अनौपचारिक संगठन - informal organization
अनौपचारिक संगठन - informal organization
अनौपचारिक संगठन का आशय ऐसे संगठन से है जिसकी स्थापना जान-बूझकर नहीं की जाती, बलिक अनायास ही पारस्परिक समान हितों, रुचियों, धर्म एवं संबंधों के कारण हो जाती है। अनौपचारिक संगठन की मुख्य विशेषता आपसी संबंधों की मैत्रीपूर्ण व सहयोगपूर्ण प्रकृति है। इसके अंतर्गत एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के कामों में इसलिए मदद नहीं करता कि वह इसके लिए जिम्मेदार है, बल्कि इसलिए करता है कि यह उसकी निजी इच्छा एवं पसंद है। उदाहरणार्थ, औपचारिक संगठन के अंतर्गत क्रय विभाग का पर्यवेक्षक अपनी कार्य संबंधी किसी समस्या के लिए केवल क्रय विभाग के प्रबंधक से ही सलाह लेने के लिए बाध्य हैं।
लेकिन अनौपचारिक संगठन में यह सलाह किसी अन्य विभाग के प्रबंधक या पर्यवेक्षक से ली जा सकती है। इतना ही नहीं बलिक एक पर्यवेक्षक सीधा मुख्य प्रबंधक से भी बातचीत कर सकता है।
चेस्टर बनार्ड के अनुसार, "वह संगठन अनौपचारिक है जिसमें आपसी संबंध अज्ञानतावश संयुक्त उद्देश्यों के लिए बनते हैं।"
अनौपचारिक संगठन के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
औपचारिक संगठन पर आधारितः यह औपचारिक संगठन पर आधारित होता है। औपचारिक संगठन में काम कर रहे व्यक्तियों के मध्य ही अनौपचारिक संबंध होते हैं
( अर्थात पहले औपचारिक संगठन स्थापित होता है और फिर उसी में से अनौपचारिक संगठन बनता है)।
इसके लिखित नियम एवं प्रक्रियाएं नहीं होते हैं इस संगठन में आपसी व्यवहार के कोई लिखित नियम एवं प्रक्रिया नहीं होती, फिर भी इसकी अपनी समूह परंपराएं होती हैं। जिनका पालन करना पड़ता है। उदाहरणार्थ, किसी संस्था में कार्यरत एक विशेष समुदाय के कुछ व्यक्ति एक अनौपचारिक ग्रुप बना लेते हैं। धीरे-धीरे इस ग्रुप की परंपराएं अथवा मान्यताएं विकसित हो जाती है। जैसे अपने समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत एवं कार्यस्थल से संबंधित किसी भी समस्या का समाधान करना। इसी प्रकार अपने समुदाय के सभी लोगों को प्रबंधकीय शोषण से बचाना। इस तरह अनौपचारिक समूह में शामिल होने वाले सभी सदस्य समूह की मान्यताओं का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।
(iii) स्वतंत्र संदेशवाहन श्रृंखला इसमें विभिन्न व्यक्तियों के मध्य संबंधों को पारिभाषित नहीं किया जा सकता। क्योंकि एक निम्न स्तर के व्यक्ति का भी उच्चतम स्तर के व्यक्ति के साथ सीधा संबंध हो सकता है। इसीलिए संदेशवाहन के प्रवाह को स्पष्ट नहीं किया जा सकता।
(iv)
यह जानबूझकर स्थापित नहीं किया जाता है अनौपचारिक संगठन की स्थापना जान-बूझकर नहीं की जाती बल्कि व्यक्तियों के आपसी संबंधों एवं रुचियों के आधार पर हो जाती है।
(v) संगठन चार्ट पर कोई स्थान नहीं: अनौपचारिक संगठन का विधिवत रूप से तैयार किए गए संगठन चार्ट पर कोई स्थान नही होता।
इसके अतिरिक्त संगठन पुस्तिका में भी इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती।
(vi) यह व्यक्तिगत होता है इसके व्यक्तिगत होने का अभिप्राय यह है कि इसके अंतर्गत व्यक्तियों की भावनाओं को ध्यान में रखा जाता है और उन पर किसी भी बात को थोपा नहीं जाता।
(vii) स्थायित्व की कमी: इसमें प्रायः स्थायित्व का अभाव होता है जैसे एक व्यक्ति आज एक ग्रुप में बैठता है तो कल किसी अन्य ग्रुप में संबंध स्थापित कर लेता है। इतना ही नहीं बल्कि एक व्यक्ति एक ही समय में एक से अधिक समूहों का सदस्य भी हो सकता है।
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