कम्पनी के प्रकार - Company type

कम्पनी के प्रकार - Company type


कम्पनियां अनके प्रकार की होती है जिसका अध्ययन किया जा सकता।


(1) विधान के अनुसार- विधान की दृष्टि से कंपनी के तीन प्रकार हैं-


> चार्टर कम्पनी इनकी स्थापना करने के लिये सरकार द्वारा विशेष आज्ञा जारी की जाती हैं। ये कम्पनियाँ विशेष अधिकार का प्रयोग करने के लिये स्थापित की जाती हैं। पूर्व में भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी थी अब इस प्रकार की कोई कंपनी भारत में नहीं हैं।


> विशेष विधान द्वारा निर्मित कम्पनियाँ- ऐसी कम्पनियां जो संसदमें विशेष अधिनियम पास करके बनायी जाती हैं

विशेष विधान द्वारा निर्मित कम्पनियाँ कहलाती है। जैसे- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम आदि।


> कम्पनी अधिनियम द्वारा निर्मित कम्पनियाँ ऐसी कम्पनियां जिनका निर्माण कम्पनी अधिनियम 1956 के अधीन अथवा उसके पूर्व के वर्षों के कम्पनी अधिनियम के अंतर्गत हुआ हो, कम्पनी अधिनियम के अधीन निर्मित कम्पनियां कहलाती है।, जैसे- टाटा, टेल्को रिलायंस आदि।


(2) दायित्व के अनुसार-


दायित्व के अनुसार कम्पनियां दो प्रकार की होती हैं-


I. सीमित कंपनी-सीमित कम्पनियों में सदस्यों का दायित्व उनके द्वारा क्रय किये गये अंशों की राशि तक सीमित रहती है तथा ऐसी कम्पनियों को अपने नाम के साथ लिमिटेड शब्द का प्रयोग करना अनिवार्य होता हैं। ये कम्पनियाँ दो प्रकार की होती है-


> अंशो द्वारा सीमित ऐसी कंपनी में अंशधारी का दायित्व उनके द्वारा क्रय किये गये अंशों की राशि तक सीमित होता हैं। यदि अंशधारी ने अंश का पूरा मूल्य नहीं चुकाया हैं तो उसका दायित्व अदत्त राशि तक ही रहता हैं।


> गारंटी द्वारा सीमित कम्पनियां उत्तरदायित्वों- गारंटी द्वारा सीमित कम्पनी की दशा में अंशधारी कम्पनी को यह गारंटी देते हैं

कि यदि उनके अंशधारी रहते समय अथवा सदस्यता त्यागने के 1 वर्ष के अंदर अगर कंपनी दीवालिया हो जाती हैं तो वे एक निर्धारित


सीमा तक दायित्वों का भुगतान व्यक्तिगत रूप से करेंगे। ऐसी कम्पनी गारंटी द्वारा सीमित कम्पनी कहलाती है।


II. असीमित दायित्व वाली कम्पनी ऐसी कम्पनियां जिनके अंशधारियों का दायित्व असीमित होता हैं, असीमित दायित्व वाली कम्पनियां कहलाती हैं। इसमें अंशधारी साझेदारी की भांउत्तरदायित्वोंति व्यक्तिगत रूप से ऋण को चुकाने के लिये उत्तरदायी होते हैं। वर्तमान में इन कंपनियों का प्रचलन नहीं है।


(3) स्वामित्व के अनुसार-


स्वामित्व के अनुसार कम्पनिया दो प्रकार की होती है -


> सरकारी कम्पनी कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार सरकारी कम्पनी से आशय उस कम्पनी से होता है जिसके 51 प्रतिशत या उससे अधिक अंश सरकार के पास होते है। ऐसी कम्पनियों को कानून की बहुत सी धाराओं का पालन करना पड़ता हैं। इन कम्पनिया उत्तरदायित्वों का दायित्व सीमित होता है। कम्पनियाँ सार्वजनिक व निजी दोनो तरह की हो सकती है।


> सार्वजनिक कम्पनी- भारतीय कम्पनी अधिनियम में सार्वजनिक कम्पनी की विस्तृत परिभाषा नहीं दी गई है।

कंपनी अधिनियम के अनुसार ऐसी कंपनी जो निजी कंमपनी नही उत्तरदायित्वों हैं। सार्वजनिक कम्पनी कहलाती है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि सार्वजनिक कम्पनी वह है-


1. जिसमें न्यूनतम सात सदस्य होते है।


2. सदस्य की अधिकतम संख्या अंशों की संख्या के बराबर होती है।


3. जिसके अंशों के हस्तांतरण पर कोई प्रतिबंध नहीं होता।


4. जो अपने अंश क्रय करने जनता को आमंत्रित करती है तथा जिसे अपने वार्षिक लेखे प्रकाशित करना आवश्यक होता है।


(4) राष्ट्रीयता के अनुसार-


राष्ट्रीयता के अनुसार कंपनी दो प्रकार की होती है-


> सूत्रधारी कंपनी- सूत्रधारी कंपनी वह होती हैं, जिसका किसी दूसरी कंपनी पर नियंत्रण होता हैं। सूत्रधारी कंपनी को दूसरी कंपनी के नियंत्रण का आधार तब प्राप्त होता हैं जब वह उन कम्पनियों के आधे से अधिक अंशो का स्वामित्व प्राप्त कर लेती हैं।


> सहायक कंपनी - सूत्रधारी कंपनी के नियंत्रण में कार्य करने वाली कम्पनी सहायक कम्पनी कहलाती हैं।