विशेष आहरण अधिकारी (एस डी आर) - Special Drawing Officer (SDR)

विशेष आहरण अधिकारी (एस डी आर) - Special Drawing Officer (SDR)


ब्रेटनवुड्स में कायम मौद्रिक व्यवस्था ने विश्व व्यापार के तीव्र प्रसार में एक सकारात्मक भूमिका निभाई। मगर इसके प्रमुख दोषों में एक दोष यह था कि प्रसार मान व्यापार को सहारा देने के लिए आवश्यक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा भंडार की आपूर्ति बढ़ाने का इसमें कोई प्रावधान नहीं था। इससे अंततः राष्ट्रीय मुद्राओं के भंडार की आपूर्ति बढ़े खासकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में अमरीकी डालर की स्थिति मजबूत हुई। अमरीकी डालर नई मुद्रा व्यवस्था की आरक्षित परिसंपत्ति बन गए। लेकिन विश्व व्यापार के प्रसार के साथ अंतरराष्ट्रीय तरलता की आवश्यकता भी बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा की यह आवश्यकता पूरी करने के लिए इस व्यवस्था में डरों की आपूर्ति के लिए अमरीका के भुगतान संतुलन में घाटे का जारी रहना आवश्यक था।

सन साठ दशक के अंतिम वर्षों में अंतरराष्ट्रीय तरलता की यह कमी अपनी चरम पर पहुँच गयी। 1969 में विशेष आहरण अधिकार (स्पेशल ड्राइंग राइट्स) के नाम से एक नई अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्तिजारी करके मुद्रा कोष ने इस समस्या का सामना किया।


एस डी आर मूलतः डालरों की एक निश्चित संख्या के बराबर था। आज यह अमीरीकी डालर, जर्मन मार्क, जापान के येन, फ्रांस के फ्रांक और ब्रिटेन के पाउंड स्टर्लिंग जैसी विभिन्न मुद्राओं की टोकर' है। 1969 में सदस्य देशों को ये एस डी आर वैसे ही आवंटित किए गए जैसे एक कंपनी के शेयर धारकों को बोनस जारी किए जाते है।


वित्त व्यवस्था की योजनाएँ: भुगतान संतुलन में घाटा झेल रहे सदस्य देशों को वित्तीय सहायता देना मुद्रा कोष के उद्देश्यों में एक है। आई एम एफ से निकासी (आहरण, ड्राइंग) इस वित्त व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। इस योजना में जब भी सदस्य एक देश को अपने भुगतान संतुलन संबंधी अल्पकालिक घाटे पर काबू पाने के लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है, वह मुद्रा कोष से अपनी मुद्रा देकर आवश्यक विदेशी मुद्रा ले लेता है। इसे कोश से 'आहरण' कहते हैं। आहरणकर्ता देश की भुगतान संतुलन की स्थिति जब सुधर जाती है तो वह अपनी मुद्रा की पुनर्खरीद कर विदेशी मुद्रा लौटा देता है। सामान्यतः एक देश 12 माह की अवधि में अपने कोटा के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं निकाल सकता।

एक सदस्य का समग्र आहरण उस स्तर तक पहुँच सकता है जहाँ आई एम एफ में उस देश की मुद्रा का भंडार उसके कोटा का 200 प्रतिशत हो जाए। उदाहरण के लिए मान ले कि देश 'अ' का कोटा 100 एस टी आर है जिसमें वह 75 प्रतिशत अपनी ही मुद्रा में देता है, अर्थात् देश 'अ' ने अपनी मुद्रा में 75 एस डी आर के बराबर योगदार दिया है। देश 'अ' अधिकतम 125 एस डी आर का ऋण ले सकता है जिससे उसकी कुल मुद्रा 200 एस डी आर हो जाती है जो उसके कोटे का 200 प्रतिशत है। लेकिन विशेष दशाओं में यह शर्त समाप्त भी की जा सकती हैं।


एक सदस्य देश द्वारा कोष से आहरण की प्रक्रिया चरणों या किस्तों (ट्रैचेज) में विभाजित होती है। जिस आहरण के बाद कोष में संबद्ध देश का भंडार उसके कोटा का 100 प्रतिशत हो जाए, आरक्षित किस्त' कहलाता है।

इस आरक्षित किस्त से आगे कोई भी निकासी चार बराबर किस्तों में विभाजित की जाती है जिन्हें ऋण की किस्तें' कहते हैं। कोई देश अपनी आरक्षित किस्त से मुक्त भाव से निकासीकर सकता है, पर ऋण की किस्तों से निकासी आई एफ द्वारा अधिकाधिक छानबीन के बाद ही संभव है।


मुद्रा कोष की वित्तीय सहायता की कुछ और योजनाएँ भी हैं। कुछेक योजनाएँ इस प्रकार हैं:


अ) कामचलाऊ (स्टैंडबाई) व्यवस्थाएँ इस व्यवस्था में एक सदस्य को एक निश्चित सीमा तक और निश्चित कालखंड में मुद्रा कोष से आहरण की अनुमति है।

यह सुविधा कोष और सदस्य देश के बीच आपसी वार्ता से मिलती है। यह व्यापारिक बैंकों द्वारा दी जाने वाली ओवर ड्राफ्ट सुविध जैसी है।


ब) ढाँचागत समायोजन सुविधा: इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से भुगतान संतुलन की समस्या झेल रहे सदस्य देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है जिनका उद्देश्य संवृद्धि को बढ़ावा देना तथा भुगतान संतुलन की स्थिति को मजबूत बनाना होता है। ये ऋण सदस्य देश के कोटे के अनुपात में होते हैं। सामान्यतः ये ऋण तीन वर्षकी अवधि में वितरित किए जाते हैं और इस बीच ऋण लेने वाले देश को ढाँचागत समायोजन (स्ट्रक्चरल एटजस्टमेंट) सुनिश्चित करने के लिए तीन वर्षीय व्यापक रणनीति तैयार होती है।


स) परिवर्धित (एनहांस्ड) ढाँचागत समायोजन सुविधा: यह योजना ढाँचागत समायोजन सुविधा से मिलती-जुलती है पर विशेष रूप से निर्धनतम सदस्य देशों के लिए है जो एक जोरदार तीन वर्षीय समष्टिगत आर्थिक और ढाँचागत कार्यक्रम चला रहे हैं।


द) विस्तरित निधि सुविधा: विस्तारित निधि (एक्सटेंडेड फंड) की सुविधा का उद्देश्य सामान्य आहरण कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध धन से अधिक मात्रा में और अधिक लंबे समय से भुगतान संतुलन के घाटे झेल रहे सदस्य देशों की सहायता करना है। यह सुविधा उत्पादन व्यापार और मूल्यों में ढाँचागत असंतुलन के कारण भुगतान संतुलन की गंभीर समस्याएँ झेल रहे देशों के लिए है।