पूँजी की लागत का वर्गीकरण - Classification of Cost of Capital
पूँजी की लागत का वर्गीकरण - Classification of Cost of Capital
पूँजी की लागत का वर्गीकरण एक तकनीकी समस्या है, मुख्य तौर पर लागत को निम्न प्रकार वर्गीकृत कर सकते हैं-
1. पारम्परिक लागत एवं भावी लागत पारम्परिक लागत वह लागत होती है जिस पर भूतकालीन लेखांकन व्यवस्था में लेखों को लिपिबद्ध किया जाता है। भावी लागत वह लागत होती है जिसका पूर्वानुमान भविष्य के वर्षों के लिए किया जाता है।
2. विशिष्ट लागत एवं संयुक्त लागत पूँजी के विभिन्न उपलब्ध वित्तीय स्रोतों को पृथक रूप से - विशिष्ट लागत कहा जाता है जैसे समता अंशपूँजी, पूर्वाधिकारी अंश पूँजी एवं ऋण पत्रादि संयुक्त लागत संगठन में विनियोजित समग्र पूँजी की संयुक्त लागत होती है, इसके अन्तर्गत समस्त पूँजी लागत को सम्मिलित किया जाता है। संयुक्त लागत को सम्पूर्ण पूँजी साधनों की औसत पूँजी लागत होने के कारण भारित लागत भी कहा जाता है। पूँजी व्यय सम्बन्धी निर्णयन में भारित लागत का महत्वपूर्ण स्थान होता है।
3. औसत लागत तथा सीमान्त लागत संगठन में विनियोजित समस्त प्रकार की पूँजी में प्रत्येक स्रोत की लागत का भारित औसत, औसत लागत कहलाती है। संगठन की पूँजी संरचना में प्रत्येक स्रोत का अनुपात भार होता है उसी के आधार पर औसत लागत की गणना की जाती है। सीमान्त लागत वह लागत होती है जिसे संगठन द्वारा नये कोषों के माध्यम से जुटाया जाता है। यह नवीन कोषों से एकत्रित पूँजी की औसत लागत होती है, विनियोग सम्बन्धी निर्णयन में सीमान्त लागत का महत्वपूर्ण स्थान होता है।
4. स्पष्ट लागत एवं अवसर लागत - स्पश्ट लागत उस छूट की दर को कहते हैं जो रोकड़ आगमनों के वर्तमान मूल्य को रोकड़ निर्गमन (Cash outflows) के वर्तमान मूल्य को समतुल्य करती है। व्यावहारिक तौर पर यह आन्तरिक प्रत्याय दर (Internal rate of return) होती है।
अवसर लागत वह प्रत्याय दर होती है जो किसी विशिष्ट विनियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने हेतु परित्यक्त अवसरों की लागत होती है इस लागत का आविर्भाव तब होता है जब संस्था कमाए गये कोषों के वैकल्पिक प्रयोग पर विचार करती है।
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