उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन की विशेषताएँ - Features of Management by Objectives

उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन की विशेषताएँ - Features of Management by Objectives


उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर एम.बी.ओ. की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: सभी क्रियाएं उद्देश्य - प्रधान होती हैं एम.बी.ओ. की प्रथम विशेषता, संस्था की सभी क्रियाओं का उद्देश्य-प्रधान होना है। इसका अभिप्राय यह है कि संस्था में की जाने वाली सभी क्रियाएं उद्देश्य प्राप्ति के संदर्भ में ही की जाती हैं। (ii)


संगठनात्मक, विभागीय एवं व्यक्तिगत उद्देश्यों में सामंजस्य एम.बी.ओ. का आधार उद्देश्यों का अधिकारियों व अधीनस्थों द्वारा सामूहिक रूप में निर्धारण व उसकी प्रभावपूर्ण ढंग से प्राप्ति होता है। एम.बी.ओ. के अंतर्गत उद्देश्य निम्न क्रम में निर्धारित किए जाते हैं :- 


सर्वप्रथम एक संगठन / उपक्रम के उद्देश्यों का निर्धारण किया जाता है। इन्हीं के संदर्भ में विभागीय उद्देश्य निश्चित किए जाते हैं। विभागीय उद्देश्यो को पूरा करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के उद्देश्यों का निर्धारण किया जाता है। अर्थात ऐसा प्रयास किया जाता है कि किसी भी स्तर पर उद्देश्यों में विरोध अथवा टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो।


(iii) एम.बी.ओ. संगठन को गतिशील इकाई मानता है: एम.बी.ओ. की तीसरी विशेषता संगठन को एक गतिशील इकाई मानना है। प्रत्यके संगठन पर अनेक आंतरिक व बाहरी तत्वों का प्रभाव पड़ता है।

यही कारण है कि संगठन को गतिशील इकाई माना गया है। संगठन के गतिशील होने का प्रभाव उद्देश्यो पर भी पड़ता है। हो सकता है आज जो उद्देश्य निर्धारित किए गये हों, कल उन्हें प्राप्त करना असंभव हो जाए। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर उद्देश्यों में परिवर्तन कर लेना चाहिए।


(iv) एम.बी.ओ. एक भागीदारी प्रयास है एम.बी.ओ. की एक मान्यता यह है कि भागीदारी से जिम्मेदारी बढ़ती है। इसका अभिप्राय है कि जब हम किसी व्यक्ति को काम प्रारंभ करने से पहले ही साथ लेकर चलें तो अपने कार्य के प्रति उसकी निष्ठा बढ़ जाती है। यहां प्रारंभ से साथ लेकर चलने का अभिप्राय उद्देश्य निर्धारण में भागीदारी से है।

निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि यदि कोई कर्मचारी उद्देश्य निर्धारण में भागीदारी करता है तो वह बढ़िया काम करने के लिए प्रोत्साहित होता है।


(v) एम.बी.ओ. उद्देश्य एवं साधनों में सामंजस्य स्थापित करता है: एम.बी.ओ. के अंतर्गत उद्देश्यों का निर्धारण उपलब्ध साधनों के संदर्भ में ही किया जाता है ताकि कोई भी क्रिया ऐसी न रह जाए जो साधनों के अभाव में अधूरी रह जाए। इसके अतिरिक्त आवश्यकता से अधिक साधन उपलब्ध होने पर उनके लाभकारी विनियोग की संभावनाओं की तलाश की जाती है।


(vi) एम.बी.ओ. एक दर्शनशास्त्र है न कि एक पद्धतिः एम.बी.ओ प्रबंधन की एक पद्धति नहीं है।

यह तो प्रबंधन का दर्शनशास्त्र है। यहां पद्धति व दर्शनशास्त्र में अंतर समझ लेना जरुरी है। एक प्रबंधकीय पद्धति को कम्पनी के विशेष विभाग में ही लागू किया जा सकता है और अन्य विभागों में इसका प्रभाव नहीं के बराबर होता है। उदाहरण के लिए एक स्टॉक नियंत्रण पद्धति का प्रयोग स्टॉक के संबंध में ही किया जा सकता है, न कि भर्ती व चयन प्रक्रिया में या किसी अन्य प्रक्रिया में दूसरी ओर, दर्शनशास्त्र का प्रभाव कम्पनी के सभी विभागों पर पड़ता है। जैसे प्रशासकीय व्ययों को न्यूनतम स्तर पर लाने का निर्णय लेना इस निर्णय से सभी विभाग प्रभावित होंगे क्योंकि एम. बी. ओ. एक ही समय पर पूरी संस्था को प्रभावित करता है। इसलिए इसे प्रबंधन की एक पद्धति कहा गया है।


(vii) एम.बी.ओ. पुनर्विचार एवं निष्पदान मूल्यांकन पर अधिक जोर देता है :

कर्मचारियो द्वारा किए जा रहे कार्य का समय-समय पर मूल्यांकन करते रहना एम.बी.ओ. की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। इसके अंतर्गत देखा जाता है कि क्या सभी व्यक्ति अपेक्षित स्तर पर काम कर रहे हैं। क्या उनके काम में कोई बाधा तो उत्पन्न नहीं हो रही है। यदि आवश्यक हो तो उद्देश्यों एवं काम की विधियों पर पुनर्विचार किया जा सकता है और उनमें परिवर्तन किए जा सकते हैं।


(viii) एम.बी.ओ. अधीनस्थों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है एम.बी.ओ. के अंतर्गत अधीनस्थों की केवल उद्देश्य निर्धारण में ही भागीदारी नहीं होती है

बल्कि अपना काम करने में भी उन्हें पूरी स्वतंत्रता दी जाती है। उन्हें अपने पद से संबंधित निर्णय लेने के अधिकार प्रदान किए जाता है। इससे उनके पद की गरिमा बढ़ती है। परिणामस्वरूप वे अधिक रुचि से काम करते हैं और उन्हें पूर्ण कार्य संतुष्टि प्राप्त होती है।


(ix) एम.बी.ओ. परिणाम पर जोर देता है न कि कार्यविधि पर एम.बी.ओ. के अंतर्गत परिणाम पर अधिक ध्यान दिया जाता है अंतिम परिणाम पर पहुंचने के लिए किस विधि का प्रयोग किया जाए यह अधीनस्थों पर छोड़ दिया जाता है। अतः अधीनस्थों से सर्वश्रेष्ठ परिणामों की अपेक्षा की जाती है चाहे ये कैसे भी प्राप्त हो।