संगठनात्मक वृद्धि की अवस्थाये एव व्यूह रचना - Stages of organizational growth and strategy formation
संगठनात्मक वृद्धि की अवस्थाये एव व्यूह रचना - Stages of organizational growth and strategy formation
संगठनात्मक वृद्धि की विभिन्न अवस्थाये एव व्यूह रचना के मद्देनजर स्पष्ट रूप में अभिव्यक्त किया ज सकता है। इसके संगठन के उदभव की निन्म चार शैलियों में स्पष्ट किया है।
१) प्रारंभिक विस्तार एव ससधानों का संग्रह
२) संशाधनो के उपयोग में विवेकीकरण
३) नए उत्पाद एव व्यवसाय रेखा में विस्तर, तथा
४) अल्पकालीन तथा दीर्घकालीन बाजार आवश्यकताओ को पूरा करने के लिए संशाधन के प्रभावी उपयोग एव गतिशील हेतु नए संगठन ढाचे का विकास करना ।
व्यूह रचना तथा संरचना के अंत: सबंधो को बतलाते हुए कौनन ने अपने शोध कार्य पर बतलाया है की संगठन की विकास अवस्थाओं के अनुसार व्यूह रचना को अपनाया जाता है। यह विकास एकाकी उत्पाद कपानी की विशिष्ठ कृत कार्यात्मक कम्पनी में तथा बाद में बहुल उत्पाद विविधिकरण युक्त कंपनी में होता है। अंत में विकाश के साथ साथ सरचानात्मक प्रारूपो में निरंतर सुधर होता रहता है । जो सरल से जटिल प्रारूप की और बढ़ाते जाता है।
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