के बाद बची हुई अवधि को कहते हैं। सूत्र रूप में इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है
O= R+W+F+DC
0 = परिचालन चक्र अवधि
R = कच्चे माल एवं स्टोर संग्रहण अवधि
W = कच्चे माल को निर्मित माल में परिवर्तन की अवधि
F= निर्मित माल संग्रहण अवधि
D = देनदार संग्रहण अवधि
C = लेनदारों को भुगतान अवधि
इनकी गणना इस प्रकार होती है
(37) सामग्री संग्रहण विधि - उत्पादन हेतु निर्गमन से पूर्व जितने दिन कच्ची सामग्री को स्टोर में रखना होता है उसे सामग्री संग्रहण अवधि कहते हैं। कच्चे माल का औसत स्कंध औसत स्कंध = कच्चे माल का प्रारंभिक स्कंध + अंतिम स्कंध 2 वार्षिक उपभोग 365 औसत दैनिक उपभोग =
सामग्री संग्रहण अवधि = प्रतिदिन औसत उपभोग
(ब) रूपांतरण अवधि - जितनी अवधि में कच्चा माल निर्मित माल में परिवर्तित होता है उसे रूपांतरण अवधि कहते हैं। रूपांतरण अवधि = • अर्द्धनिर्मित माल का औसत स्कंध प्रतिदिन औसत कारखाना लागत कच्चे माल का प्रारंभिक स्कंध + अंतिम स्कंध 2 कुल कारखाना लागत 365 औसत स्कंध = औसत दैनिक कारखाना लागत =
(स) तैयार माल संग्रहण अवधि - माल निर्मित होने के बाद जितनी अवधि तक गोदाम में रहता है उसे तैयार माल संग्रहण अवधि कहते हैं। निर्मित माल संग्रहण अवधि औसत निर्मित माल का स्कंध औसत दैनिग बिक्री लागत निर्मित माल का प्रारंभिक स्कंध + अंतिम स्कंध 2 वर्ष के विक्रय की लागत 365
(द) औसत वसूली अवधि देनदारों से रूपया वसूल होने में जितनी - अवधि लगती है उसे औसत वसूली अवधि कहते हैं। औसत संग्रहण अवधि = औसत प्राप्त / देनदार दैनिक औसत उधार विक्रय औसत देनदारी = 2
प्रारंभिक देनदार + अंतिम देनदार
दैनिक औसत विक्रय वार्षिक उधार विक्रय 365
(इ) औसत भुगतान अवधि लेनदारों को नकद भुगतान देने में जितनी अवधि लगती है उसे औसत भुगतान अवधि कहते हैं। औसत भुगतान अवधि औसत लेनदार औसत उधार दैनिक क्रय = 2 उपरोक्त क्रमांक 1 से 4 तक की अवधि का योग लगाकर उसमें से क्रमांक 5 की अवधि घटा देने पर संचालन चक्र की कुल अवधि ज्ञात हो जाती है। वर्ष के संचालन चक्रों की संख्या वर्ष के दिन 365 को संचालन अवधि से भाग देने पर प्राप्य फल संचालन चक्र की संख्या ज्ञात हो जाती
औसत लेनदार = लेनदारों का प्रारंभिक शेष + अंतिम शेष
औसत उधार क्रय = कुल उधार क्रय 365
है। कार्यशील पूंजी की राशि निम्न सूत्र से ज्ञात होती है।
कार्यशील पूँजी की राशि =
वर्ष में कुल संचालन व्यय
संचालन चक्रों की संख्या
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