वित्तीय निर्णय में पूंजी की लागत की भूमिका - Role of cost of capital in financial decision
वित्तीय निर्णय में पूंजी की लागत की भूमिका - Role of cost of capital in financial decision
परम्परागत विचारधारा के अन्तर्गत वित्तीय निर्णयन में पूंजी की लागत का कोई स्थान नहीं था किन्तु नवीन विचारधारा के अन्तर्गत वित्तीय निर्णयन में पूंजी की लागत का महत्वपूर्ण स्थान है। वस्तुतः फर्म द्वारा लिये गये विनियोग सम्बन्धी निर्णयों में पूंजी की लागत का गहरा प्रभाव पड़ता है। वित्तीय निर्णयन में पूंजी की लागत की भूमिका निम्नलिखित रूप में स्वीकार की गयी है-
1. पूंजी बजटिग सम्बन्धी निर्णयन-
पूंजी बजटिंग सम्बन्धी निणयों में पूंजी की लागत की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है। वस्तुत: किसी भी फर्म की पूंजी की औसत लागत प्रत्याय की उस न्यूनतम दर अथवा मिलान बिन्दु की सूचक है
जिससे कम दर पर पूंजी निवेश के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी जा सकती। किसी परियोजना में विनियोग सम्बन्धी निर्णय विनियोग के शुद्ध वर्तमान मूल्य के धनात्मक होने पर ही लिया जाता है। वस्तुत: वर्तमान परिप्रेक्ष्य में पूंजी की लागत अवधारणा वित्तीय निर्णय के मापदण्ड स्वरूप अत्यन्त उपयोगी हो चुकी है।
2. पूंजी ढाँचे के आयोजन सम्बन्धी निर्णय-
प्रत्येक औद्योगिक संगठन द्वारा संगठन के हित में अनुकूलतम पूंजी ढाँचे की संरचना का प्रयत्न किया जाता है। संगठन की कार्यक्षमता के समुचित विदोहन हेतु एवं पूंजी लागत को न्यूनतम करने हेतु अंश पूंजी तथा ऋण पूंजी का अनुकूलतम मिश्रण (Optimum mix ) तैयार करने का प्रयत्न किया जाता है।
जिससे संगठन की पूंजी की औसत लागत को न्यूनतम रखते हुए अंश पूंजी तथा ऋण पूंजी का अनुकूलतम मिश्रण तैयार करने का प्रयत्न किया जाता है। जिससे संगठन की पूंजी की औसत लागत को न्यूनतम रखते हुए अंशों के बाजार मूल्य को अधिकतम रखा जा सके।
3. अन्य वित्तीय निर्णयन-
अन्य वित्तीय निणयों के अन्तर्गत पूंजी की लागत अवधारणा का प्रमुख बिन्दु पूंजी होती है। इसके माध्यम से कार्यशील पूंजी का प्रबन्ध अत्यन्त सुचारू रूप से किया जा सकता है। लाभांश एवं प्रतिधारण नीतियों के निर्धारण में भी पूंजी की लागत का सिद्धान्त अत्यन्त उपयोगी होता है। इसके अतिरिक्त यह सिद्धान्त फर्म की वित्तीय कार्य निष्पत्ति के मूल्यांकन में प्रभावी भूमिका का निर्वहन करता
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