अनौपचारिक संगठन की सीमाएं - Limitations of Informal Organization

अनौपचारिक संगठन की सीमाएं - Limitations of Informal Organization


(i) यह अफवाहें फैलाता है: अनौपचारिक संगठन में सभी व्यक्ति लापरवाही से बात-चीत करते हैं और कई बार गलत बात एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल जाती है जिसके भयंकर परिणाम सामने आते हैं।


(ii) यह परिवर्तन का विरोध करता है: यह संगठन परिवर्तनों का विरोध करता है और पुरानी पद्धतियों को ही लागू रखने पर जोर देता है।


(iii) समूह परंपराओं का दबाव: इस संगठन में सदस्यों पर समूह परंपराओं का पालन करने का दबाव रहता है कई बार अनौपचारिक समूहों में एकत्रित हुए कर्मचारी अपने लक्ष्य से बेखबर हो जाते हैं

और सभी एक आवाज़ में अपने अधिकारों का विरोध करने का निर्णय ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।


उपरोक्त वर्णन से दोनों प्रकार के संगठनों के गुण व दोष स्पष्ट होते हैं जहां एक ओर औपचारिक संगठन संस्था के उद्देश्यों को सरलता से प्राप्त करने में सहायक हैं, वहीं दूसरी ओर, यदि ठीक ढंग से प्रयोग में लाया जाए तो अनौपचारिक संगठन का महत्व भी कम नहीं है। संक्षेप में, कर्मचारियों में अनौपचारिक संबंध, औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन एक सामूहिक कार्य के लिए इस तरह जरुरी है जैसे कि एक ऊँची को कार्य करने योग्य बनाने के लिए उसमें दो ब्लेडों का होना जरुरी है। इसी संदर्भ में यह कहना भी उचित होगा कि प्रबंधन का अनौपचारिक संगठन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए।