विभागीकरण का अर्थ एवं महत्व - Meaning and importance of departmentalization
विभागीकरण का अर्थ एवं महत्व - Meaning and importance of departmentalization
विभागीयकरण का अर्थ संगठन के औपचारिक ढांचे के आयामों अथवा फैलाव को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है:
लम्बावत् आयाम, तथा समानांतर आयाम
संगठन के ढांचे का समानान्तर आयाम विशिष्टीकरण पर आधारित है: अर्थात इसके अंतर्गत एक ही स्तर पर किए जाने वाले कुल कार्यों को, कार्यों में एकरुपता के आधार पर अनेक क्रिया समूहों में बांट दिया जाता है, ताकि प्रत्येक क्रिया समूह के लिए विशेष योग्यता एवं निपुणता प्राप्त प्रबंधक नियुक्त किया जा सके। विशिष्टि के कारण न केवल प्रत्येक क्रिया समूह के प्रबंधक के कार्य भार में कमी आती है बल्कि वे अपने-अपने विशेष कार्य को अधिक कुशलता के साथ कर पाता है।
विशिष्टीकरण के आधार पर इस प्रकार काम बांटने की प्रक्रिया को विभागीयकरण कहते हैं। तथा इस प्रकार स्थापित विभिन्न क्रिया समूहों को विभाग कहते हैं उदाहरणार्थ, एक निर्माणी संस्था में उत्पादन, विपणन, वित्तीय तथा सेवावर्गीय विभाग स्थापित किए जा सकते हैं। ये विभाग स्थापित करने से पहले संस्था के उद्देश्यों के आधार पर क्रियाओं का निर्धारण किया जाता है और एक जैसी सभी क्रियाओं को एक क्रिया समूह अथवा विभाग को सौंप दिया जाता है, जैसे विक्रय, बाजार, सर्वेक्षण एवं विज्ञापन को विपणन विभाग को सौंपा जा सकता है।
कूण्ट्ज एवं ओ'डोनेल के अनुसार, "विभागीकरण एक विशाल क्रियात्मक संगठन को छोटी एवं लोचशील प्रशासनिक इकाइयों में विभक्त करने की प्रक्रिया है।"
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