प्रबंधन का अर्थ एवं विशेषताएँ - Meaning and Characteristics of Management
प्रबंधन का अर्थ एवं विशेषताएँ - Meaning and Characteristics of Management
विभिन्न विद्वानों ने प्रबंधन को इसकी विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग ढंग से परिभाषित किया है। कुछ विद्वानों ने प्रबंधन को अन्य लोगों से कार्य करवाने की कला के रूप में परिभाषित किया है तो कुछ ने इसको "क्रियात्मक रुप में समझा है :- थियो हैमन ने प्रबंधन को निम्नलिखित अर्थों में समझाया है:
(1) प्रबंधन संज्ञा के रूप में इस अर्थ में प्रबंधन का आशय उन सभी व्यक्तियों से है जो दूसरों से कार्य करवाने में संलग्न हैं, जैसे - संचालक मंडल, प्रमुख संचालक, महाप्रबंधक आदि।
(ii) प्रबंधन प्रक्रिया के रूप मे इसका आशय प्रबन्धकों द्वारा किए जाने वाले कार्यों से : है जैसे नियोजन, संगठन, स्टाफिंग, समन्वय, निर्देशन, नियंत्रण आदि
(iii) प्रबंधन अनुशासन के रूप में प्रबंधन' शब्द का उपयोग ज्ञान की शाखा के रूप में
भी होता है जिसमें प्रबंधन के सिद्धान्तों का एक विषय के रूप में अध्ययन होता है। (iv) हेरोल्ड कूल्टज् के अनुसार प्रबंधन औपचारिक रूप से संगठित समूहों में अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर कार्य करने तथा करवाने की कला है।"
(iv) जार्ज आर. टेरी के अनुसार, "प्रबंधन एक विशेष प्रक्रिया है जिसमें नियोजन, संगठन, उत्प्रेरण एवं नियंत्रण सम्मिलित है। इनमें से प्रत्येक में विज्ञान एवं कला दोनों का प्रयोग करते हुए पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इनका अनुसरण किया जाता है"।
(v) एफ.डब्लयू टेलर, "प्रबंधन यह जानने की कला है कि आप क्या करवाना चाहते हैं और उसके बाद यह देखना कि वे इसे सर्वोत्तम एवं मितव्ययिता वाली विधि से करें ।
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