सेबी का उद्देश्य - Objective of SEBI

सेबी का उद्देश्य - Objective of SEBI


सेबी के स्थापना के पीछे निम्नलिखित उद्देश्य हैं आम निवेशकों का हितों की रक्षा करनाः


सेबी की स्थापना के पीछे एक मुख्य कारण यह था की छोटे और आम निवेशकों का हितो की रक्षा हो। कई बार बड़े निवेशक जैसे की बैंक, हाई नेटवर्थ इंडिवीडुअल्स या फिर घरेलू संस्थागत निवेशक बड़ा पैसा बनाने के लिए कई बार गलत रास्ता चुनते है | ऐसे में आम निवेशकों का हित आहत होता है इसको मद्देनज़र रखते हुए सरकार ने सेबी का गठन किया निवेशक सेबी के पास अपनी निवेश से जुड़ी शिकायत ले के भी जा सकते है। पूँजी बाजार को विकसित करना में मदद करना:


किसी भी औद्योगिक क्रिया को सामान्य रूप से चलाने के लिए कंपनियां और उद्योग को पूँजी की जरुरत पड़ती है | पूँजी का इंतज़ाम लोन के रूप में किया जाता है। यह लोन कम अवधि या फिर ज्यादा अवधि के लिए होते है | सेबी का एक काम यह भी है कि पूँजी बाजार को ऐसे विकसित करना जिससे किसी भी कंपनी को आसानी से


लोन या पूँजी मिल जाएं। शेयर बाजार के सभी जरूरी अंगों सुचारु रूप से सेबी के अधीन लानाः


शेयर बाजार को चलने के लिए कई सारे संस्थानों एवं लोगो की जरुरत पड़ती है।

इनमें से प्रमुख हैं कंपनियां, निवेशक, ब्रोकर, दलाल, कंपनियों के निवेशक इतियादी । सेबी की कोशिश होती है की ऐसे संस्थानों को और लोगो को सेबी की नियम के दायरे में लाना ताकि किसी भी निवेशक के हितो की रक्षा हो सके। शेयर बाजार में कोई भी अनैतिक व्यापार या गति-विधि को रोकना


सेबी शेयर बाजार में किसी भी तरह के अनैतिक व्यापार को पता लगता है और अनैतिक व्यापार के रोकथाम के लिए नियम बनता है यदि कोई कंपनी किसी भी गलत गतिविधि में लीन है तो सेबी उसमे में भी हस्तक्षेप करता है