पूंजी की लागत का मापन - measurement of cost of capital

पूंजी की लागत का मापन - measurement of cost of capital


सामान्य तौर पर किसी कम्पनी की पूँजी लागत मापन हेतु कोई निर्धारित कार्यविधि नहीं है। संगठन की आवश्यकताओं, नीतियों एवं परिस्थितियों के अनुसार पूँजी की लागत का पूर्वानुमान लगाया जाता है। संगठन के लिए पूँजी एकत्रीकरण के विभिन्न साधनों की पूँजी लागत प्रायः भिन्न-भिन्न होती है। जिसकी गणना निम्न प्रकार की जा सकती है।


1. ऋण पूंजी की लागत (Cost of Debentures)


वस्तुतः ऋण पूँजी संगठन की वह पूँजी होती है जो संगठन के अन्तर्गत ऋणों के रूप में आती है ऋण पूँजी की लागत वह ब्याज दर होती है जो कि संगठन द्वारा ऋणदाताओं को देय होती है

वस्तुत: यह दर कम्पनी द्वारा ऋण पूंजी के निर्गमन काल में तय की दी जाती है। ऋण पूंजी की लागत ज्ञात करने हेतु ऋण पत्रों के निर्गमन पर होने वाले व्ययों जैसे विज्ञापन, छपाई, कमीषन, इत्यादि व्ययों को समायोजित करते हुए निर्गमन से प्राप्त शुद्ध राशि का आंकलन किया जाता है। शोधन काल के आधार पर ऋण पूंजी को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है।


(a) सतत ऋण पूंजी की लागत सतत ऋण पूँजी वह पूँजी होती हैं जिसका शोधन (भुगतान) - प्रायः कम्पनी के जीवन काल में नहीं करना पड़ता। किसी भी उपक्रम द्वारा संगठन में ऋण पूँजी के अनुपात को स्थिर बनाये रखने हेतु सतत ऋण पूँजी का निर्गमन किया जाता है। सतत ऋण पूंजी का शोधन कम्पनी के जीवन काल में किये जाने की बाध्यता न होने के कारण इसे अशोधनीय ऋण पूँजी (Non Reedemable) भी कहा जाता है। इसकी गणना निम्न प्रयोग द्वारा की जाती हैं। सूत्र के


CDBT - - x 100


कर पूर्व ऋण की लागत (Cost of Debt before tax)


I = वार्षिक ब्याज दर (Amount of Annual Interest)


P= मूलधन (Principal Amount )


उक्त मूल्य का प्रयोग ऋण पूँजी का निर्गमन सममूल्य पर किये जाने की स्थिति में ही किया जाता है। ऋण पूँजी की निर्गमन प्रीमियम अथवा छूट पर किये जाने की दशा में निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है।


NP x 100


NP= जारी किए गए ऋणों से शुद्ध बिक्री (Net sales proceeds from the issued debts )



वस्तुतः शुद्ध राशि (NP) कम्पनी द्वारा प्राप्त ऋण पूँजी की वास्तविक धनराशि होती है।


b) शोधनीय ऋणपूंजी की लागत- शोधनीय ऋण वे ऋण होते हैं जिनका भुगतान पूर्व निर्धारित अवधि के उपरांत संगठन द्वारा ऋणपत्र धारक को करना पड़ता है। शोधनीय ऋणों की पूँजी लागत ज्ञात करने हेतु देय ब्याज के साथ-साथ शोधन के समय चुकाये जाने वाले मूलधन पर भी ध्यान देना होता है। शोधनीय ऋणों का भुगतान देय तिथि पर एक मुश्त रकम देने की दशा में ऋणपूँजी की लागत का आगणन निम्नलिखित सूत्र के माध्यम से किया जाता है।


C = I+1/n(Rv-NP) 1/2(Rv-NP) x 100


Here, Car = कर पूर्व ऋण की लागत (Cost of Debt before tax)


1= वार्षिक ब्याज दर (Amount of Annual Interest )


