वाणिज्यिक बैंकों की संगठन प्रणालियाँ - Organizational Systems of Commercial Banks

वाणिज्यिक बैंकों की संगठन प्रणालियाँ - Organizational Systems of Commercial Banks


संगठन के दृष्टिकोण से वाणिज्यिक बैंकों को दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है- (1) शाखा बैंकिग तथा (2) इकाई बैंकिग (1) शाखा बैंकिग


शाखा बैंकिंग प्रणाली के अंतर्गत बैंक के एक प्रधान कार्यालय के अतिरिक्त उसकी अनेक शाखाएं देश में फैली होती है और कभी-कभी कुछ शाखाएं देश के बाहर भी होती है। इंग्लैंड, जर्मनी, कनाडा, फ्रान्स, आस्ट्रेलिया आदि देशों में इसी प्रकार की बैंकिग व्यवस्था है। इंग्लैंड के महान पाँच बैंकों - मिडलैंड, लॉयड्स, बर्कलेस, वेस्टमिन्स्टर तथा नेशनल प्राविंशियल की शाखाएँ देश भर में फैली हुई है तथा उन्होंने इंग्लैंड की अधिकांश बैंकिग संस्थाओं पर अपना आधिपत्य स्थापित कर रखा है।

भारत में भी वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं देश भर में फैली हुई है। अमेरिका में शाखा बैंकिग का आरम्भ 1909 में केलीफोर्निया में एक अधिनियम के अंतर्गत हुआ था और इसके पश्चात् इसकी उन्नति हुई है। शाखा बैंकिग प्रणाली के गुण


(क) बड़े पैमाने के व्यवसाय तथा श्रम विभाजन के लाभः एक ही बैंक का विशाल संगठन होने के कारण उसके व्यापार की मात्रा अधिक होती है। अनेक शाखाएँ होने के कारण अधिक मात्रा में जमाराशियां प्राप्त की जा सकती है तथा पूँजी का बड़े पैमाने पर लाभदायक निवेश संभव होता है। कार्य का संचालन करने के लिए ये बैंक ऊँचे वेतन पर योग्य विशेषज्ञ रख सकते हैं। समस्त कार्य का वैज्ञानिक पद्धति से विभाजन कर श्रम विभाजन तथा विशिष्टिकरण का उपयोग संभव होता है।

जिसके फलस्वरूप कम लागत पर अधिक


कार्यक्षमता प्राप्त की जा सकती है। (ख) नकद कोषों में बचतः - शाखा बैंकिंग प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न शाखाओं पर कम मात्रा में नकद कोष रखकर काम चलाया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर एक शाखा से दूसरी शाखा को नकदी का हस्तांतरण किया जा सकता है। शाखाएँ न होने पर बैंक के लिए बडी मात्रा में नकद कोष रखना आवश्यक होता है।


(ग) सस्ती एवं सुगम मुद्रा का प्रेषण इस प्रणाली में कम व्यय पर सुविधापूर्वक मुद्रा का प्रेषण संभव होता है क्योंकि अनेक स्थानों पर शाखाएं होने के कारण एक शाखा से दूसरी शाखा को धन भेजने में न कोई असुविधा होती है

न ही अधिक खर्च होता है। केवल पात्र के द्वारा की प्रेषण हो जाता है। विभिन्न देशों मे ब्याज की दर भी समान बनी रहती है, क्योंकि एक स्थान पर ब्याज अधिक होने से वहाँ अधिक धन आने लगता है और कम होने से पूर्ति कम हो जाती है।


(घ) व्यावसायिक जोखिम का भौतिक वितरणः- बैंक की शाखाएं देश भर में फैली होने के कारण जोखिम का भौगोलिक आधार पर वितरण हो जाता है। देश के विभिन्न भागों में स्थापित अलग-अलग उद्योगों तथा व्यवसायों में बैंक निवेश करता है तथा इससे एक क्षेत्र अथवा व्यवसाय में होने वाली हानि की क्षतिपूर्ति दूसरे क्षेत्र तथा व्यवसाय से प्राप्त लाभ से हो जाती है। यही कारण है कि महान मंदी के काल में इंग्लैंड के बैंक इतने प्रभावित नहीं हुए जितना प्रभाव अमेरिका के इकाई बैंकों पर पड़ा।


(ङ) बैंकिग सेवाओ का विस्तारः- शाखा बैंकिग के द्वारा देश के उन सभी छोटे व बड़े नगरों का जहाँ एक स्वतंत्र बैंक की स्थापना करना संभव नहीं होता है, बैंकिंग सेवाएं प्राप्त हो जाती हैं।


(च) साधनों का कुशल निवेश: ऐसे बैंकों के पास पर्याप्त साधन तथा योग्य कर्मचारियों के होने के कारण बैंक केवल अच्छी प्रतिभूतियों में ही धन का निवेश करते हैं। बैंक को निवेश के लिए विस्तृत क्षेत्र मिलता है और पूँजी उन शाखाओं को भेज दी जाती है जहाँ निवेश से अधिकाधिक लाभ उठाया जा सकता है।

इससे बैंकों के लाभ में वृद्धि के साथ-साथ राष्ट्रीय उत्पादन में भी वृद्धि होती है।


(छ) कर्मचारियों का प्रशिक्षण:- बैंकिंग का विस्तृत क्षेत्र तथा विविध कार्य होने के कारण बैंक कर्मचारियों को सभी प्रकार की बैंकिग व्यवसाय का अनुभव प्राप्त होता है। बैंक अपने कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने का विशेष व्यवस्था करते हैं


(ज) देश की आर्थिक स्थिति का ज्ञानः- देश के सभी भागों से संपर्क होने के कारण इन बैंकों को देश के सभी क्षेत्रों की सही आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त होती रहती है जिससे बैंक की पूँजी का निवेश करने की सुविधा रहती है।