प्रदर्शन पर आधारित मुआवजा प्रोग्राम की हानियां - Disadvantages of a Performance-Based Compensation Program
प्रदर्शन पर आधारित मुआवजा प्रोग्राम की हानियां - Disadvantages of a Performance-Based Compensation Program
(क) अस्थिरता - इस प्रोग्राम के लागू होने से कर्मचारी अपनी आय का अनुमान ठीक प्रकार से नहीं लगा पाते। उन्हें स्थिर मुआवजे प्राप्त न होने के कारण उनकों निलने वाले भुगतान अस्थिर रहते हैं।
(ख) कार्य के घंटों की अनिश्चिताः- इस मुआवजा कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य पूर्ण करने के घंटे स्थिर नहीं होते इसलिए कार्य के समय में भी अनिश्चिता बनी रहती है।
(ग) जटिल उद्देश्यों को न प्राप्त करने पर निराशा संगठन में निर्धारित उद्देश्य कई बार बहुत जटिल होते है और कर्मचारी मुआवजा प्राप्ति के लिए अपना प्रदर्शन कर उन्हें प्राप्त करने की कोशिश करते है
परंतु कई बार वह असफल रहते हैं। इस प्रकार उनमें निराशा जागृत हो जाती है।
(घ) सहयोग की भावना में कमी- इस प्रोग्राम के अंतर्गत कर्मचारी केवल अपने प्रदर्शन की ओर ध्यान देते है न कि अन्य कर्मचारियों को सहयोग देने या उनके कार्यो पर इस प्रकार संगठन में सहयोग की भावना नहीं रहती ।
(ङ) वित्तीय पुरस्कारों पर अधिक जोर कर्मचारी प्रदर्शन पर आधारित पुरस्कारों व मुआवजों को पाने के लिए केवल अपने बारे में सोचते है, वह संगठन के विकास तथा उद्देश्यों के बारे में विचार नहीं करते।
(च) कर्मचारियों की अपेक्षाओं में बढोतरी इन प्रोग्रामों के लागू होने से कर्मचारियों की अपेक्षाओं में प्रतिदिन बढोतरी होती रहती है।
(छ) टीमवर्क में कमी- प्रदर्शन के आधार पर मुआवजे मिलने के कारण संगठन में कर्मचारी टीमवर्क में कार्य नहीं करते बल्कि उनके बीच में जलन, ईष्या, द्वेष आदि बुरी भावनाएं उत्पन्न हो जाती है।
(ज) परिवर्तनों का विरोध- संगठन द्वारा एक बार मुआवजा कार्यक्रम लागू होने के बाद यदि कुछ बदलाव किए जाए तो कर्मचारी उन बदलावों का विरोध करते हैं।
(झ) उत्पाद की गुणवता में कमी- प्रदर्शन के आधार पर मुआवजा कार्यक्रम लागू होने के कारण कर्मचारी केवल अधिक कार्य कर अधिक मुआवजे प्राप्त करने के लिए कार्य करते है तथा उत्पाद की गुणवता पर वो बिल्कुल ध्यान नही देते।
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