सामूहिक सौदेबाजी एवं मजदूरी - collective bargaining and wages

सामूहिक सौदेबाजी एवं मजदूरी - collective bargaining and wages


मजदूरी निर्धारण में काल मार्क्स, सिडनी, बैब आदि अर्थशास्त्रियों ने श्रम संघ एवं उनके द्वारा की जाने वाली सामूहिक सौदेबाजी को विशेष महत्व दिया है। वर्तमान समय में मजदूरों की मजदूरी एवं अन्य सुविधाओं के संदर्भ में सामूहिक सौदेबाजी मजदूरी निर्धारण प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग बन चुकी है।


सामूहिक सौदेबाजी का अर्थ "जब मजदूर श्रम संघ के रूप में संगठित होकर सेवायोजकों से अपनी मजदूरी वृद्धि एवं अन्य सुविधाएं प्राप्त करने के लिए मोलभाव करते हैं तब इसे सामूहिक सौदेबाजी कहा जाता है।"


प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों ने सामूहिक सौदेबाजी के महत्व को स्वीकार नहीं किया किंतु आधुनिक अर्थशास्त्री मजदूरी निर्धारण में श्रमिक संघों की सकारात्मक भूमिका को स्वीकार करते हैं।


श्रमिकों की बेरोजगारी एवं निम्न आर्थिक स्तर के कारण श्रमिकों की सौदा करने की शक्ति नियोजकों की तुलना में अपेक्षाकृत कम होती है जिसके कारण नियोजक वर्ग श्रमिकों को उनकी सीमांत उत्पादकता के बराबर मजदूरी देने को बाध्य कर सकते हैं और मजदूरी में स्थायी वृद्धि हो सकती है।


दूसरे, श्रमिक संघ नियोजकों द्वारा आधुनिकीकृत उत्पादन प्रक्रिया अपनाकर व्यापारिक संगठन को अधिक सुव्यवस्थित कर तथा स्वयं श्रमिकों में शिक्षा एवं कल्याणकारी कार्यों का प्रसार करके उनकी कार्य कुशलता में वृद्धि कर सकते हैं। तीसरे, श्रमिक संघ किसी विशेष व्यवसाय में भी श्रमिकों की पूर्ति सीमित करके उनकी मजदूरी बढ़ा सकते हैं।


ऐसा प्रयत्न श्रमिक संघों द्वारा निम्नलिखित दशाओं में किया जा सकता है:


(1) यदि वस्तु का उत्पादन श्रम गहन हो और उसे किसी अन्य साधन से उत्पादित न किया जा सके।


(2) उत्पादित वस्तु की मांग बेलोचदार हो अर्थात् वस्तु की कीमत वृद्धि से वस्तु की मांग अप्रभावित रहे।


(3) उत्पति के अन्य साधनों की पूर्ति सीमित न हो।


(4) यदि श्रमिकों की मजदूरी का बिल उत्पादक के कुल मजदूरी बिल का एक बहुत छोटा भाग हो जिससे कि मजदूरी अधिक दरों पर भी वस्तु की कीमत में अधिक वृद्धि न हो।


व्यावहारिकता में श्रमिक संघ उपर्युक्त उपयों से श्रमिकों की केवल मौद्रिक मजदूरी में ही वृद्धि नहीं करते बल्कि श्रमिकों की जीवन दशाओं में सुधार करके तथा समय-समय पर श्रमिकों को विविध लाभ सुविधाएं दिलवाकर उनकी वास्तविक मजदूरी में भी वृद्धि करते हैं।