विक्रय संवर्द्धन एवं वैयक्तिक विक्रय में सम्बन्ध - Relationship between Sales Promotion and Personal Selling

विक्रय संवर्द्धन एवं वैयक्तिक विक्रय में सम्बन्ध - Relationship between Sales Promotion and Personal Selling


विज्ञापन की भाँति वैयक्तिक विक्रय का भी विक्रय संवर्द्धन से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। फ्रेडरिक ए. एगमोर (Frederic A. Egmore) के अनुसार “विक्रय के दो पहलू होते हैं 1) वैयक्तिक विक्रय तथा 2) अवैयक्तिक विक्रय-विज्ञापन विक्रय संवर्द्धन दोनों से ही सम्बन्धित होता है जो कि विज्ञापन एवं विक्रयकला के बीच की खाई पाटने का प्रयत्न करता है तथा इन दोनों के बीच समन्वय स्थापित करता है ।" "विक्रय सवंर्द्धन वैयक्तिक विक्रय के कार्य में विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान करके इसे प्रभावशाली बनाता है जो अग्रलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट है :


1) विक्रय संवर्द्धन योजनाओं जैसे कूपन, छूट, प्रीमियन, आदि के आकर्षण से ग्राहक स्वयं विक्रेता के पास पहुँच जाता है तथा वस्तु की माँग करने लगता है।

इससे विक्रेता को ग्राहकों को खोजने, समझाने एवं क्रय हेतु उत्प्रेरित करने के झंझट से मुक्ति मिल जाती है।


2) विक्रय संवर्द्धन द्वारा किये गये मुफ्त नमूनों के वितरण, क्रियात्मक प्रदर्शन, गारन्टी आदि से ग्राहक को स्वयं वस्तु को जाँचने का अवसर मिल जाता है, जिससे उसके मन में वस्तु की किस्म एवं उपयोगिता के प्रति विश्वास जम जाता है तथा वह स्वयं ही विक्रेता के समक्ष वस्तु खरीदने हेतु चला जाता है जिससे विक्रेता का कार्य सरल हो जाता है।


3) विभिन्न प्रतियोगिताओं से उपभोक्ताओं में वस्तु एवं संस्था की ख्याति में वृद्धि होती है जिससे वस्तु की प्रभावशाली माँग उत्पन्न हो जाती है। इससे विक्रय कार्य सरल हो जाता है।


4) क्रियात्मक प्रदर्शन एवं निःशुल्क प्रशिक्षण से ग्राहक के मन में वस्तु के प्रति सन्देह दूर हो जाते हैं जिससे


विक्रेता को विक्रय आपत्तियों (Selling objections) का सामना नहीं करना पड़ता है।


5) विक्रय संवर्द्धन नई वस्तु को बाजार में स्थापित करने में विक्रेताओं के लिए सहायक सिद्ध होता है। 6) मेले, प्रदर्शनियों, सजावट आदि के समय ग्राहकों की रुचियों, दृष्टिकोणों एवं क्रय समस्याओं की जानकारी हो जाती है, जिससे विक्रेताओं को अपनी विक्रय प्रस्तुति एवं विक्रयवार्ता को प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।


7) अत्यधिक प्रतिस्पर्धी, ग्राहक का नया होना, समूह में बिक्री करना आदि दशाओं में विक्रय संवर्द्धन वैयक्तिक विक्रय का महत्वपूर्ण उपकरण है।


उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि विक्रय संवर्द्धन एवं वैयक्तिक विक्रय परस्पर सहयोगी कार्य हैं। जिस प्रकार विक्रय संवर्द्धन विक्रताओं के कार्य में सहायक होता है, उसी प्रकार विक्रेता भी विक्रय की पहल शक्ति, कल्पना, निर्णय क्षमता, विचारशीलता, वाकपटुता आदि गुणों के द्वारा ही विक्रय संवर्द्धन की अनेक योजनाएँ, जैसे प्रीमियम वितरण, क्रियात्मक प्रदर्शन, प्रशिक्षण, सजावट व प्रदर्शन, मरम्मत सुविधाएँ आदि सफलतापूर्वक संचालित की जा सकती हैं। यहाँ तक कि इन योजनाओं के निर्माण में भी विक्रेताओं के सुझाव, विचार उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं, क्योंकि वे ग्राहकों की रुचियों, पसन्द, आपित्तयों, शंकाओं आदि से भली-भाँति परिचित होते हैं। उन्हें ग्राहकों की आदतों, प्रकृति, अभिवृत्तियों, आचरण एवं व्यवहार आदि का भी अच्छा ज्ञान होता है। वे ग्राहकों के बारे में ठोस निर्णय ले सकते हैं। अतः विक्रय शक्ति के बिना विक्रय संवर्द्धन की योजनाओं के श्रेष्ठ निर्माण व प्रभावी क्रियान्वयन की कल्पना करना भी व्यर्थ है। इस प्रकार ये एक-दूसरे व पूरक की सहायक क्रियाएँ हैं तथा विक्रय संवर्द्धन एवं वैयक्तिक विक्रय में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।