विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम के मूल्यांकन में समस्यायें - Problem in Evaluation of sales promotions

विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम के मूल्यांकन में समस्यायें - Problem in Evaluation of sales promotions


 विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम के मूल्यांकन में अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं। सामान्यत: कुछ प्रमुख समस्यायें निम्नलिखित हैं :


1. परिवर्तनशील उपभोक्ता व्यवहार विक्रय संवर्द्धन से उपभोक्ता विज्ञापन प्रवृत्त ( Advertising prone) होने के बजाय 'सौदा प्रवृत्त' (Deal Prone) हो जाता है। वह प्रीमियम या अन्य लाभ देने वाले सौदे, व्यवहार या क्रय करने में अधिक उत्सुक रहता है। प्रीमियम या अन्य लाभ देने वाले सौदे, व्यवहार या क्रय करने में अधिक उत्सुक रहता है। इससे उपभोक्ता की दीर्घकालीन ब्राण्ड निष्ठा (Brand loyalty) कम हो जाती है। वे अधिक लाभ व प्रोत्साहन के लिए वस्तु की ब्राण्ड बदलते रहते हैं। जिस उत्पाद के सम्बन्ध में विक्रय संवर्द्धन योजना चलायी जाती है, वे उसी उत्पाद को खरीद लेते हैं।


2. अत्यधिक लागत - विक्रय संवर्द्धन मूल्यांकन की योजनाएँ कई ढंग से महँगी सिद्ध होती हैं। इन पर अधिक बजट खर्च होता है। वांछित परिणाम प्राप्त न होने पर इन पर व्यय किया गया धन विपणन लागत में वृद्धि कर देता है। कई बार जब विक्रय संवर्द्धन की योजनाओं के फलस्वरूप गलत उपभोक्ता आकर्षित हो जाते हैं तो कम्पनी को उनका कोई स्थायी लाभ नहीं मिल पाता है। उदाहरणार्थ, जब हमेशा ब्राण्ड बदलने वाले ग्राहक (Always switchers) अथवा कम्पनी के अपने ग्राहक को मुफ्त अनुदान प्राप्त करते हैं, विक्रय संवर्द्धन के फलस्वरूप आकर्षित हो जाते हैं तो इस कार्यक्रम से उचित लाभ न होने के कारण यह खर्चीला सिद्ध होता है।


3. असहयोग की समस्या – कई विक्रय संवर्द्धन मूल्यांकन योजनाओं में फुटकर व्यवसायियों का सहयोग आवश्यक होता है। किन्तु कई फुटकर व्यापारी इन कार्यक्रमों को पसन्द नहीं करते हैं तथा इनसे चिढ़ते हैं। वे अपनी सेवाओं के लिए अतिरिक्त व्यापारिक भत्ता चाहते हैं, अन्यथा विक्रय संवर्द्धन योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग देने से मना कर देते हैं।


विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम में विक्रय दल वितरकों व मध्यस्थों का पूरा-पूरा सहयोग प्राप्त करना भी एक समस्या है।


4. मूल्यांकनकर्ता जिस व्यक्ति को विक्रय संवर्द्धन कार्यक्रम के मूल्यांकन का दायित्व सौंपा जाता है

उसकी प्रवृत्ति, कुशलता, पूर्वाग्रहों व मूल्यों आदि का प्रभाव भी मूल्यांकन पर पड़ता है। इससे परिणाम प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकते है।


5. अवैज्ञानिक विधि-मूल्यांकन की कई विधियाँ अवैज्ञानिक हैं जिनके द्वारा वैध एवं विश्वसनीय परिणाम प्राप्त नहीं किये जा सकते हैं। अत: सही विधि का चयन भी एक समस्या है।


6. मापदण्ड मूल्यांकन के उचित मापदण्डों का निर्धारण करना भी एक कठिन कार्य होता है। जहाँ परिणाम तथ्यों में मापन योग्य नहीं होते हैं वहाँ मापदण्ड तय करना और भी कठिन हो जाता है।