Rv परिपक्वता समय पर ऋण का सम्मानजनक मूल्य (Redeemable value of debt at maturity


time)


N.P. = जारी किए गए ऋणों से शुद्ध बिक्री (Net sales proceeds from the issued debts)


IN परिपक्वता समय (Maturity period)


पश्चात ऋण पूँजी की लागत का आगणन करने हेतु निम्नलिखित सूत्र प्रयोग में लाया जाता है।


CDAT = (I-T) CDBT


2. पूर्वाधिकार अंश पूंजी की लागत (Cost of Preference shares)


पूर्वाधिकार अंश वे है जिन पर लाभांश की एक निश्चित, पूर्व निर्धारित दर होती है। साथ ही कम्पनी के समापन पर पूर्वाधिकारी अंशधारकों को पूँजी की वापसी में वरीयता प्राप्त होती है। लाभांशकी देयता का निर्धारण निदेशक मण्डल सभा में निदेशक मण्डल द्वारा किया जाता है।


संचयी पूर्वाधिकार अंशधारकों को लाभांश का भुगतान स्थगित करने पर आगामी वर्शो में होने वाले लाभों में से भुगतान करना आवश्यक होता है। किन्तु असंचयी पूर्वाश्चिकार अंशों की दशा में कम्पनी का लाभ कम होने पर उसे भुगतान के दायित्व से मुक्ति मिल सकती है। पूर्वाधिकारी अंश पूंजी की लागत का निर्धारण अंशोंपर देय लाभांश में प्रति अंश प्राप्त शुद्ध मूल्य राशि का विभाजन करके 100 से गुणा करने के उपरान्त प्रतिशत के रूप में किया जा सकता है।


DP Cp x 100 NP


Cp= पूर्वाधिकार अंश पूंजी की लागत (Cost of Preference Share capital)


D.P. पूर्वाधिकार अंश लाभांश (Preference share dividend)


= N.P. शुद्ध राशि (Net Proceeds) =


व्यावहारिक तौर पर पूर्वाधिकार अंशों का निर्गमन प्रीमियम अथवा छूट पर किया जा सकता है। इन अंशों के निर्गमन पर होने वाले व्ययों को निर्गमन की लागत में सम्मिलित किया जाता है। पूर्वाधिकारी अंशों के सममूल्य को आवश्यकतानुसार निम्न सूत्रों के माध्यम से समायोजित करके शुद्ध राशि (Net Proceeds) ज्ञात की जा सकती है।


1. पूर्वाधिकार अंशों का निर्गमन सममूल्य पर होने की दशा में प्राप्त शुद्ध राशि (NP)= सममूल्य


(NV) & निर्गमन व्यय (IE)


2. पूर्वाधिकार अंशों का निर्गमन छूट पर होने की दशा में प्राप्त शुद्ध राशि NP सममूल्य (NV)-


छूट (D) - निर्गमन व्यय (IE)


3. पूर्वाधिकार अंशों का निर्गमन प्रीमियम पर होने की दशा में प्राप्त शुद्ध राशि (NP) सममूल्य


(PV) $ प्रीमियम (P) & निर्गमन व्यय (IE)


पूर्वाधिकार अंशों की लागत निर्धारण में समायोजन हेतु कर (Tax) की धनराशि को सम्मिलित नहीं किया जाता है। क्योंकि पूर्वाधिकार अंशों पर लाभांश का भुगतान करों के भुगतान के उपरान्त किया जाता है।


3. समता अंश पूंजी की लागत (Cost of Equity Shares )


समता अंश पूंजी धारक वास्तविक अर्थों में कम्पनी के स्वामी होते हैं।

कम्पनी में होने वाले लाभ का अधिकतम भाग प्रायः समता अंशधारकों के मध्य वितरित करने का प्रयास निदेशक मण्डल द्वारा किया जाता है। किन्तु समता अंश पूंजी पर लाभांश की एक निश्चित दर का भुगतान प्रबन्ध के द्वारा किया जाना अनिवार्य नहीं होता। लाभांश का भुगतान करने या न करने के सम्बन्ध में कम्पनी प्रबन्धन पूर्णरूप से स्वतंत्र है।


समता अंश पूंजी पर देय लाभांश की दर अनिश्चित होने के कारण समता अंश पूंजी की लागत का आकलन करना अपेक्षाकृत कठिन होता है। किन्तु स्वाभाविक तौर पर समता अंश पूंजी को लागत रहित पूंजी (Cost free capital) नहीं कहा जा सकता। वस्तुतः समता अंश धारकों द्वारा कम्पनी में विनिवेष (Investment) लाभांश के रूप में आय प्राप्त करने हेतु ही किया जाता है। प्राय: समता अंशधारक कम्पनी से निम्नलिखित अपेक्षाएं रखते है-


1. समता अंशधारक एक निश्चित दर से प्रति अंश लाभांश (Dividend per share) अनवरत प्राप्त करते रहें। 


2. अंशधारकों के प्रति अंश आय में अनवरत वृद्धि होती रहें।


3. व्यवसाय में अधिकतम लाभ की निरन्तरता बनी रहे, जिससे प्रतिधारित आय (Retained earning) में वृद्धि हो। उपरोक्त अपेक्षाओं के परिप्रेक्ष्य में कम्पनी प्रबन्धन एक न्यूनतम उपर्जन क्षमता बनाये रखने का प्रयास करती है।



प्रायः समता अंश पूंजी की लागत का निर्धारण निम्नलिखित प्रविधियों से किया जाता है-


a) लाभांश प्राप्ति विधि लाभांशप्राप्ति विधि, समता अंशधारकों को प्राप्य लाभांश पर - आधारित विधि होती है। अतः इसे लाभांश मूल्य अनुपात विधि (Dividend Price Ratio method) के नाम से भी जाना जाता है।

व्यावहारिक तौर पर प्रत्याषित या घोषित दर पर समता अंश पूंजी की लागत न होकर अपितु समताअंश पूंजी की लागत लाभांश प्राप्ति के बराबर होती है। इस विधि के अनुसार समता अंश पूंजी की लागत का आकलन निम्न किया जाता है। सूत्र के माध्यम से


Ce DPS x 100


MPS


Ce समताअंश पूंजी की लागत (Cost of equity capital) - D.P.S. प्रति शेयर लाभांश (Dividend per Share) = M.P.S. प्रति शेयर बाजार मूल्य (Market Price per Share) =


उदाहरण मार्डन एग्रो फूड्स लि. में 100 रू. मूल्य वाले (पूर्ण भुगतानित) 10000 समता अंशों का निर्गमन किया गया।

इन अंशों का बाजार मूल्य रू. 150 है। कम्पनी द्वारा रू. 15 प्रति अंश की दर से लाभांश का भुगतान किया गया। समता अंश पूंजी की लागत की गणना कीजिए।


10 150 Ce x 100 -6.67%


सीमाएँ-


1. समता अंशों के वास्तविक मूल्य के सापेक्ष बाजार मूल्य को सम्मिलित किया जाता है जबकि


वास्तविक मूल्य की उपेक्षा की जाती है। 2. संगठन में होने वाली प्रतिधारित आय (Retained earning) की उपेक्षा की जाती है। जबकि


प्रतिधारित आय से अंशों के बाजार मूल्य एवं लाभांश में वृद्धि होती है। 3. इस विधि के अन्तर्गत भविष्य में होने वाली लाभांश की मात्रा में वृद्धि को कोई स्थान नहीं दिया जाता।


4. समता अंशों के बाजार मूल्य में होने वाले उच्चावचनों के कारण उन अंशों का वास्तविक


बाजार मूल्य ज्ञात करना कठिन होता है।


b) उपार्जन प्राप्ति विधि यह विधि आय मूल्य अनुपात विधि (Earning Price ratio


method) के नाम से भी जानी जाती है, इस विधि के अन्तर्गत समता अंश पूंजी की लागत का निर्धारण अंशों पर होने वाली प्रत्याषित आय को उनके बाजार मूल्य से सम्बन्धित करके ज्ञात की जाती है।

यह विधि इस मान्यता पर आधारित है कि समता अंश धारक कम्पनी के अप्रत्यक्ष तौर पर स्वामी होते हैं। इस विधि के अन्तर्गत समता अंश पूंजी की लागत निमन सूत्र के माध्यम से ज्ञात की जाती है-


Ce = x 100 MPS


Ce समताअंश पूंजी की लागत (Cost of equity capital)


=


E.P.S प्रति शेयर आय (Earning per Share) =


M.P.S. प्रति शेयर बाजार मूल्य (Market Price per Share)


c) लाभांश प्राप्ति तथा लाभांश वृद्धि विधि यह विधि इस अवधारणा पर आधारित है कि - समता अंश धारक केवल वर्तमान में प्राप्त लाभांश से संतुष्टन होकर अपितु लाभांश से प्रतिवर्ष वृद्धि की अपेक्षा रखते है। समता अंश जैसे जोखिम पूर्ण विनियोजन का आधार यही है। इस विधि के अन्तर्गत समता अंश पूंजी की लागत का निर्धारण कम्पनी की वर्तमान लाभांश दर में सम्भाव्य भावी वृद्धि का समायोजन करके किया जाता है, इस विधि से पूंजी की लागत का आगणन करने हेतु हम निम्न सूत्र का प्रयोग करते हैं-


D.P.S.


Ce= x 100+ G. R. D.


MPS


Ce समताअंश पूंजी की लागत (Cost of equity capital)


D.P.S. प्रति शेयर लाभांश (Dividend per Share) =


M.P.S. प्रति शेयर बाजार मूल्य (Market Price per Share)


G.R.D. लाभांश वृद्धि दर (Growth rate in dividend)


सीमाएं (Limitation) इस विधि की कतिपय सीमाएं निम्न हैं-


1. इस विधि में यह माना जाता है कि लाभांश दर में होने वाली वृद्धि, प्रति अंश अर्जन तथा प्रति


अंश बाजार मूल्य में होने वाली वृद्धि के समान होगी। जब कि प्रायः व्यवहार में ऐसा नहीं होता।


2. लाभांश में वृद्धि की दर ज्ञात करना कठिन होता है।


3. कम्पनी द्वारा भविष्य में होने वाले लाभांश की मात्रा में अनवरत वृद्धि का अनुमान यथार्थपूर्ण नहीं होता है। कम्पनी को भावी वर्षों में हानि होने की दशा में लाभांश की मात्र में कमी भी हो सकती है।


4. प्रतिधारित आय की लागत (Cost of Retained Earnings)


प्रायः कम्पनियाँ अपने द्वारा अर्जित समस्त लाभों में से सम्पूर्ण भाग वितरित न करके उसका कुछ भाग संगठन के विकास हेतु संचय के रूप में रख लेती है। इसका प्रयोग वित्त की भावी मांग को पूर्ण करने हेतु किया जाता है। इसी से की हुई आय को प्रतिधारित आय (Retained earnings) कहा जाता है। प्रतिधारित आय के रूप में संगठन को आन्तरिक साधनों से पूँजी प्राप्त होती है। इस परिप्रेक्ष्य में आम धारणा यह है कि प्रतिधारित आय के रूप में संग्रहीत पूंजी की कोई लागत नहीं होती है।



व्यवहारिक तौर पर कम्पनी को यह राशि अत्यन्त सहजता से प्राप्त होती है तथा इसके लिए किसी भी प्रकार का निर्गमन व्यय नहीं करना पड़ता, किन्तु वास्तविक रूप में प्रतिधारित आय की कुछ न कुछ लागत अवश्य होती है। क्योंकि अंश धारकों द्वारा अपने लिये उपलब्ध लाभ में से कुछ भाग का परित्याग करना पड़ता है। आय के एक भाग को प्रतिधारित करने से अंश धारक उस आय के पुर्नविनियोग अवसर से वंचित हो जाते हैं। वस्तुतः प्रतिधारित आय की लागत अंशधारकों द्वारा त्याग किये गये विनियोग अवसर की लागत होती है। प्रतिधारित आय की लागत आगणन हेतु दो परिस्थितियाँ विद्यमान हो सकती हैं।


