इकाई बैंकिग प्रणाली में सुधार - Unit Banking System Reforms
इकाई बैंकिग प्रणाली में सुधार - Unit Banking System Reforms
इकाई बैंकिग के विभिन्न दोषों को दूर करने के लिए अमेरिका में निम्नलिखित प्रयास किए गए हैं। (1) श्रृंखलाकारी तथा समूह बैंकिग का विकासः - वर्तमान शताब्दी में अमेरिका में श्रृंखलाकारी
बैंकिग तथा समूह बैंकिंग प्रणालियों के विकास की ओर ध्यान दिया गया है। श्रृंखलाकारी बैंकिग के अंतर्गत दो अथवा अधिक बैंकों पर एक ही व्यक्ति अथवा वर्ग का प्रभुत्व होता है। समूह बैंकिंग प्रणाली के अंतर्गत दो अथवा अधिक बैंकों का प्रमण्डल अथवा ट्रस्ट द्वारा होता है। इन प्रणालियों मे शाखा तथा इकाई बैंकिंग प्रणालियों के लाभ विद्यमान होते हैं क्योंकि प्रत्येक बैंक अलग-अलग होने पर भी स्वामित्व की एकता के कारण इनमें परस्पर संबंध स्थापित हो जाते हैं।
1930 ई. में महान् मंदी के पूर्व इन प्रणालियों का तेजी से विकास हो रहा था तथा इनके सदस्य बैंकों की संख्या निरंतर बढ़ रही थी। मंदी काल में अनेक श्रृंखला कंपनियों तथा बैंकिंग समूहों के विफल होने के कारण बाद के वर्षों में इनका धीरे-धीरे पतन होता रहा है।
(2) सीमित क्षेत्र में शाखाओं का विस्तारः- कुछ बैंकों को सीमित क्षेत्र के भीतर शाखाएं खोलने का अधिकार दिया गया है। परिणामस्वरूप शाखाओं वाले बैंकों की संख्या तथा उनकी शाखाओं की कुल संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है।
(3) कॉरेसपोण्डेण्ट बैंकों की स्थापनाः- ये बैंक बड़े नगरों में होते हैं और इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में तथा छोटे बैंक अपने खाते खोलते हैं और नकद कोष जमा कराते हैं। इन सामान्य बैंकों के बीच रकम का लेन-देन आसान हो जाता है। ये बड़े बैंक छोटे बैंकों के फालतू धन को उपयोगी कार्यों में लगाते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर ऋण देकर उनकी आर्थिक सहायता भी करते हैं। ये छोटे बैंकों को व्यावसायिक मामलों पर परामर्श भी देते हैं। उपर्युक्त सुधारों के परिणामस्वरूप इकाई प्रणाली वाले बैंकों को भी शाखा प्रणाली के कुछ गुण प्राप्त हो जाते हैं।
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