मूल्यांकन की विधियाँ - Methods of Evaluation of Sales Promotion Programme

मूल्यांकन की विधियाँ - Methods of Evaluation of Sales Promotion Programme


1. विक्रय विश्लेषण विधि (Sales Analysis Method) विक्रय समंकों के आधार पर विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम का मूल्यांकन करने की विधि अत्यन्त प्रचलित विधि है। इसमें किसी विक्रय संवर्द्धन की विधि को अपनाने के पूर्व अपनाने के दौरान तथा अपनाने के पश्चात् किसी बाजार विशेष में बिक्री की मात्रा (Sales Volume) अथवा 'बाजार भाग (Market Share) का निर्धारण करके उस संवर्द्धन विधि की सफलता को मापा जा सकता है। उदाहरणार्थ, संवर्द्धन तकनीक को लागू करने के पूर्व कम्पनी का बाजार भाग 4 प्रतिशत था, जो कि संवर्द्धन के दौरान 10 प्रतिशत हो जाता है। संवर्द्धन को बन्द करने के तुरन्त बाद यह बाजार भाग 6 प्रतिशत हो जाता है।

किन्तु कुछ समय पश्चात् ही यह बढ़कर 8 प्रतिशत हो जाता है। इससे यह स्पष्ट है कि संवर्द्धन तकनीक से नये ग्राहक जुड़े हैं तथा पुराने ग्राहकों द्वारा किये जाने वाले क्रय की मात्रा में भी वृद्धि हुई है।


किन्तु यदि उत्पाद ब्राँड का भाग गिरकर पुनः संवर्द्धन - पूर्व स्तर (Pre-Promotion level) तक आ जाता है तो इससे यह स्पष्ट होगा कि संवर्द्धन विधि ने माँग के केवल समय प्रारूप (Time Pattern) को ही बदला था कुल माँग को नहीं। विक्रय प्रबन्धक को यह भी निर्धारित कर लेना चाहिये कि बिक्री की मात्रा में परिवर्तन संवर्द्धन तकनीक के कारण ही हुआ है, किन्हीं अन्य घटकों, जैसे प्रतिस्पर्धा, आर्थिक, दशाओं आदि के कारण नहीं।


2. उपभोक्ता सूची विधि (Consumer panel Method) उपभोक्ता सूची के द्वारा यह पता किया जा सकता है कि किस प्रकार के उपभोक्ता विक्रय संवर्द्धन के फलस्वरूप क्रय हेतु उत्प्रेरित हुये, उन्होंने कितना माल खरीदा तथा संवर्द्धन के बाद उनका क्रय व्यवहार (Buying Behaviour) कैसा रहा। उपभोक्ता सूची से ग्राहकों के प्रकार जैस-नये पुराने, युवा वृद्ध, देशी-विदेशी, बच्चे-युवा, स्त्री-पुरुष, औद्योगिक सामान्य व्यक्ति संस्थागत आदि के बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त हो जाती है। इन समंकों का विश्लेषण करके संवर्द्धन तकनीक का उपयोग प्रारूप, क्रय आदतों, उम्र, शिक्षा, आय, स्तर आदि पर पड़ने वाले प्रभावों का भी मापन किया जा कसता है।


3. उपभोक्ता सर्वेक्षण विधि (Consumer survey method) – इस विधि के द्वारा उपभोक्ता के सम्बन्ध में कई प्रकार की सूचनाएँ प्राप्त करके संवर्द्धन तकनीक की प्रभावशीलता की जाँच की जा सकती है। इस विधि के द्वारा उपभोक्ताओं के सम्बन्ध में निम्न निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं:


1. कितने उपभोक्तओं को इस तकनीक के सम्बन्ध में स्मरण रहा है?


2. इस संवर्द्धन तकनीक के बारे में उनका दृष्टिकोण एवं विचार क्या है?


3. कितने उपभोक्ताओं ने इस तकनीक से लाभ प्राप्त किया है?


4. इस संवर्द्धन विधि से उनके क्रय व्यवहार एवं “ब्राण्ड चयन व्यवहार (Brand choice


behaviour) पर क्या प्रभाव पड़ता है।


5. क्या वे इस तकनीक में कोई सुधार चाहते हैं? उनके सुझाव क्या हैं?


6. क्या उनकी राय में इस संवर्द्धन विधि से कम्पनी की छवि में कोई सुधार हुआ है?


7. क्या वे चाहते हैं कि कम्पनी को पूरे वर्ष इस विधि या इस प्रकार की विधियों का प्रयोग करते रहना चाहिये।

उपर्युक्त निष्कर्षों के आधार पर संवर्द्धन तकनीक की सफलता का मापन किया जा सकता है।


4. प्रयोगात्मक अथवा बाजार परीक्षण विधि (Experimental or Test market method)- विक्रय संवर्द्धन का मूल्यांकन कुछ लक्षणों जैसे प्रेरणात्मक मूल्य, अवधि, वितरण माध्यम आदि के सम्बन्ध प्रयोग करते हुये भी किया जा सकता है। प्रयोग व अनुसन्धान कार्य के लिए रिसर्च फर्मों की सहायता व सेवाएँ प्राप्त की जा सकती है।


