समन्वय का महत्व - importance of coordination
समन्वय का महत्व - importance of coordination
एक औद्योगिक संगठन में समन्वय का महत्व निम्नलिखित कारणों से होती है। - श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण के परिणामस्वरुप एक मुख्य क्रिया को अनेक छोटी-छोटी उपक्रियाओं में विभाजित कर दिया जाता है। प्रत्येक उपक्रिया को अलग-अलग व्यक्तियों या व्यक्ति समूहों को सौंपा जाता है। जोकि उस क्रिया के विशेषज्ञ होते हैं जिससे अधिकतम कार्यकुशलता का लाभ उठाया जा सके। जहां एक ओर हम श्रम विभाजन और विशिष्टीकरण से लाभ प्राप्त करते हैं, वहीं दूसरी ओर समन्वय की कठिनाई का भी सामना करना पड़ता है। प्रत्येक व्यक्ति उसी कार्य में दक्ष हो जाता है, जिसे वह निरंतर कर रहा है और वह अपने आप को कुल कार्य के साथ नहीं जोड़ पाता। अतः दोष को दूर करने के लिए समन्वय की आवश्यकता होती है। (i)
(ii) विभिन्न विभागों का अर्थ-स्वतंत्र अस्तित्व वर्तमान युग बड़े पैमाने के उत्पादन का - युग है, जहां संगठन का आकार बहुत बड़ा होता है। एक संगठन में अनेक विभाग होते हैं। विकेन्द्रियकरण की प्रक्रिया के कारण इन विभागों को अनेक विषयों में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार है। इस स्वतंत्रता के कारण ऐसी स्थिति भी आ जाती है कि एक विभाग के द्वारा लिए गए निर्णय, दूसरे विभागो के कार्यों, हितों एवं नीतियों से तथा संगठन के हितों से तालमेल नहीं खाते। अतः समन्वय की आवश्यकता पड़ती है।
(iii) संगठन में मानवीय तत्व - प्रत्येक संगठन में कार्य करने वाले व्यक्ति होते हैं
और प्रबंधकों को अन्य कर्मचारियों से काम लेना होता है। मानव स्वभाव प्राकृतिक रुप से ही बड़ा परिवर्तनशील, चंचल एवं विषम है, जो कि अनेक बार संगठनात्मक उद्देश्यों से हटकर भी कार्य करने लग जाता है। इसके अतिरिक्त प्रेम, ईर्ष्या, विचारों में मतभेद आदि भी मानव स्वभाव के आवश्यक अंग है। समन्वय की आवश्यकता का एक अन्य कारण यह है कि संगठन में विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग मात्रा में अधिकार सौंपे जाते है। जिन व्यक्तियों को कम अधिकार मिलते हैं, उनका अनेक बार अपने उच्च अधिकारियों से मन-मुटाव चलता है। अतः इसे दूर करने के लिए भी समन्वय की आवश्यकता होती है।
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