1. जब अंश धारक को प्राप्त लाभांश पर कर एवं दलाली के रूप में कोई धनराशि व्यय नहीं करना


पड़ता। 2. जब लाभांश की प्राप्ति पर कर भुगतान एवं विनियोजन पर दलाली इत्यादि का भुगतान करना पड़ता है।


प्रथम स्थिति में प्रतिधारित आय की अवसर लागत समता अंश पूंजी की लागत के समान होगी। इस प्रकार प्राप्त प्रतिधारिता आय भी निम्न सूत्र की सहायता से की जा सकती है।


Ce E.D. A.R.E. x 100


पूंजी की भारित औसत लागत (Weighted average cost of capital)


प्रायः किसी भी कम्पनी की पूँजी संरचना एक ही प्रकार की प्रतिभूति से निर्मित न होकर अपितु अनेक प्रकार की प्रतिभूतियों के मिश्रण द्वारा निर्मित होती है। पूँजी मिश्रण के सुनिश्चित चयन हेतु स्वामियों द्वारा स्वामित्व नियंत्रण, पूंजी की लागत, उपार्जन क्षमता, आय की मात्र इत्यादि तत्वों को ध्यान में रखा जाता है।

वस्तुतः मिश्रित पूंजी की लागत की गणना सरल नहीं होती। क्योंकि इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रतिभूतियों जैसे पूर्वाधिकार अंश, समता अंश, ऋण पत्र, प्रतिधारित आय इत्यादि तत्वों का सन्तुलित समावेष होता है। प्रायः प्रबन्धकों द्वारा विभिन्न विनियोग प्रस्तावों की लाभदेयकता का मूल्यांकन करने हेतु सम्पूर्ण पूंजी की औसत लागत ज्ञात करने का प्रयास किया जाता है।


किसी विनियोग प्रस्ताव की प्रत्याय दर उसकी सम्पूर्ण पूंजी की औसत लागत से अधिक होने पर विनियोग प्रस्ताव लाभकर तथा औसत लागत से कम होने पर विनियोग प्रस्ताव हानिकर होगा। संस्थाका औसत अर्जन औसत लागत से कम होने पर अंशधारकों के मध्य लाभांश का वितरण सम्भव नहीं होगा। औसत लागत की गणना हेतु पूंजी ढांचे के प्रत्येक घटक की लागत को पूंजी के सापेक्ष भारांकित किया जाता है। पूंजी मिश्रण के प्रत्येक घटक की भारित लागत के योग को 100 से विभाजित करने पर संगठन की पूंजी की मिश्रित लागत ज्ञात हो जाती है। इसे पूंजी की मिश्रित लागत (Mixed cost) पूंजी की समग्र लागत (Over all cost) के नाम से भी जाना जाता है।


गणना - पूंजी की औसत लागत की गणना हेतु निम्न क्रियाओं को सम्पादित करना पड़ता है-


1. संगठन में प्रयुक्त समस्त पूँजी की राशि को या 100 मानकर संगठन में उपलब्ध विभिन्न पूंजी स्रोतों को भारित किया जाता है। पूंजी को भारित करने हेतु पूंजी के विभिन्न स्रोतों के पुस्तक मूल्य (Book Value) अथवा बाजार मूल्य (Market value) को आधार बनाया जाता है।


2. प्रत्येक पूंजी साधन की अलग-अलग विशिष्ट लागत ज्ञात की जाती है।


3. पूंजी के किसी साधन पर लगने वाले करों का भी समायोजन कर लिया जाता है।