पूंजी की लागत का अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and Definition of Cost of Capital

पूंजी की लागत का अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and Definition of Cost of Capital

सामान्य तौर पर पूँजी की लागत का अभिप्राय संगठन के अन्तर्गत उपयोग की जाने वाली बाह्य पूँजी के उपयोग के बदले किये जाने वाले भुगतान से है। वस्तुतः पूँजी की लागत अवधारणा गत्यात्मक (Dynamic) है न कि स्थैतिक (Static)। इसका प्रयोग बहुआयामी अर्थों में किया जाता है। “पूंजी की लागत वह न्यूनतम दर होती है जिसे अर्जित करना संगठन के लिए अत्यन्त आवश्यक होता है। इस लागत को उपार्जित पूँजी की शुद्ध राशि के प्रतिशत के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है"।


सोलोमन इजरा के शब्दों में पूंजी की लागत पूंजी व्ययों के लिए अर्जित वांछित दर होती है।


जे0 जे0 हेम्पटन के शब्दों में 'पूंजी की लागत, उस प्रत्याय दर को कहा जाता है जिसे किसी निवेश पर फर्म इसलिए प्राप्त करना चाहते है, जिससे बाजार में उस फर्म के मूल्य में वृद्धि हो सकें "।


एम. जे गोर्डेन के शब्दों में पूंजी की लागत का अभिपाय उस प्रत्याय दर से है जिसे कम्पनी को अपना मूल्य अपरिवर्तित रखने हेतु अर्जित करना आवश्यक होता है।”


उपरोक्त परिभाशाओं के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि पूँजी की लागत वह दर होती है


जिस पर संगठन को विनियोजकों के लिए भुगतान करना वाध्यकारी होता है। अतः संगठन का उद्देश्य पूँजी की लागत के समतुल्य प्रत्याय दर (Rate of return) प्राप्त करना होना चाहिये। न्यूनतम प्रत्याय दर के लक्ष्य को प्राप्त करके ही अंशों के बाजार मूल्य को उनके वर्तमान स्तर पर बनायें रखा जा सकता है। पूँजी की लागत की गणना निम्न सूत्र द्वारा की जा सकती है।


पूँजी की लागत (Cost of capital) =


देय ब्याज या लाभांश (Payable Interest or dividend) x 100


प्राप्त पूंजी Received Capital


उदाहरण स्वरूप यदि किसी संगठन की कुल पूँजी रू. 500000 हो तथा संगठन द्वारा रू. 40000 ब्याज के रूप में भुगतान किया जाता है तो पूँजी की लागत होगी-


40,000 - x 100 = 8%