पूंजी की लागत का महत्व - importance of cost of capital

पूंजी की लागत का महत्व - importance of cost of capital


परंपरागत विचारधारा के अन्तर्गत वित्तीय प्रबन्धन के क्षेत्र में पूँजी की लागत अवधारणा को कोई महत्व नहीं दिया गया है क्योंकि इस अवधारणा में कोषों के संग्रहण पर अधिक बल दिया गया न कि कोषों के समुचित उपयोग परा किन्तु आधुनिक विचारधारा पूँजी की लागत अवधारणा को अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान देती है।


वर्तमान वैष्वीकरण (Globalisation) एवं मुक्तिकरण (Liberalisation) के परिवेष में विश्व समुदाय के साथ प्रतिस्पर्धा हेतु यह आवश्यक हो जाता है कि पूंजी की लागत अवधारणा को मात्र सैद्धान्तिक अध्ययन हेतु स्वीकार न करके अपितु व्यावहारिक धरातल पर लागत नियंत्रण लाभ अधिकतमीकरण एवं धन अधिकतमीकरण हेतु प्रयोग में लाया जाय। पूंजी की लागत अवधारणा की सार्थकता का विवेचन निम्नलिखित किया गया है-


1. पूंजी व्यय सम्बन्धी निर्णयन में सहायक-


पूंजी व्यय सम्बन्धी निर्णयन में पूंजी की लागत अवधारणा महत्वपूर्ण होती है। वस्तुतः किसी भी विनियोग प्रस्ताव की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति का आधार विनियोग की लागत होती है। वस्तुतः विनियोग की प्रत्याषित आय एवं पूंजी की लागत के मध्य अन्तर्सम्बन्ध होता है। यदि विनियोग से प्रत्याषित आय का वर्तमान मूल्य विनियोग की लागत (पूंजी की लागत) के समतुल्य अथवा अधिक हो तो वह विनियोग प्रस्ताव स्वीकार्य होगा, किन्तु यदि विनियोग से प्रत्याषित आय का वर्तमान मूल्य विनियोग की लागत से कम हो तो वह विनियोग प्रस्ताव अस्वीकार्य होगा।


2. वित्तीय निर्णयन में सहायक


संगठन के अन्तगर्त प्रबन्धकों को अनेक प्रकार की वित्तीय निर्णयन लेने होते हैं

जैसे लाभांश निर्णयन, कार्यषील पूँजी नीति सम्बन्धी निर्णयन, लाभों के पुर्नविनियोग सम्बन्धी निर्णयन आदि प्रबन्ध द्वारा इन बिन्दुओं पर निर्णय लेने से पूर्व पूंजी की लागत को ध्यान में रखा जाता है।


3. सगंठन हेतु पूंजी सरचंना का निर्धारण-


वस्तु : विभिन्न सारेतों से प्राप्य पूंजी की मात्रा का निर्धारण संगठन की अनुकूलतम पूंजी संरचना हेतु आवश्यक होता है। विभिन्न विकल्पों में से अनुकूल विकल्प के चयन का आधार मात्र पूंजी की लागत होती है। अपेक्षाकृत कम लागत वाली पूंजी का चयन संगठन के हित में होता है।


4. पूंजी मिलान का निर्धारण-


पूंजी मिलान दर वह दर है जिसके माध्यम से बाजार में उपलब्ध विभिन्न विनियोग विकल्पों के आर्थिक मूल्य का मूल्यांकन सहजता से किया जा सकता है। पूंजी मिलान दर का निर्धारण करने हेतु पूंजी की लागत का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। अनुकूलतम पूंजी ढाँचे के निर्धारण हेतु वित्तीय प्रबन्धक को पूंजी की लागत को न्यूनतम करने एवं संगठन की प्रत्याय दर को अधिकतम करने हेतु प्रभावी कदम उठाने चाहिये।