केंद्रिकरण के लाभ अथवा महत्व - benefits or importance of centralization
केंद्रिकरण के लाभ अथवा महत्व - benefits or importance of centralization
प्रायः वे सभी दोष जो विकेंद्रिकरण में पाए जाते हैं केंद्रिकरण व्यवस्था उन दोषों से मुक्त होती है और यही कारण है कि कुछ संस्थाओं में (प्रायः छोटी संस्थाएं ) केंद्रिकरण को ही प्राथमिकता दी जाती है। केंद्रिकरण के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
(1) स्वतंत्र व्यवस्था : केंद्रिकरण व्यवस्था में अधीनस्थों की भूमिका कम होने के कारण उच्चाधिकारी स्वतंत्र रहते हैं अर्थात उनकी अधीनस्थों पर कोई निर्भरता नहीं रहती। उच्चधिकारी अधीनस्थों द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों की जोखिम के डर से भी मुक्त हो जाते हैं।
(2) अधिक समन्वय : संस्था के सभी विभाग एक ही केन्द्रिय कार्यालय द्वारा संचालित होने के कारण उनमें संपूर्ण समन्वय बना रहता है।
कोई भी विभाग अन्य विभागों के कार्यो मे रुकावट नहीं बनता।
(3) निर्णयों में एकरुपता सभी निर्णय केंद्रिकरण कार्यालय में लिए जाने के कारण निर्णयों में एकरुपता रहती है। किसी विभाग के लिए लिए गए किसी सफल निर्णय का प्रयोग अन्य विभागों की समस्या को सुलझाने के लिए आसानी से लागू किया जा सकता है।
(4) सस्ती व्यवस्था : केंदियकरण के अंतर्गत सभी विभागों को आत्म-निर्भर बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं जुटाने की जरुरत नहीं होती।
केवल केन्द्रिय कार्यालय पर ही अधिक ध्यान दिया जाता हैं परिणामतः प्रशासनिक लागतों में कमी आती है।
(5) विशेषज्ञों की सेवाओं का लाभ इस व्यवस्था में विशेषज्ञों की नियुक्ति केन्द्रिय कार्यालय में ही की जाती है। क्योंकि केंद्रिकरण में सभी निर्णय वहीं पर लिए जाते हैं इसलिए विशषज्ञों की सेवा का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।
(6) अधिक नियंत्रण प्रायः सभी निर्णय लेने की जिम्मेदारी उच्चाधिकारियों की ही होती है इसलिए वे काम में लापरवाही नहीं कर सकते। उनकी लापरवाही न करने का सीधा प्रभाव नियंत्रण पर पड़ता है।
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