विक्रय संवर्द्धन विधियों के बारे में उपभोक्ताओं के विचार जानने के लिए कुछ 'मनोवैज्ञानिक परीक्षण' (Psychological Tests) भी किये जा सकते हैं।

उदाहरण के लिए उपभोक्ताओं को विशेष विधियों की जानकारी देकर उनके बारे में उनकी प्रतिक्रियाओं का अवलोकन किया जा सकता है। उपभोक्ताओं की अनुकूल व प्रतिकूल भावनाओं को विभिन्न प्रकार के मनोवैज्ञानिक परीक्षणों से ज्ञात करके संवर्द्धन विधियों का मूल्यांकन किया जा सकता है।


कई बार निर्माता विक्रय संवर्द्धन की कोई विधि अपनाने से पूर्व तथा पश्चात् उसका बाजार परीक्षण कर लेते हैं। इस विधि में एक दो बाजार क्षेत्रों का चुनाव करके उनमें एक या अधिक विधियों का पहले कुछ चुने गये शहरों में लागू किया जाता है।

यदि उन विधियों का लाभकारी प्रभाव दिखाई देता है तो उन विधियों को लागू करने का विचार छोड़ दिया जाता है। इस प्रकार इस विधि में सम्पूर्ण योजना को अपनाने के पूर्व उसका बाजार परीक्षण या मूल्यांकन कर लिया जाता है।


5. वित्तीय विधि (finanacial Method)- इस विधि में विक्रय संवर्द्धन प्रयासों का मूल्यांकन उन पर खर्च की गयी धनराशि तथा उनसे प्राप्त अतिरिक्त लाभों के आधार पर किया जाता है। दूसरे शब्दों में, इस विधि में निम्न दो बातों पर ध्यान दिया जाता है।


1. बजट की तुलना में विक्रय संवर्द्धन पर खर्च अधिक हुआ है या कम ?


2. शुद्ध लाभों पर विक्रय संवर्द्धन का क्या प्रभाव पड़ा है? अर्थात शुद्ध लाभों में कमी हुई है या वृद्धि अथवा स्थिर रहे हैं?


6. प्रत्युत्तर विश्लेषण विधि (Response Analysis Method) इस विधि के अन्तर्गत ग्राहकों एवं व्यापारियों के प्रत्युत्तर का विश्लेषण करके विक्रय संवर्द्धन प्रयासों का मूल्यांकन किया जाता है। उपभोक्ताओं की विभिन्न प्रत्युत्तर क्रियाओं के कुछ उदाहरण निम्न प्रकार हैं:


1. उपभोक्त द्वारा छूट हेतु प्रस्तुत कूपनों की संख्या ।


2. इनामी प्रतियोगिता के लिए प्राप्त प्रविष्टियों की संख्या ।


3. कूपनों, खाली पाउचो, डिब्बों, ढक्कनों, विज्ञापनों की कतरनों आदि केक बदले में प्रीमियम प्राप्त


करने वाले ग्राहकों की संख्या ।


4. वितरित नमूनों के प्रत्युत्तर में प्राप्त ग्राहकों के आदेश।


5. किसी विशिष्ट विक्रय संवर्द्धन योजना के प्रतिफल में प्राप्त पूछताछ पत्र अथवा सूचना सामग्री हेतु निवेदना


उपर्युक्त सभी साधनों का अनुपात या प्रतिशत निकाल कर मूल्यांकन किया जाता है। यदि उद्योग में प्रचलित सामान्य प्रतिशत से अधिक प्रत्युत्तर प्राप्त हुये हैं

तो विक्रय संवर्द्धन प्रभावी माना जा सकता है। इस अनुपात में कम होने पर विक्रय प्रयासों पर संदेह किया जाता है।


7. उद्देश्यानुसार मूल्यांकन विधि (Evaluation by objectives) इसके अन्तर्गत विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम का मूल्याकन मापन योग्य उद्देश्यों के सन्दर्भ में किया जाता है। इससे विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम का लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान को मापा जाता है। इस विधि के अन्तर्गत पारस्परिक सहमति से मूल्यांकन के मापदण्डों का निर्धारण किया जाता है। इन मापदण्डों के आधार पर ही विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम का मूल्यांकन किया जाता है।


8. समय अंकन विधि (Overall Rating Method) समग्र अंकन विधि से आशय विक्रय संवर्द्धन प्रयासों का उपर्युक्त सभी विधियों के आधार पर मूल्यांकन करना है। अर्थात् इस विधि के अन्तर्गत विक्रय की मात्रा, उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण, वित्तीय परिणाम, ग्राहकों के प्रत्युत्तर, बाजार परीक्षण आदि सभी को एक साथ ध्यान में रखकर विक्रय प्रयासों का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें प्रत्येक आधार पर अंक प्रदान करके फिर उनका औसत या प्रतिशत निकाल लिया जाता है। यदि तुलनात्मक रूप से संस्था का औसत या प्रतिशत अधिक होता है तो विक्रय संवर्द्धन प्रयासों को सफल माना जाता है। अन्यथा स्थिति में, विक्रय संवर्द्धन के प्रयासों में सुधार किया जा सकता है।