विक्रय संवर्द्धन एवं विज्ञापन में सम्बन्ध - Relationship between Sales Promotion and Advertising
विक्रय संवर्द्धन एवं विज्ञापन में सम्बन्ध - Relationship between Sales Promotion and Advertising
विक्रय संवर्द्धन एवं विज्ञापन में घनिष्ठ सम्बन्ध है। दोनों का प्रमुख उद्देश्य विक्रय में वृद्धि करना होता है। प्रो. डी. एल. हेग (Pro. D. L. Hague) के अनुसार “विज्ञापन वस्तुओं के सम्बन्ध में हजारों उपभोक्ताओं को शिक्षित करता है और व्यापक विक्रय आधार बनाता है जबकि विक्रय संवर्द्धन का कार्य विक्रय शक्ति (Sales Force) तथा स्वयं के व्यक्तियों को शिक्षित करना है।" इस प्रकार विज्ञापन लोगों को वस्तु के प्रति आकर्षित करता है जबकि विक्रय संवर्द्धन वस्तुओं को लोगों की ओर धकेलता है तथा विक्रय संवर्द्धन एवं विज्ञापन परस्पर सहायता करते हैं। ये एक-दूसरे को प्रभावशाली बनाकर उनके अन्तिम उद्देश्य तक (विक्रय वृद्धि ) पहुँचाने में सहायता करते हैं जो निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट है :
1) विक्रय संवर्द्धन के माध्यम से विज्ञापन प्रतिलिपि में वर्णित सूचनाओं एवं तथ्यों की सत्यता को प्रमाणित किया जा सकता है। इससे निर्माता की विश्वसनीयता बढ़ती है।
2) विक्रय संवर्द्धन योजनाओं के द्वारा उपभोक्ताओं को विज्ञापित वस्तुओं को देखने, प्रयोग करने तथा उसकी किस्म एवं उपयोगिता की जाँच करने का अवसर प्राप्त हो जाता है। जिससे उपभोक्ता के मन में विज्ञापन के प्रति कोई सन्देह नहीं रहता है तथा वह वस्तु को अपनाने हेतु तैयार हो जाता है।
3) विक्रय संवर्द्धन, विज्ञापन द्वारा उत्पन्न की गई इच्छा को प्रभावी माँग में बदल देता है। विज्ञापन के माध्यम से उपभोक्ताओं में वस्तु के प्रति उत्पन्न आकर्षण, उस समय तक प्रभावहीन होता है जब तक कि विक्रेता या मध्यस्थ विक्रय वृद्धि में रुचि न दिखाये। अतः विक्रय संवर्द्धन द्वारा विक्रेता/मध्यस्थों को अत्यधिक विक्रय हेतु प्रोत्साहित किया जा सकता है।
4) विक्रय संवर्द्धन में वितरकों एवं उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रोत्साहन, प्रेरणाएँ एवं सुविधाएँ उपलब्ध कराके विज्ञापन के सन्देश को विक्रय में बदला जा सकता है।
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