विज्ञापन बजट निर्माण प्रक्रिया - Procedure Of Preparing Advertising Budget
विज्ञापन बजट निर्माण प्रक्रिया - Procedure Of Preparing Advertising Budget
विज्ञापन बजट के निर्माण के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाती हैं।
1. उद्देश्यों का निर्धारण - यद्यपि कि विज्ञापन बजट के निर्माण का मूल उद्देश्य विज्ञापन पर न्यूनतम व्यय करके उत्पाद का समुचित प्रचार करना होता है तदापि विज्ञापन बजट बनाते समय विभिन्न बाजार क्षेत्रों एवं उपभोक्ताओं के सर्वेक्षण द्वारा यह अनुमान लगाया जाता है कि किन क्षेत्रों में अधिक विज्ञापन करना अधिक लाभप्रद होगा तथा उत्पाद के विक्रय के लिए कौन-कौन से नये संभावित विक्रय क्षेत्र हो सकते हैं।
2. बजट निर्माणकर्ताओं की नियुक्ति - बजट निर्माण समिति में मुख्य रूप से विज्ञापन एवं विक्रय-संवर्द्धन विभाग,
विक्रय विभाग तथा प्रशासनिक विभाग के प्रतिनिधियों को सम्मिलित किया जाता है तथा साथ ही इन्हें अन्य विभागों के साथ समन्वय रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए जाते हैं। यदि कंपनी ने अपने विज्ञापन कार्यक्रम के संचालन का उत्तरदायित्व किसी विज्ञापन एजेन्सी को दे रखा है, तब विज्ञापन एजेन्सी के प्रतिनिधि को भी बजट निर्माण समिति में स्थान दिया जाता है।
3. बजट अवधि का निर्धारण बजट निर्माण करते समय यह सुनिश्चित कर लेना आवश्यक होता है कि बजट कितने वर्ष के लिए बनाया जा रहा है। कभी-कभी प्रतिस्पर्धा का सामना करने अथवा नये उत्पाद को बाजार में प्रवेश करने के लिए कम अवधि के लिए व्यापक विज्ञापन कार्यक्रम चलाया जाता है।
4. समंकों का संकलन - समंकों के संकलन से आशय अनुसंधानकर्ताओं, मध्यस्थों की रिपोर्ट को प्राप्त करने तथा पूर्व निर्मित विज्ञापन बजट एवं उनके मूल्यांकन रिपोर्ट को एकत्र करने से लगाया जाता है ताकि इनकी सहायता से आगामी बजट का निरूपण वैज्ञानिक रीति से किया जा सके।
5. बजट प्रारूप का निर्माण उपरोक्त कार्यों के पूर्ण होने के उपरान्त विज्ञापन बजट के प्रारूप का निर्माण किया जाता है जिसे सभी संबंधित पक्ष शीघ्रता एवं सरलता से समझ सके। बजट प्रारूप के साथ बजट बनाने में अपनायी जाने वाली विधि का भी संक्षेप में वर्णन कर दिया जाना चाहिए।
विज्ञापन बजट बनाने की विधियाँ कंपनियों द्वारा विज्ञापन बजट को निर्धारित करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाये जाते हैं जिनके आधार पर एक निश्चित अवधि के लिए विज्ञापन बजट तैयार किए जाते हैं। विज्ञापन के लिए व्यय की जाने वाली राशि के निर्धारण की अनेक विधियाँ है जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं।
1. क्षमतानुसार विधि - इस विधि के अंतर्गत कंपनी विज्ञापन बजट में उतनी ही धनराशि का प्रावधान रखती
है, जितना वह अपनी आय में से विज्ञापन पर खर्च कर सकती है। इसका संबंध कंपनी को होने वाले लाभ और हानि से होता है तथा इसी आधार पर कंपनियों का विज्ञापन कम था ज्यांदा होता रहता है।
इस प्रकार इस विधि के अंतर्गत विज्ञापन बजट का निर्धारण संस्था के सामर्थ्य के अनुसार किया जाता है न कि विज्ञापन कार्यक्रमों की आवश्यकतानुसार 2. विक्रय प्रतिशत विधि इस विधि के अंतर्गत विज्ञापन बजट बनाने का आधार विक्रय होता है। जैसे किसी कंपनी की वार्षिक बिक्री 100 करोड़ रुपये की हुई तथा वह उस बिक्री पर एक प्रतिशत विज्ञापन पर खर्च करना चाहती है तो उसका विज्ञापन बजट 1 करोड़ रुपये निर्धारित होगा।
विक्रय गत वर्ष का हो सकता है या आने वाले वर्ष के विक्रय का अनुमान हो सकता है।
III. प्रति इकाई बिक्री विधि - इस विधि में विज्ञापन बजट का निर्धारण कंपनी द्वारा बेची गयी कुल वस्तुओं की संख्या के आधार पर होता है
जिसमें कंपनी बेची गयी प्रति इकाई पर एक निश्चित राशि विज्ञापन पर व्यय करती है। जैसे- एक स्कूटर बनाने वाली कंपनी द्वारा गत वर्ष में 25,000 स्कूटर बेची गयी तथा कंपनी द्वारा प्रति स्कूटर विज्ञापन व्यंय 200 रुपये निश्चित किया गया है, तो कंपनी का विज्ञापन बजट 50,00,000 रुपये निर्धारित होगा।
IV. लक्ष्य या कार्य विधि इस विधि के अंतर्गत विज्ञापन के उद्देश्य एवं कार्य को आधार मानकर विज्ञापन बजट तैयार किया जाता है। इसके अंतर्गत नये उत्पाद की जानकारी देना, उत्पाद की बिक्री बढ़ाना, कंपनी की ब्राण्ड छवि को बनाना, कंपनी की आर्थिक नीतियों की जानकारी देना, वितरण प्रणाली का निर्धारण करना आदि विशेष लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विज्ञापन बजट तैयार किया जाता है।
उद्देश्यों को निर्धारित करने के पश्चात उसे कार्य रूप देने के लिए इतनी धनराशि का प्रविधान किया जाता है जिससे निश्चित अवधि में प्रस्तावित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
V. प्रतिस्पर्धा समता विधि इस विधि के अंतर्गत विज्ञापन बजट का निर्धारण प्रतिस्पद्धयों के बजट के अनुसार किया जाता है। कोई भी कंपनी अपने प्रतिस्पर्द्धियों की क्रिया-कलापों की अनदेखी नहीं कर सकती। यदि प्रतिस्पद्ध कंपनियाँ विज्ञापन पर अधिक राशि व्यय करती है तो कंपनी को भी विज्ञापन पर अधिक धनराशि व्यय करना आवश्यक हो जाता है। इस विधि का प्रयोग नयी संस्थाओं द्वारा अधिक किया जाता है।
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