औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन में अंतर - difference between formal and informal organization

औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन में अंतर - difference between formal and informal organization


दोनों प्रकार के संगठनों में अंतर निम्न चित्र एवं तालिका की सहायता से स्पष्ट किया गया है।


प्रबंधक तथा क्रय सुपरिटेन्डेन्ट के मुख्य, श्रृंखला में रहते हुए व्यवहार करना होता है। अर्थात क्रय सुपरिटेन्डेन्ट अपनी बात केवल क्रय प्रबंधक को ही कह सकता है। इसी प्रकार की श्रृंखला उत्पादन एंव वित्त विभाग में भी काम करेगी। इसके विपरीत, अनौपचारिक संगठन में क्रय सुप्रिटेंडेंट अपने आपसी संबंधो के कारण उत्पादन प्रबंधक से विचार-विमर्श कर सकता है। इसी प्रकार वित्त सुप्रिटेंडेंट सीधे ही मुख्य प्रबंधक के सामने अपनी समस्या रख सकता है।


निम्न तालिका द्वारा औपचारिक संगठन के मध्य अंतर को आसानी से समझा जा सकता है।


अंतर का आधार


1. अर्थ


औपचारिक संगठन


अधिकार संबंधो के ढांचे के रूप में प्रबंधन द्वारा उत्पन्न किए गए संगठन को औपचारिक संगठन कहते हैं।


अनौपचारिक संगठन


आपसी संबंधों के कारण स्वतः उत्पन्न संगठन को अनौपचारिक संगठन कहते हैं।


2. उद्गम


इसकी स्थापना संगठन की नीतियों इसकी स्थापना सामाजिक संबंधों के कारण होती है।


3. अधिकार


एवं नियमों के कारण होती है। अधिकार संगठन में स्थापित पदों के कारण उत्पन्न होते हैं तथा ऊपर से नीचे की ओर प्रवाहित होते हैं।


अधिकार व्यक्तिगत गुणों के कारण उत्पन्न होते हैं। अधिकारों का प्रवाह ऊपर से नीचे या समतल रूप में हो सकता है।


4. व्यवहार


व्यवहार पूर्व निर्धारित होता है। अर्थात यह पहले से ही मालूम होता है कि कौन क्या करेगा, कैसे करेगा, कौन बॉस होगा और कौन अधीनस्थ


व्यवहार व्यक्तिगत लगाव पर निर्भर करता है। अर्थात यह पहले से निर्धारित नहीं होता है।


5. संदेशवाहन अथवा सम्प्रेषण का प्रवाह


6. प्रकृति


सम्प्रमेषण पारिभाषित होता है। यह सोपान श्रृंखला के अनुसार चलता है ।


सम्प्रेषण पारिभाषित नहीं होता। यह किसी भी दिशा में प्रवाहित हो सकता है।


यह अधिक स्थिर अथवा टिकाऊ होता है। इसमें पूर्वानुमान संभव नहीं होता है।


यह अस्थिर अथवा कम टिकाऊ होता है। इसमें पूर्वानुमान संभव नहीं है।


7. नेतृत्व


नेता होते हैं।


प्रबन्धक अपने उच्च पदों के कारण नेता चुना जाता है।