समन्वय प्रबंधन का सार - essence of coordination management
समन्वय प्रबंधन का सार - essence of coordination management
समन्वय के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि क्या इसे प्रबंधन के अन्य कार्यों (जैसे- नियोजन, संगठन, नियुक्तिकरण, निर्देशन व नियंत्रण) की श्रृंखला में ही प्रबंधन का छठा कार्य माना जाए या नहीं? कुछ प्रबंधन विशेषज्ञयों (जैसे- फेयोल, एल. ए. ऐलन व ऑर्ड वे टीड) का मानना है कि समन्वय प्रबंधन का एक अलग कार्य नहीं है बल्कि यह प्रबंधन के अन्य सभी कार्यों का एक मुख्य हिस्सा है। आधुनिक प्रबंधन विशेषज्ञय कण्ट्ज तथा ओ डोनेल इस विचारधारा के प्रबल समर्थक है। इसी संदर्भ में उन्होनें कहा है कि समन्वय प्रबंधन का सार है। अर्थात जब एक प्रबंधक सभी कार्यों को पूरा करता है तो वह समन्वय की स्थापना में ही व्यस्त रहता है। यह तथ्य निम्न व्याख्या से स्पष्ट होता है:
समन्वय तथा नियोजन एक प्रबंधक जब नियोजन कार्य में व्यस्त होता है तो उस समय उसके सोच-विचार का केन्द्र बिंदु समन्वय ही होता है। विभिन्न विभागों की क्रियाओं को ध्यान में रखकर ही नियोजन किया जाता है। उदाहरण के लिए, जब एक विक्रय प्रबंधक अपने विभाग के विक्रय लक्ष्य को बढ़ाने की योजना बना रहा होता है तो वह उत्पादन प्रबंधक, क्रय प्रबंधक, वित्त प्रबंधक, आदि से भी विचार विमर्श करता है ताकि भविष्य में कोई समस्या उत्पन्न न हो ऐसा करना यह प्रदर्शित करता है
कि नियोजन के दौरान समन्वय स्थापित किया जाता है। समन्वय एवं संगठन प्रबंधन के संगठन कार्य के अन्तर्गत संस्था के मुख्य कार्य को अनेक उपक्रमों में बांटने तथा उन्हें पूरा करने वाले व्यक्तियों के मध्य सम्बंधों की व्याख्या की जाती है ताकि व्यवसाय की सभी क्रियाएं व्यवस्थित ढंग से पूरी की जा सकें। जब प्रबंधक वह कार्य कर रहा होता है तो उसका प्रयास सभी विभागों में तथा एक ही विभाग के अनेक व्यक्तियों में समन्वय स्थापित करने का रहता है। उदाहरण के लिए क्रय विभाग में कार्य करने वाले अनेक व्यक्तियों के मध्य काम व बाजार का बंटवारा इस ढंग से किया जाता है कि एक व्यक्ति दूसरे के काम में अड़चन नहीं बनें।
(iii) समन्वय एवं नियुक्तिकरण संगठन के कार्य के अंतर्गत संस्था में विभिन्न पद स्थापित किए जाते हैं
जबकि नियुक्ति कार्य द्वारा उनमें जान डाली जाती है। अर्थात संगठन में स्थापित विभिन्न पदों को व्यक्तियों से भरा जाता है। जब एक प्रबंधक नियुक्ति कार्य कर रहा होता है तो उस समय भी उसका ध्यान समन्वय को समर्पित होता है। उसका यह प्रयास रहता है कि सभी पदों को योग्य एवं अनुभवी व्यक्तियों से भरा जाए ताकि संस्था की सभी क्रियाएं बिना रुकावट के चलती रहें।
(iv) समन्वय एवं निर्देशन प्रबंधक निर्देशन कार्य को पूरा करते समय समन्वय को प्राथमिकता देता है। जब वह एक अधीनस्थ को आदेश देता है तो इस बात का ध्यान रखता है कि अन्य लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
अन्य लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना को टालने का पूरा प्रयास किया जाता है। ऐसी विचारधारा कुछ और नहीं बल्कि समन्वय स्थापना का ही एक प्रयास है। उदाहरण के लिए, एक जैसा काम करने वाले दो व्यक्तियों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाता है ताकि उनमें कोई मनमुटाव न हो।
(v) समन्वय एवं नियंत्रण : नियंत्रण के अन्तर्गत काम की प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है ताकि समय पर ही सुधारात्मक कार्यवाही करके विपरीत परिणामों से बचा जा सके। समन्वय के संदर्भ में, नियंत्रण द्वारा संस्था के उद्देश्यों, उन्हें प्राप्त करने के लिए उपलब्ध साधनों एवं मानवीय प्रयासों में सन्तुलन स्थापित किया जाता है।
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट होता है कि समन्वय प्रबंधन के सभी कार्यों के साथ जुड़ा होता है। अतः निसंकोच यह कहा जा सकता है कि समन्वय प्रबंधन का कोई अलग कार्य नहीं है बल्कि यह तो प्रबंधन का सार है।
समन्वय की आवश्यकता प्रबंधन के सभी स्तरों पर होती ह
प्रबंधन के तीन स्तर होते हैं उच्च मध्य एवं निम्न स्तर प्रबंधन के स्तरों को यदि समन्वय के दृष्टि से देखा जाए तो स्पष्ट होता है कि समन्वय का सम्बन्ध किसी एक प्रबंधकीय स्तर से नहीं है बल्कि इसकी आवश्यकता अथवा महत्व सभी प्रबंधकीय स्तरों पर बराबर है।
किसी कार्य को यदि एक ही व्यक्ति कर रहा हो तो समन्वय की समस्या उत्पन्न नहीं होती क्योंकि सारा काम एक ही व्यक्ति द्वारा सम्पन्न किया जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि समन्वय का सम्बन्ध सामूहिक प्रयासों के साथ है। प्रबंधन के प्रत्येक स्तर का काम अनेक व्यक्तियों द्वारा सामूहिक रुप से किया जाता है और इस काम को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए उनमें समन्वय की आवश्यकता होती है। अतः कहा जा सकता है कि समन्वय की आवश्यकता सभी प्रबंधकीय स्तरों पर है।
इतना ही नहीं यदि प्रबंधन के तीनों स्तरों को एक नजर में देखा जाए तो यह भी अपने आप में एक समूह बन जाता है और समूह का नाम आते ही पूनः समन्वय कर जरुरत महसूस होती है। अतः तीनों प्रबंधकीय स्तरों पर व्यक्तिगत रुप से भी और सामूहिक रुप से भी समन्वय की आवश्यकता होती है।
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