विभागीयकरण का आधार - basis of departmentalization
विभागीयकरण का आधार - basis of departmentalization
विभागीयकरण के आधार अथवा पद्धतियां
विभागीयकरण के अनेक आधार अथवा पद्धतियां हो सकती हैं। प्रत्येक संस्था अपने
उद्देश्यों, आकार आदि को देखते हुए इनमें से उप्युक्त आधार का चुनाव करते हैं। विभागीकरण के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं:
(क) कार्यों के आधार पर
(ख) वस्तुओं अथवा सेवाओं के आधार पर
(TT) क्षेत्र के आधार पर
प्रक्रिया के आधार पर
ग्राहकों के आधार पर
मैट्रिक्स के आधार पर
(क) कार्यों के आधार पर
विभागीयकरण की यह सबसे सरल एवं सर्वाधिक प्रचलित पद्धति है। इसके अंतर्गत एक जैसी सभी क्रियाओं को अलग-अलग इकाइयों में विभाजित कर दिया जाता है। जैसे- एक निर्माणी संस्था सभी की सभी क्रियाओं को उत्पादन विभाग,
विपणन विभाग, वित्तीय विभाग, एवं सेविवर्गीय विभाग में विभाजित किया जा सकता है। प्रत्येक विभाग में उप-विभागों के अधिकारी विभागाध्यक्ष के प्रति उत्तरदायी होते हैं और विभागाध्यक्ष मुख्य प्रबंधक के प्रति कार्यों के आधार पर विभागीकरण को निम्न चित्र में स्पष्ट किया गया है।
कार्यों के आधार पर विभागीकरण को मूल्यांकन करने के लिए इसके गुण एवं दोषों की जानकारी प्राप्त करना जरुरी है, जो कि निम्नलिखित है:-
गुण
यह विशिष्टीकरण के सिद्धांत पर आधारित होता है।
यह विभागीय स्तर पर समन्वय करता है।
(ii) यह मानवीय एवं अन्य साधनों का प्रभावपूर्ण उपयोग संभव बनाता है।
(iv) यह प्रभावपूर्ण नियंत्रण संभव बनाता है।
(v) यह सरल एवं मितव्ययी है।
(vi) यह लोचपूर्ण होता है अतः इसमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन किए जा सकते हैं। 'आदेश की एकता' के सिद्धांत को भली प्रकार लागू किया जा सकता है।
(vii) .
दोष
कर्मचारियों के एक ही कार्य का विशेषज्ञ होने के कारण पदोन्नति में कठिनाई आती है ।
(11) एक विभाग की कमजोरी का अन्य विभागों पर प्रभाव पड़ता है।
(iii) सभी विभाग मनमानी करते हैं। परिणामतः अन्तर्विभागीय समन्वय में कमी आती है। यह पद्धति कर्मचारियों के पूर्ण विकास में बाधा है।
(ख) वस्तुओं अथवा सेवाओं के आधार पर
यदि किसी व्यवसाय उपक्रम में अनेक प्रकार की वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। तो आवश्यकतानुसार विभागीयकरण के स्थान पर वस्तुओं के अनुसार विभागीयकरण को प्राथमिकता दी जाती है। क्योंकि ऐसी स्थिति में कार्यनुसार विभागीयकरण में यह डर बना रहेगा, कि कुछ वस्तुओं के उत्पादन एवं विपणन पर अधिक ध्यान दे दिया जाएगा और कुछ पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया जाएगा। परिणामस्वरुप कुछ उत्पाद अधिक बिकेंगे और कुछ बहुत कम ऐसे परिणामों से बचने के लिए संस्था की सभी क्रियाओं को वस्तुओं के आधार पर अलग-अलग विभागों में बांट दिये जाते हैं। ये सभी कार्य सभी विभागों द्वारा अलग-अलग किए जाते हैं। इस प्रक्रिया को निम्न चित्र में स्पष्ट किया गया है:
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