उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन के लाभ - Benefits of Management by Objectives

उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन के लाभ - Benefits of Management by Objectives


एम.बी.ओ. से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते है अथवा एम.बी.ओ का महत्व निम्नलिखित कारणों से है:


अधीनस्थों को प्रोत्साहन प्रत्येक कर्मचारी चाहता है कि संस्था में उसकी पहचान बने। यदि कर्मचारियों की यह इच्छा पूरी हो जाए तो वे प्रोत्साहित होते हैं। प्रोत्साहित कर्मचारी निश्चित रूप से अच्छा कार्य करते हैं। एम.बी.ओ के अंतर्गत उद्देश्य निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में अधीनस्थों को भागीदार बना कर उनकी इच्छा को पूरा किया जाता है। इतना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपनी कार्यविधि का चयन करने व अन्य निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता होती है। अतः कहा जा सकता है कि एम.बी. ओ. से अधीनस्थ प्रोत्साहित होते हैं। इसका संस्था के परिणामों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।


(ii) संदेशवाहन प्रक्रिया में सुधार अच्छा संदेशवाहन प्रत्येक संस्था की पहली आवश्यकता होती है। एम.बी.ओ. के अंतर्गत अधिकारी- अधीनस्थों में उद्देश्य निर्धारण से लेकर कार्य पूरा होने तक लगातार बैठकें होती रहती हैं। इससे एक उच्च स्तर का संदेशवाहन नैटवर्क स्थापित होता है। अर्थात विचारों के आदान-प्रदान में पूर्व स्वतंत्रता होती है।


(iii) साधनों एवं क्रियाओं का अच्छा प्रबंध एम.बी.ओ. के अंतर्गत केवल उद्देश्यों का निर्धारण ही प्रभावपूर्ण ढंग से नहीं किया जाता है बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए पर्याप्त साधन भी उपलब्ध कराये जाते हैं। उपलब्ध साधनों का बंटवारा इस ढंग से किया जाता है कि सभी क्रियाओं को पूरा किया जा सके।

ऐसा प्रयास किया जाता है कि न तो साधनों के अभाव में कोई क्रिया अधूरी रह जाए और न ही साधन बेकार पड़े रहें।


(iv) अनुसंधान को बढ़ावा एम.बी.ओ. के अंतर्गत परिणामों पर अधिक और उद्देश्य प्राप्ति के लिए अपनाई जाने वाली विधि पर कम ध्यान दिया जाता है। अधीनस्थों को काम करने की विधियों के चयन करने में पूरी स्वतंत्रता होती है। बेहतर प्रदर्शन दिखाने के लिए अधीनस्थ नई-नई कार्य विधियों की खोज करते हैं। इस प्रकार अनुसंधान को बढ़ावा मिलता है। इसका लाभ नियोक्ता व कर्मचारी दोनों को प्राप्त होता है।


(v) संदेहों में कमी संस्था में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की उद्देश्य निर्धारण में भागीदारी होने के कारण सभी को अपने अधिकार एवं दायित्वों की पूर्ण जानकारी होती है।

सभी को मालूम होता है कि कौन किसका बॉस है और कौन किसका अधीनस्थ । अतः एम.बी.ओ. से अधिकार, दायित्व व आपसी संबंधों में अधिक स्पष्टता आती है।


(vi) स्वतः नियंत्रणः एम.बी.ओ. से थोपे गए नियंत्रण के स्थान पर स्वतः नियंत्रण व्यवस्था स्थापित होती है। यह मानने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि थोपे गए नियंत्रण से स्वयं नियंत्रण बहुत अच्छा होता है। अब प्रश्न यह उठता है एम.बी.ओ में यह परिवर्तन कैसे हो सकता है? एम.बी.ओं में अधीनस्थों की भागीदारी पर जोर दिया जाता है। भागीदारी से अपनेपन की भावना जागृत होती हैं। अपनेपन से स्वतः नियंत्रण होने लगता है।

अर्थात जब कर्मचारी काम पर होते हैं तो उन पर किसी बाहरी नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होती बल्कि वे स्वयं ही नियंत्रण में रहकर काम करते हैं इससे संस्था को अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं और कर्मचारियों को कार्य संतुष्टि प्राप्त होती है।


(vii) मुख्य परिणाम क्षेत्रों की स्पष्टताः एम.बी.ओ. के अंतर्गत मुख्य परिणाम क्षेत्रों का निर्धारण किया जाता है। मुख्य परिणाम क्षेत्रों का अर्थ उन क्रियाओं से है जिन पर अधिक ध्यान देने की जरुरत है। ऐसा करने से प्रबंधकीय कार्यवाही को एक दिशा प्राप्त होती है। यह स्पष्ट हो जाता है कि किन क्रियाओं की सफलता पर उपक्रम की सफलता निर्भर करती है।


(viii) परिवर्तन लागू करना आसान प्रत्येक संस्था अनेक आंतरिक व बाहरी तत्वों से प्रभावित होती है।

इन तत्वों के साथ सामंजस्य करना जरुरी होता है सामंजस्य स्थापित करने के लिए संस्था में अनेक परिवर्तन करने पड़ते हैं। जैसे- उत्पादन की नई विधियों की खोज होने पर उन्हें लागू करना । प्रायः यह देखा जाता है कि कर्मचारी पुराने ढंग से ही काम करना चाहते हैं और किसी भी परिवर्तन का विरोध करते हैं। यहां पर मुख्य बात कर्मचारियों के विरोध से बचते हुए परिवर्तन को लागू करना है। एम.बी.ओ. के लागू किए जाने पर परिवर्तन को लागू करना आसान हो जाता है। इसका मुख्य कारण है कर्मचारियों को प्राप्त स्वतंत्रता । वे स्वयं ही नई-नई विधियों की खोज करते हैं। ऐसा करते-करते वे खोजप्रिय व गतिशील बन जाते हैं। वे परिवर्तन के विरोध की अपेक्षा उसे लागू करने में कार्यशील होते हैं।