उत्पाद स्थितिकरण - Product Positioning
उत्पाद स्थितिकरण - Product Positioning
उत्पाद स्थितीकरण विभिन्न उत्पादों को इस रूप में प्रस्तुत करने से संबंधित है कि ग्राहक उसे प्रतिस्पर्धी
उत्पादों से विशिष्ट या पृथक समझे। इसमें निम्न दो क्रियाएँ सम्मिलित हैं
1) ब्राण्ड की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन 2) सर्वोत्तम वांछित स्थिति का निर्धारण
ब्राण्ड की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन यह दर्शाता है कि ब्राण्ड प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सुस्थापित हो चुका है और उपभोक्ता का आदर्श ब्राण्ड बन 'चुका' है।
सर्वोत्तम वांछित स्थिति का निर्धारण करने हेतु विभिन्न तकनीकों का प्रयोग किया जाता है जिसमें
बहुआयामी पैमाना तथा क्लस्टरंग प्रमुख है। उत्पाद स्थितीकरण में एक बाजार खण्ड की सेवा के संबंध में निम्नलिखित व्यूहरचनाओं का प्रयोग किया जा सकता है
1. बाजार धारण व्यूहरचना (Market Retention Strategy ) - इसके अंतर्गत बाजार भाग को बनाए
रखने हेतु विद्यमान उत्पाद पंक्ति में नये उत्पाद जोड़े जाते हैं। नये
2. बाजार विकास व्यूहरचना (Market Development Strategy ) - इस व्यूहरचना के अंतर्गत बाजार या नये उत्पाद विकसित किए जाते हैं।
3. विकास व्यूहरचना (Growth Strategy) -इसके तहत नये उत्पाद एवं बाजार के साथ अन्य विपणन संबंधी कार्य संपन्न किए जाते हैं।
4. नव साहस व्यूहरचना (New Venture Strategy) - इसमें अन्य साहसी के साथ मिलकर कोई कार्य प्रारंभ किया जाता है, ताकि बाजार भाग को बनाए रखा जा सके। एक फर्म स्थितीकरण हेतु उपरोक्त में से किसी भी व्यूहरचना का अनुसरण कर सकती है या विभिन्न व्यवसायों की दशा में विभिन्न संभावित व्यूहरचनाओं का एक साथ प्रयोग कर सकती है।
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